Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    पिता-बेटी साल भर कागजों में मृत थे:खबर चलने के बाद विभाग जागा, बेटी को मिलेगी मुफ्त दवा

    7 hours ago

    2

    0

    औरैया में सिस्टम की लापरवाही के कारण एक पिता और उनकी बेटी को राशन कार्ड में मृत दर्शा दिया गया। इस त्रुटि के चलते बेटी का इलाज रुक गया, जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रही है। पीड़ित पिता एक छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी बेटी पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, जिसके इलाज के लिए हर महीने लगभग 40 हजार रुपये की दवाओं की आवश्यकता होती है। राशन कार्ड में मृत घोषित होने के बाद उन्हें ये दवाएं मिलनी बंद हो गई थीं। परिवार पिछले एक साल से जिला खाद्य पूर्ति अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगा रहा था, लेकिन कागजों में खुद को और अपनी बेटी को जीवित साबित करने में असमर्थ था। उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। दैनिक भास्कर द्वारा इस मामले को प्रमुखता से उठाने के बाद, पीड़ित परिवार के पास लखनऊ से फोन आया। इसके तत्काल बाद, राशन कार्ड में हुई गलती को सुधारा गया और पिता-बेटी को ऑनलाइन जीवित दर्शाकर उनके नाम फिर से जोड़े गए। इस कार्रवाई के बाद अब बेटी को फिर से निःशुल्क दवाएं मिल सकेंगी। परिवार ने दैनिक भास्कर का आभार व्यक्त किया है। यह कहानी दिबियापुर के राणा नगर निवासी राजीव कुमार प्रजापति की है। राजीव की तीन बेटियां है। साल 2004 को राजीव की जिंदगी में एक ऐसा पहाड़ टूटा जिसका दर्द वह आज तक झेल रहे है। हुआ यूं कि दूसरे नंबर की बेटी स्वाती खेलते हुए छत से गिर गई। जिससे वह पैरालिसिस की शिकार हो है। सब कुछ बेचकर इलाज कराया तब कही बेटी हालत कुछ ठीक हुई लेकिन वह पैरालिसिस के कारण एक हाथ काम नहीं करता और एक पैर में दिक्कत है। अचानक दौरे आने से वह गिर जाती है। इसके बाद राजीव अपनी बेटी को लेकर दिल्ली के एम्स में गए और गरीबी का हवाला दिया। जिससे उन्हें पात्र गृहस्थी के राशन कार्ड से उन्हें निःशुल्क दवाएं मिलने लगी जिनकी बाजार में कीमत 40से 50 हजार रुपए तक है। राजीव को राहत मिली और घर के बजट से रुपए निकाल बेटी को पढ़ाया। राजीव को जिंदगी ने जो दर्द दिया वह धीरे धीरे ठीक हो रहा था लेकिन सिस्टम ने फिर ऐसी मार दी कि राजीव का परिवार फिर से संकट में आ गया। मार्च 2025 में खाद्य एवं रसद विभाग ने राशन कार्ड में राजीव और उनकी दो बेटियों का नाम काटकर उन्हें मृत दिखा दिया। अब बेटी के मृत दिखने पर एम्स से निःशुल्क दवाएं मिलना बंद हो गईं। अब राजीव खुद व बेटी को जिंदा दिखाने को विभाग के चक्कर काट रहा है लेकिन खुद को जीवित नहीं दिखा पा रहा है। बेटी की तड़प माता पिता देख नहीं पाते। साल भर से हर महीने दवा के लिए 40 से 50 हजार की दवा खरीद खरीद कर अब नौबत मकान बिकने की आ गई है। मां सुमन देवी बताती हैं कि बेटी को तड़पता देख रोने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। पिता राजीव बताते है कि वह साल भर से चक्कर काट रहे लेकिन खुद की जीवित नहीं दिखा पा रहे है। दैनिक भास्कर में खबर के बाद नाम सही होने पर अब पूरे परिवार में खुशी की लहर है। बेटी का इलाज फिर से शुरू हो सकेगा। परिवार ने दैनिक भास्कर को धन्यवाद दिया है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    UPTET 18 महीने के D.El.Ed. ODL धारक भी देंगे परीक्षा:इलाहाबाद HC का आदेश 10 अगस्त 2017 से पहले सेवा में रहे अभ्यर्थी पात्र
    Next Article
    कल्याणपुर में बाइक टक्कर से साइकिल सवार गंभीर:दुकान बंद कर लौट रहे बुजुर्ग घायल, पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment