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    मेरठ में रिश्वतखोर इंजीनियर को दौड़ाकर पकड़ा:ड्राइवर के जरिए एक लाख लिए थे; दोनों चेहरा छिपाते जेल गए, पत्नी खूब रोई

    10 hours ago

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    मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर (JE) को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा है। मंगलवार को जेई ने विभाग के ड्राइवर के जरिए रिश्वत ली थी। ड्राइवर ने जैसे ही रुपए अपने हाथ में लिए, एंटी करप्शन टीम ने उसे पकड़ लिया। उसे लेकर टीम जेई के कार्यालय पहुंची। ड्राइवर को गिरफ्तार देखकर जेई भागने लगा। एंटी करप्शन टीम ने करीब 100 मीटर दौड़कर उसे पकड़ लिया। दोनों आरोपी अपना चेहरा छिपाते हुए जेल गए। एंटी करप्शन टीम ने यह कार्रवाई जिस ठेकेदार की शिकायत पर की थी, उसका 25 लाख रुपए का भुगतान फंसा हुआ था। पेमेंट करने बदले में एक लाख की रिश्वत मांगी थी। नहीं देने पर 10 महीने से भुगतान रोक रखा था। जबकि भुगतान की रकम विभाग के खाते में आ चुकी थी। 3 तस्वीर देखिए… अब विस्तार से पूरा मामला जानिए… ठेकेदार ने 2023 में कराया था काम बागपत के रहने वाले सत्येंद्र सिंह तोमर उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में ठेकेदार हैं। उनकी चौधरी एसोसिएट नाम की फर्म है। 2020 में सत्येंद्र की फर्म को बागपत स्थित राजा मिहिर भोज डिग्री कॉलेज बेगमाबाद पाबला का ठेका मिला। उस पूरे ठेके की कास्ट 8.50 करोड़ रुपए थी। 2023 में उनके हिस्से का काम पूरा हो गया। काम पूरा होने के बाद सत्येंद्र ने भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी। सत्येंद्र का आरोप है कि बिल देने के बावजूद उनको पेमेंट नहीं किया गया। बताया गया कि बजट खत्म हो गया है, जैसे ही आएगा भुगतान करा देंगे। सत्येंद्र तोमर का कहना है कि जिस बजट का जिक्र विभाग करता था, वह भी आ गया। लेकिन विभाग ने बिल तैयार नहीं किए। बिल निकालकर अलग रख दिए। सात लाख के बिल थे, जिसकी जीएसटी वह जमा कर चुके थे। इससे जीएसटी भी ब्लॉक हो गई। काफी समय बीतने के बाद भी उनके पेमेंट का भुगतान नहीं हुआ। पता चला की विभाग के जेई योगेंद्र कुमार ने पेमेंट रुकवा दिया है। सत्येंद्र तोमर ने जेई से संपर्क किया तो उसने बिल पास कराने की एवज में एक लाख रुपए मांगे। बार-बार कहने के बाद जब जेई ने भुगतान नहीं किया तो ठेकदार ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत कर दी। शिकायत पर एंटी करप्शन टीम ने जाल बिछाया शिकायत को गंभीरता से लेकर एंटी करप्शन टीम ने अपना जाल बिछाया। टीम ने सत्येंद्र को केमिकल लगे एक लाख रुपए दिए। सत्येंद्र तोमर ने जेई योगेंद्र कुमार से संपर्क किया। जेई ने उन्हें मंगलवार सुबह अपने विभाग में बुला लिया गया। सत्येंद्र एंटी करप्शन टीम की ओर से दिए गए 1 लाख रुपए लेकर वहां पहुंचे। कार्यालय परिसर में पहुंचकर फोन किया तो जेई ने इस यूनिट के इंचार्ज प्रत्यूष सिंह के ड्राइवर नीरज को रकम लेने के लिए भेजा। जैसे ही नीरज ने