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    मरी महिला को बालू में गाड़कर जिंदा करने की कोशिश:1 घंटे हाथ-पैर रगड़ते रहे, पीलीभीत में करंट लगने से जान गई थी

    3 hours ago

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    पीलीभीत से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां मंगलवार सुबह एक महिला की करंट लगने से मौत हो गई। महिला सुबह-सुबह सहेलियों के साथ खेत गई थी। पूर्व प्रधान के खेत के चारों तरफ बंधे तार में दौड़ रहे करंट की चपेट में आ गई। परिजनों को पता चला तो महिला को जिंदा करने के लिए उसे बालू में गाड़ दिया। हाथ, पैर के तलवे और सिर को छोड़कर पूरे शरीर को बालू में दबा दिया। करीब एक घंटे तक उसके हाथ-पैर रगड़ते रहे। सिर पर बालू रगड़ते रहे। आसपास मौजूद लोग और पुलिस वाले उन्हें समझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्होंने एक न सुनी। बाद में जब महिला ने कोई हरकत नहीं की तब जाकर उन्होंने शव पुलिस के हवाले किया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। परिजनों ने पूर्व प्रधान के खिलाफ तहरीर देने की बात कही है। घटना खजुरिया नवीराम गांव की है। पहले देंखे 3 तस्वीरें… अब विस्तार से जानें पूरा मामला घटना खजुरिया नवीराम गांव की है। जहां बेचेलाल की पत्नी अनीता देवी (45) मंगलवार सुबह गांव के पूर्व प्रधान शिव प्रसाद के मक्का के खेत के पास शौच के लिए गई थीं। आरोप है कि पूर्व प्रधान ने अपनी मक्का की फसल को आवारा पशुओं से बचाने के लिए खेत की बाड़बंदी कर उसमें बिजली का करंट छोड़ रखा था। अनीता जैसे ही तारों की चपेट में आईं, उनकी मौके पर ही मौत हो गई। महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में पुलिस और परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। परिजन चमत्कार की उम्मीद में शव को बालू (रेत) में दबाने की जिद करने लगे। पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का हवाला दिया, लेकिन परिजनों ने नहीं सुनी इसके बाद महिला के शरीर को बालू में दबा दिया। करीब एक घंटे बाद डॉक्टरों द्वारा महिला की मौत की पुष्टि कर दी गई। काफी देर बहस के बाद पुलिस ने परिजनों को समझाकर शव को कब्जे में लिया। खेत स्वामी और पूर्व प्रधान शिव प्रसाद का कहना है कि उन्होंने केवल 'डीसी' (कम पावर) करंट लगाया था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आगे की कार्रवाई की जा रही है। महिला के तीन बच्चे हैं। बेटा शिवम (9) दूसरा बेटा भारत (8) बेटी स्वानी (4) साल की है। तीनों बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं। करंट लगने व्यक्ति को मारना-पीटना या मिट्टी में दबाना मिथ है लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल के ईएमओ डॉक्टर सर्वेश सिंह ने बताया ये सब मिथ हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग करंट लगने पर पीड़ित को मारना-पीटना शुरू कर देते हैं। या कई मामलों में उन्हें मिट्टी में दबाकर रखते हैं। इससे अस्पताल ले जाने में और देरी हो जाती है। ऐसे में यदि जान बचने की उम्मीद हो तो भी नहीं बचा पाते। कई बार लोग करंट लगने के बाद मारे-पीटे जाने से सदमे चले जाते हैं और उससे भी उनकी मौत हो जाती है। इसलिए जब भी किसी को करंट लगने का घटना हो तो बिना देरी के डॉक्टर के पास ले जाएं। थानाध्यक्ष सिद्धांत शर्मा ने बताया शव को पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों की पुष्टि होगी। परिजनों की तहरीर और रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष विधिक कार्रवाई की जाएगी।
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