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    मेरठ में 'जाट' शब्द हटाने पर हंगामा:आयोजक और प्रशासन आमने-सामने, पुलिस बोली- आयोजकों ने खुद फैसला लिया

    5 hours ago

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    मेरठ के सकौती स्थित हितकारी किसान इंटर कॉलेज में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा के अनावरण के बाद ‘जाट’ शब्द हटाने को लेकर विवाद शुरू हो गया। रविवार से शुरू हुआ यह मामला उस समय और बढ़ गया, जब मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर आधिकारिक बयान जारी किया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि प्रतिमा स्थल से जातिसूचक शब्द हटाने की कार्रवाई आयोजकों ने अपनी मर्जी से की है। पुलिस के अनुसार, यह कदम 16 सितंबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। पुलिस का कहना है- इस मामले के वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं। महापुरुष पूरे देश के प्रेरणास्रोत होते हैं, इसलिए उन्हें किसी एक जाति तक सीमित करना सही नहीं है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय जाट संसद ने पुलिस-प्रशासन पर ‘जाट’ शब्द जबरन हटवाने का आरोप लगाया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनू चौधरी ने चेतावनी दी है कि अगर 15 दिनों में ‘जाट’ शब्द दोबारा नहीं लगाया गया, तो देशभर में आंदोलन होगा। ये है पूरा मामला…. रविवार को प्रतिमा अनावरण के दौरान जैसे ही ‘जाट’ शब्द हटाने की जानकारी मिली, जाट समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचे और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने इसे समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया और शब्द दोबारा लिखने की मांग की। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने लोगों को समझाया। काफी बातचीत के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि 15 दिन के अंदर प्रक्रिया पूरी कर ‘जाट’ शब्द फिर से लगाया जाएगा। इसके बाद प्रदर्शन खत्म कर दिया गया। महाराजा सूरजमल की पहचान ‘जाट’ शब्द से जुड़ी है इस मामले में राजनीति भी शुरू हो गई है। पूर्व सांसद हरपाल पंवार ने कहा- कार्यक्रम के दौरान की गई राजनीतिक बातें ठीक नहीं थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जाट’ शब्द हटाने से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। समाज के लोगों का कहना है कि महाराजा सूरजमल की पहचान ‘जाट’ शब्द से जुड़ी है, इसलिए इसे हटाना सही नहीं है। अब सभी की नजर प्रशासन के उस वादे पर है, जिसमें 15 दिन में शब्द दोबारा लगाने की बात कही गई है।
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