रकम पकड़ी एंटी करप्शन टीम ने दबोच लिया। नीरज को लेकर एंटी करप्शन टीम विभाग में मौजूद योगेंद्र को दबोचने पहुंची तो वह भागने का प्रयास करने लगा, लेकिन कुछ दूरी पर ही दबोच लिया गया। जेई ने बिल निकालकर अलग कर दिया था, एक लाख रुपए की मांग पर अड़ा ठेकेदार सत्येंद्र तोमर ने बताया, करीब 10 माह से विभाग के पास बजट था, लेकिन जेई भुगतान नहीं कर रहे थे। मार्च में दोबारा बिल दिया, लेकिन जेई योगेंद्र कुमार ने अकाउंटेंट की मदद से इस बार भी बिल निकालकर अलग रख दिया। कहा कि मई में भुगतान करेंगे। बड़ी मुश्किल से पेंटर का लगभग 6 लाख का भुगतान विभाग ने किया। सत्येंद्र ने बताया कि विभाग से इनको 25 लाख रुपये का भुगतान होना था। इसमें मूल रकम, सिक्योरिटी, बिल और जीएसटी शामिल है। करीब आठ लाख रुपये के ऐसे बिल लंबित हैं, जो इनके द्वारा तैयार ही नहीं किए गए। उनसे बिल पास करने की एवज में 1.70 लाख रुपये मांगे गए थे। उन्होंने पैसा ना होने का हवाला दिया तो मांग एक लाख रुपए की हो गई। लंबा पेमेंट फंसा था। इसलिए परेशान होकर करीब 10 दिन पहले एंटी करप्शन डिपार्टमेंट में शिकायत की, जिसके बाद मंगलवार को ट्रैप की कार्रवाई की गई। शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई मदद सत्येंद्र ने बताया, भुगतान न होने की शिकायत उस वक्त यहां के अफसर रहे मनेंदर सिंह से की, उन्होंने भुगतान का आश्वासन दिया था। उनके बाद दूसरे प्रोजेक्ट मैनेजर ने भी आश्वासन दिया, लेकिन फिर भी काम नहीं हुआ। वर्तमान में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में प्रत्यूष सिंह यहां तैनात हैं। उनसे शिकायत की तो उन्होंने अकाउंटेंट पर दोष मढ़ दिया। उन्होंने अफसरों से कहा था कि उन्होंने जो काम करवाया है, पहले उस काम को अच्छी तरह जांच करा लें। उसके बाद भुगतान करें। क्योंकि उन्होंने मानकों के अनुरूप काम किया था। कोई उनके काम में कमी भी नहीं निकाल सकता था। लेकिन विभाग बेवजह की खामियां खड़ी करता था, ताकि उनकी गलत मांग को पूरा किया जाए। थाने में बिलखती रही ड्राइवर नीरज की पत्नी पति को पुलिस ने पकड़ लिया है, इसकी जानकारी मिलते ही ड्राइवर नीरज की पत्नी अपने ससुर को लेकर मेडिकल थाने आ गई। उसने पुलिस से मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन मामला एंटी करप्शन डिपार्टमेंट का था, इसलिए सभी ने हाथ खड़े कर दिए। वह विभाग भी गई, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली। वह रोती रही। --------------- ये खबर भी पढ़िए- मरे बेटे से मां बोली- उठ जा...मेरे साथ घर चल:लाश गोद में रखकर रोती रही; आगरा में 45 फीट ऊंचे झूले से गिरकर हुई थी मौत ‘बेटा उठ जा, मैं कुछ नहीं कहूंगी। उठ जा बेटे तुझे तो बहुत गर्मी लगती है। तू जैसे मेरे साथ आया था, वैसे ही घर चल।’ मां रोते हुए बेटे की लाश से यह बात कह रही थी। लाश का सिर गोद में रखे थी। बीच-बीच में कभी उसका सीना दबाती, तो कभी उसे गले लगाती। कभी हथेलियां रगड़ती। पढ़ें पूरी खबर…
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