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    मथुरा में हादसे के बाद नहीं चल रही नावें-स्टीमर:नगर निगम की गाइडलाइन से नाविक नाराज, बोले- सिर्फ रजिस्ट्रेशन का 5000 रुपए मांग रहे

    14 hours ago

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    वृंदावन में 10 अप्रैल को केशीघाट पर एक बड़ा हादसा हुआ। यहां 38 पर्यटकों से भरा स्टीमर पांटून पुल से टकराने पर हादसे का शिकार हो गया। स्टीमर के यमुना में डूबने से 16 पर्यटकों की मौत हो गई। इस हादसे की सबसे बड़ी बजह निकल कर आई कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी। हादसे के 12 दिन बाद क्या स्थिति बदली,क्या सुरक्षा मानकों का प्रयोग किया जा रहा है,क्या पर्यटक और नाविक लाइफ़ जैकेट का प्रयोग कर रहे हैं यह हकीकत जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम उसी केशीघाट पर पहुंची कहां हादसा हुआ था। लाइन से खड़ी नाव,घाट पर पसरा सन्नाटा केशीघाट पर हादसे के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। पहले जहां यह घाट पर्यटकों से भरा रहता था वहां अब कुछ ही पर्यटक नजर आ रहे हैं। इनमें कुछ घाट पर घूम रहे हैं तो इक्का दुक्का यमुना में खड़ी नाव में बैठे हैं। इस घाट पर यमुना में दिन भर दौड़ने वाले मोटर वोट भी अब शांत खड़े हैं। इनमें बैठकर पर्यटक अब यमुना बिहार नहीं कर रहे। यमुना में जहां तक नजर गई वहां तक वोट खड़ी हुई नजर आईं। नहीं हो रहा था संचालन यमुना में नावों का संचालन क्यों नहीं हो रहा था इसके बारे में जानकारी करने की कोशिश की तो वहां कुछ नाविक खड़े नजर आए। नाविकों से पूछा नावें क्यों नहीं चल रही इस पर उन्होंने कहा हादसे के समय मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए स्वत ही नहीं चलाई थी लेकिन अब नगर निगम के नए नियमों की बजह से नहीं चल रही। लाइसेंस शुल्क में की बेतहाशा वृद्धि केशीघाट पर मिले नाविक घनश्याम ने बताया कि उनके,पिता के बाबा के लाइसेंस बनते रहे। जिसकी नगर पालिका फीस 10 रूपये 6 महीने के लेता था। 2018-19 में नगर निगम ने बनाए तब एक वर्ष की फीस 25 रुपए थी। लेकिन अब एक साथ 6 महीने के 5 हजार रुपए मांगे जा रहे हैं। यह कहां तक उचित है। घनश्याम ने बताया कि 2018-19 के बाद किसी तरह के लाइसेंस नहीं बनाए गए। निगम कहता था कि उनके बायलॉज में नहीं है। गाइड लाइन से नहीं है सहमत नाविकों ने बताया नगर निगम ने जो गाइड लाइन जारी की है उसको बनाने से पहले एक बार नाविकों से भी चर्चा करनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गाइड लाइन में कहा है कि वही नाविक नाव चलाएगा जिसके नाम लाइसेंस है। इस पर घनश्याम कहते हैं कि अगर वह कहीं किसी काम से बाहर चला जाए और उसके परिवार का सदस्य नाव चलाना जानता है तो क्या वह नाव नहीं चलाएगा। दूसरा क्षमता को लेकर वह कह रहे हैं 10 सवारी बिठाएंगे। हमारी नावों की क्षमता 20 से 25 है कम से कम 15 सवारी तो बैठने दीजिए। कुछ लोगों को मिली लाइफ़ जैकेट हादसे के समय सबसे बड़ा मुद्दा उठा था लाइफ़ जैकेट का। इस पर जब हमने नाविकों से पूछा कि क्या आप लोगों को लाइफ़ जैकेट मिली है इस पर उन्होंने कहा कुछ लोगों को मिली है सभी को नहीं दी गई। प्रशासन ने मथुरा वृंदावन और गोकुल में करीब एक हफ्ते पहले 425 लाइफ़ जैकेट वितरित कराई थी। हालांकि नावों का संचालन न होने से अभी वितरण रुका हुआ है। नहीं लगे लाल निशान नावों के संचालन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नाविकों के फॉर्म भरवाए जा रहे हैं ऐसे में सुरक्षा मानकों को पूरा अभी तक नहीं किया गया है। अधिकांश वोट पर क्षमता तय करने के लिए लगने वाले लाल निशान नहीं लगाए गए,डबल डेकर वोट भी खड़ी दिखाई दीं। जबकि नगर निगम के अधिकारियों का कहना है डबल डेकर वोट नहीं संचालित करने दी जायेंगी। यमुना में लगाए बोर्ड,एक जगह लगी नजर आई बेरीकेडिंग नाविकों से बात करने के बाद केशीघाट से पांटून पुल की तरफ बढ़े तो इक्का दुक्का जगह बोर्ड लगे नजर आए। जिस पर लिखा था आगे गहरा पानी है कृपया यमुना नदी में अधिक अंदर न जाएं। इसके साथ एक जगह करीब 25 से 30 मीटर में यमुना में बल्लियों से की गई बेरीकेडिंग भी नजर आई। जहां कुछ श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। यहां से आगे एक खंभे पर और बोर्ड लगा था जिस पर नाविकों के लिए जारी की गई गाइड लाइन लिखी थी। जिसमें 17 पॉइंट लिखे गए थे। नगर निगम भर रहा फॉर्म यमुना के घाटों पर रियल्टी टेस्ट करने के दौरान हमारी टीम को निगम के एक कर्मचारी नजर आए। उनके आसपास कई नाविक खड़े थे। वहां जाकर देखा तो पता चला कि नाविकों के किए रजिस्ट्रेशन के फॉर्म वितरित किए जा रहे थे। 3 पेज के इस फॉर्म पर सबसे ऊपर लिखा था नगर निगम मथुरा वृंदावन,उसके नीचे लाइन में लिखा था नाव पंजीकरण हेतु आवेदन पत्र। यह फॉर्म नाविक को खुद भरना था। कर्मचारी ने बताया वह फॉर्म वितरित कर रहे हैं यह जमा शुल्क के साथ किए जाएंगे। मिला जुला दिखा बदलाव हादसे के बाद जिस तरह दावे किए गए थे वह 12 दिन बाद मिले जुले नजर आए। नगर निगम ने बोर्ड लगाए हैं,कुछ जगह बेरीकेडिंग की है। लेकिन घाट पर कहीं कैमरे नजर नहीं आए। जो लगे थे वह घाट पर बने मंदिरों की देखभाल करने वालों ने निजी लगवा रखे थे। इसके अलावा कोई निगम कर्मी रोक टोक के लिए भी नजर नहीं आया। यानि रियल्टी टेस्ट में कहीं कुछ काम नजर आए तो कहीं वह सब नहीं था जिसके अधिकारी दावा कर रहे थे।
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