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    निंदा प्रस्ताव पास होने पर संयुक्त पार्षद दल का विरोध:मेरठ में बोले- नगर निगम की बैठक तक में दबाई जाती है महिलाओं की आवाज

    2 hours ago

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    महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) से जुड़े संशोधन विधेयक को लेकर मेरठ नगर निगम में सियासत तेज हो गई। मंगलावार को जहां एक और एक विशेष बोर्ड बैठक बुलाकर भाजपा द्वारा निंदा प्रस्ताव पास कराया गया तो वहीं संयुक्त पार्षद दल ने कड़ा विरोध करते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया। पार्षदों ने इसे राजनीतिक एजेंडा करार देते हुए नगर हित के मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। संयुक्त पार्षद दल के की और से पूर्व उपाध्यक्ष कार्यकारिणी और महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा ने कहा कि जब सितंबर 2023 में महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल चुकी है, तो अब तक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया गया। पार्षदों ने सवाल उठाया कि यदि कानून बन चुका है, तो उसके क्रियान्वयन में देरी किस स्तर पर हो रही है। चुनावी फायदे के लिए मुद्दे को भुनाया जा रहा विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण के मुद्दे को चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि 30 महीनों तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया और अब चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए इसे अचानक मुद्दा बनाया जा रहा है। संयुक्त दल ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना कराने की मांग उठाई। उनका कहना है कि “जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” के आधार पर SC, ST और OBC वर्गों के आरक्षण में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए। महिला उत्थान के दावे खोखले विपक्षी पार्षदों ने आरोप लगाया कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाले ही सदन में महिला पार्षदों को बोलने का अवसर नहीं देते और उनके प्रस्तावों को कार्यवाही में शामिल नहीं किया जाता। संयुक्त पार्षद दल ने मांग की है कि शहर की ज्वलंत समस्याओं पर चर्चा के लिए तुरंत सदन की विशेष बैठक बुलाई जाए। साथ ही उन्होंने निंदा प्रस्ताव को तथ्यहीन बताते हुए इसे संघीय ढांचे को प्रभावित करने और चुनावी प्रणाली में बदलाव की साजिश करार दिया। 2024 चुनाव में आरक्षण लागू न होने पर सवाल पार्षदों ने यह भी प्रश्न उठाया कि 2023 में विधेयक पारित होने के बावजूद 2024 के लोकसभा चुनाव और नगर निकाय स्तर पर महिलाओं को आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिला। इसे महिलाओं के साथ अन्याय बताया गया। संयुक्त पार्षद दल ने कहा कि नगर निगम में जनहित के असली मुद्दों जैसे गृहकर, जलकर, टूटी सड़कें, सफाई व्यवस्था और धूल प्रदूषण पर चर्चा नहीं की जा रही। आरोप है कि नाम परिवर्तन के मामलों में जनता से भारी शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। गंदा पानी पीने को मजबूर जनता प्रेस विज्ञप्ति में शहर की जल आपूर्ति पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। पार्षदों का कहना है कि कई इलाकों में लोगों को नालों का दूषित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के आरोप जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा गया कि आम नागरिकों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वहीं, नगर निगम में अधिकारियों की अनुपस्थिति से भी लोगों को भारी परेशानी हो रही है।
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