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    मथुरा नाव हादसा- 11 पर्यटकों की मौत के 4 जिम्मेदार:नाविक ने किसी को लाइफ जैकेट नहीं दी; अफसरों के पास मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं

    1 hour ago

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    वृंदावन में पांटून पुल से टकराकर नाव पलट गई। अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, 4 अब भी लापता हैं। 15 मिनट पहले का जो वीडियो मिला, उसमें सभी हंसते-मुस्कुराते दिख रहे हैं लेकिन, कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। जिस घाट पर हादसा हुआ, वहां दुनियाभर से कृष्ण भक्त आते हैं। 25-30 फीट गहरी यमुना में नाव मालिक बिना लाइफ जैकेट पहनाए 37 लोगों को बोटिंग करा रहा था। हादसे के बाद प्रशासन की नींद टूटी। जांच-पड़ताल शुरू हुई। नाव मालिक और पांटून पुल के ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया। लेकिन, सवाल है- ये गैर-इरादतन हत्या है या घोर लापरवाही में की गई हत्या। अगर लाइफ जैकेट पहनाई होती तो शायद एक भी जिंदगी न जाती। क्योंकि, लाइफ जैकेट पहनी होने से एक घंटे तक कोई डूबता नहीं। वृंदावन के इस फेमस केसी घाट पर बिना लाइसेंस के करीब 400 नावें चल रही हैं। यहां मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम है। अफसर कभी चेक तक करने नहीं जाते हैं। यानी, सब भगवान भरोसे चलता है। आखिर इन 11 मौतों का जिम्मेदार कौन? किसने आंखें बंद कर रखी थी, जो ये भयावह हादसा हुआ। दैनिक भास्कर इस रिपोर्ट में उन चेहरों को सामने लेकर आया है…पढ़िए जिम्मेदारी क्या थी: पर्यटकों को नाव में सुरक्षित सफर कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी नाव मालिक पप्पू निषाद की थी। पहली- नाव पर बैठाने के बाद हर यात्री को लाइफ जैकेट पहनाए। दूसरी- नाव को कंट्रोल (आराम से) में चलाएं। तीसरी- तेज हवा, पानी का बहाव या अन्य कोई खतरा दिखने पर नाव को किनारे पर रोके और पर्यटकों को सुरक्षित उतारे। गलती क्या की: पप्पू निषाद ने किसी भी पर्यटक को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई। नाव पर 37 लोगों को बैठा लिया। नाव किनारे से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी की बीच धारा में थी। हवा 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। तेज हवा के कारण जब नाव डगमगाने लगी, तो पप्पू निषाद को नाव रोक देनी चाहिए थी। पर्यटकों के पप्पू को रोका और टोका भी, लेकिन वह नहीं माना। यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत पांटून पुल को हटाया जा रहा है। पप्पू निषाद को नाव को उधर नहीं ले जानी थी। पांटून पुल के पास यमुना में पानी कम था, नाव की मोटर वहां रुक गई। यहां पर ही उसे नाव को रोक देना था। पर्यटक पप्पू निषाद से कहते रहे कि रुक जाओ, लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं था। पुल के पास जैसे ही पप्पू ने स्पीड बढ़ाई, बोट बेकाबू हो गई। तेज गति से अचानक नाव आगे बढ़ी और हवा के झोंके से पांटून पुल से टकरा गई। बोट में सवार लोग एक तरफ हो गए और नाव पलट गई। जिम्मेदारी क्या थी: पांटून पुल को रिवर फ्रंट के काम के लिए खोला जा रहा है। इस दौरान नाव चलने से रोक देनी चाहिए थी। पांटून पुल के पास संकेतक लगाना था। गलती क्या की: ठेकेदार नारायण शर्मा बिना सूचना दिए पुल खोलने का काम कर रहा था। पांटून पुल को रिवर फ्रंट के काम के लिए जेसीबी लगाकर रस्सी से खींचा जा रहा था। इस दौरान नावों का संचालन को रोकने के लिए बोलना चाहिए था। लेकिन, नारायण शर्मा ने ऐसा नहीं किया। जिम्मेदारी क्या थी: नगर निगम ही नावों का लाइसेंस जारी करता है। इसकी पहली शर्त है कि पर्यटकों को लाइफ जैकेट अनिवार्य रूप से देना होगा। नावों में क्षमता से अधिक यात्री नहीं होने चाहिएं। वृंदावन के 15 से ज्यादा घाटों की देख-रेख का जिम्मा भी निगम के पास है। गलती क्या की: मथुरा में स्वामी घाट से लेकर गोकुल घाट तक 400 नाव चल रही हैं। किसी भी नाव मालिक के पास लाइसेंस नहीं है। जिस नाव से हादसा हुआ, उसका भी लाइसेंस नहीं है। नगर निगम ने नावें चलाने को लेकर कोई गाइडलाइन भी नहीं बनाई है। यही वजह है कि नाव में सुरक्षा व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं हैं। मॉनिटरिंग का जिम्मा भी निगम का है, लेकिन वो भी कभी नहीं होता। जिम्मेदारी क्या थी: घाट और नाव की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। एसडीएम इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। पर्यटक दर्शन करके सुरक्षित लौट जाएं, इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। गलती क्या थी: प्रशासन नावों की कभी मॉनिटरिंग नहीं करता। लाइफ जैकेट पर्यटकों को दिया जा रहा या नहीं, इसकी देख-रेख अगर होती, तो शायद 11 लोगों की जान नहीं जाती। नाव चलाने में मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसे भी चेक नहीं किया गया। यूपी में लाइफ जैकेट को लेकर गाइडलाइन हादसा कैसे हुआ, ग्राफिक्स से समझिए… नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा करीब 40kmph स्पीड से चल रही थी। तेज हवा से नाव अचानक डगमगाने लगी। नाविक कंट्रोल खो बैठा। पर्यटकों ने नाविक से कहा, पुल आने वाला है, रोक लीजिए। लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार नाव टकराने से बची। तीसरी बार में टक्कर हो गई और नाव डूब गई। हादसे में मरने वाले 7 रिश्तेदार थे हादसे में एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत हुई है। मृतकों में मधुर बहल, उसकी माता कविता बहल, चाचा चरणजीत, चरणजीत की पत्नी पिंकी बहल, मधुर की बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें……… वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत:इनमें 7 एक ही परिवार के; लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी; सभी पंजाब के रहने वाले मथुरा के वृंदावन में 37 श्रद्धालुओं से भरी प्राइवेट नाव (स्टीमर) यमुना नदी में पलट गई। हादसे में 10 की डूबने से मौत हो गई। इनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल थे। युवती समेत 5 लोग अभी भी लापता हैं। नाव में सवार सभी श्रद्धालु पंजाब से घूमने आए थे। पढ़ें पूरी खबर…
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