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    मलिहाबाद में मल्हिया पासी स्मृति गेट दोबारा लगा:7 दिन से धरने पर बैठे थे विधायक और पूर्व सांसद, आंदोलन की दी थी धमकी

    6 hours ago

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    लखनऊ के मलिहाबाद में एक हफ्ते से चल रहे ‘महाराजा मल्हिया पासी स्मृति द्वार’ विवाद के बीच गेट लगा दिया गया। गुरुवार सुबह प्रशासन ने गेट को दोबारा उसी जगह पर लगवा दिया। 22-23 अप्रैल की रात इसे प्रशासन ने रातों-रात हटाया दिया था। इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी के नेता धरने पर बैठे हुए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और विधायक जय देवी के नेतृत्व में सैकड़ों लोग 7 दिनों से ‘प्रवास अनशन’ पर बैठे थे। अब गेट लगने के बाद प्रवास धरना खत्म हो गया है। लेकिन, इलाके में पुलिस-प्रशासन अलर्ट है। रात में हटाया, सुबह लगवाया मामला तब शुरू हुआ जब 21-22 अप्रैल की रात मलिहाबाद में लगा ‘मल्ली पासी गेट’ अचानक काटकर हटा दिया गया। सुबह लोगों ने देखा तो गेट गायब था, जिसके बाद नाराजगी फैल गई। स्थानीय नेताओं ने इसे पासी समाज के सम्मान से जोड़ दिया और सीधे प्रशासन को घेर लिया। मलिहाबाद से बीजेपी विधायक जयदेवी ने साफ कहा कि जब बाकी 11 गेट लगे हुए हैं तो सिर्फ इसी गेट को क्यों हटाया गया? 7 दिन तक प्रवास धरने पर बैठे रहे नेता और समर्थक रात में गेट हटने के बाद मामला इतना बढ़ा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर, उनकी पत्नी विधायक जयदेवी और समर्थक मौके पर ही ‘प्रवास अनशन’ पर बैठ गए। दिन-रात धरना चला और प्रशासन पर लगातार दबाव बनाया गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना था कि बिना वजह गेट हटाया गया। जब तक इसे दोबारा नहीं लगाया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान कई अन्य भाजपा नेता भी खुलकर समर्थन में आ गए। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के कारण लिया गया टाइम सूत्रों के मुताबिक, पुलिस-प्रशासन ने नेताओं से बातचीत में 29 अप्रैल तक का समय मांगा। वजह बताई गई कि उसी दिन प्रधानमंत्री का हरदोई के मल्लावां में गंगा एक्सप्रेसवे उद्धघाटन कार्यक्रम था। अधिकारियों को डर था कि अगर इस बीच गेट लगाया गया तो दूसरा जाति वर्ग विरोध कर सकता है और मामला बिगड़ सकता है। इसलिए कार्यक्रम खत्म होने के बाद गेट लगाने का भरोसा दिया गया। सुबह-सुबह पहुंची टीम, 7:30 बजे खड़ा कर दिया गेट 30 अप्रैल की सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस फोर्स के बीच गेट को फिर से लगा दिया। पूरा काम शांतिपूर्वक हुआ और किसी तरह का विरोध नहीं हुआ। गेट लगते ही धरने पर बैठे नेताओं ने आंदोलन खत्म कर दिया और इसे अपनी जीत बताया। स्मृति द्वार का गेट लगने के बाद पासी समाज के लोगों ने मिठाई भी बांटी। गेट दोबारा लग गया, लेकिन बड़ा सवाल अभी भी बना हुआ है कि आखिर इसे हटाया क्यों गया था? पुलिस ने इस मामले में दो FIR दर्ज की थीं और जांच भी शुरू की गई थी। गेट किसके आदेश पर हटा और किस वजह से इस पर अब भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है।
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