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    मलिहाबाद में आम के पेड़ों पर 40% ही बौर:ठंड ने लेट की फसल, किसान दवा छिड़क रहे; बोले- इस बार महंगा बिकेगा

    2 hours ago

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    यूपी के मैंगोलैंड लखनऊ के मलिहाबाद में आम पेड़ों पर बौर आ चुके हैं। लेकिन किसान डरे हुए हैं, क्योंकि सिर्फ 40-50% पेड़ों ही बौर दिख रहे हैं। आम के पेड़ों पर बौर बढ़ाने के लिए दवा का छिड़काव किया जा रहा है। पिछले साल 15 मार्च तक बागों के 80% पेड़ बौर से लद गए थे। इसलिए पिछले साल आम की पैदावार अच्छी हुई थी। मलिहाबाद के मैंगो मैन हाजी कलीम उल्ला खां कहते हैं- आम के पेड़ पर बौर कितना आएगा, ये बारिश, तापमान और नमी तय करती है। लेकिन, यहां का कुदरती माहौल कुछ ऐसा है कि 1 से 2 साल में पेड़ों पर खुद-ब-खुद बौर कम आते हैं। वहीं, इस बार आम का साइज थोड़ा छोटा रहने वाला है। लोगों को 1Kg वाला दशहरी आम नहीं शायद दिखेगा। दैनिक भास्कर की टीम मलिहाबाद में आमों की पैदावार के बारे में समझने के लिए पहुंची। यहां 100 से ज्यादा बगीचों में 700 से ज्यादा किस्मों के आम के पेड़ हैं। मार्केट में आम कब तक आएंगे? इस साल क्या उम्मीद है? किसानों के सामने क्या चुनौतियां हैं? कौन-कौन सी क्वालिटी के आम मार्केट में आने वाले हैं? इन सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़िए पूरी रिपोर्ट… आम थोड़े बड़े हो जाने चाहिए थे, अभी छोटे हरे दाने दिख रहे मलिहाबाद में हमारी मुलाकात मैंगो मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर हाजी कलीम उल्ला खां से हुई। वह पद्मश्री से सम्मानित हैं। उनकी नर्सरी का नाम अब्दुल्लाह है। कई एकड़ जमीन पर वह बचपन से आम की बागवानी कर रहे हैं। कलीम उल्ला बाग के पेड़ों की तरफ देखते हुए कहते हैं- इस बार सर्दी अच्छी पड़ी थी, इसलिए आम की फसल लेट हो गई है। अच्छे आम के लिए 30 से 35°C तापमान होना चाहिए। लेकिन, इस बार मौसम का उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तापमान ठीक नहीं है। होली के दिनों तक आम थोड़े बड़े हो जाने चाहिए थे, लेकिन इस बार सिर्फ बौर ही आए हैं। कलीम आगे कहते हैं- आम पकेगा तो अपने वक्त पर ही। लेकिन, ऐसा लगता है कि इस बार साइज थोड़ा छोटा रह जाएगा। मार्च के महीने में जो बौर आए हैं, उनमें अभी सिर्फ छोटे हरे दाने ही हैं। यही आगे बैरी बनेगी और फिर आम…। कितना आम हो सकेगा? यह भी अभी नहीं बता सकते हैं, क्योंकि बौर के बैरी बनने में ही वक्त लग रहा है। गर्म हवा पेड़ों को चाहिए, नहीं तो स्वाद फीका रहता है कलीम कहते हैं- अब जरूरी है कि जो आम के बाग लगाए जाएं, वो 10-15 फीट ऊपर लगाए जाएं। ये जो बाग बड़े हो गए हैं, इनको कुदरती चीजें मिल नहीं पाती हैं। सबसे अहम गर्म हवा इनको नहीं मिलती। ऊपर से ओस गिरती है, लेकिन वो जमीन तक पहुंच नहीं पाती। इसलिए आम के रसीलेपन और स्वाद में फर्क आ जाता है। आप समझिए, ओस जमीन के लिए गिरती है, लेकिन पेड़ों पर ही रह जाती है, इसका फर्क पड़ता है। इसके बाद हमने कलीम के बेटे अजीम खां से बात की। हमने पूछा- इस बार मौसम में बदलाव हुआ है। तेज हवाएं अभी भी चल रही हैं। ओस और धुंध भी रही है। इन सबका आम की पैदावार पर क्या असर पड़ेगा? इस पर अजीम कहते हैं- पिछले साल की फसल में 80-85% फूल आए थे। इस साल 60% फूल हैं, लेकिन यह भी तब हैं, जब एक दवा कंटा का इस्तेमाल किसानों ने किया है। जब फसल नहीं आती, तब किसान ये दवा इस्तेमाल करते हैं। इससे बौर दोबारा आ जाते हैं, लेकिन दवा से पेड़ों को नुकसान भी होता है। बाग के मालिक दवा का इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन जो 2 या 3 साल के लिए फसल ठेके पर लेते हैं, वो दवा का छिड़काव करते हैं। सीधे तौर पर मलिहाबाद में इस बार 40-50% ही फसल होगी। इससे आम मार्केट में थोड़ा महंगा बिकने वाला है। सबसे बड़ी चुनौती आंधी-पानी से बचे आम को बचाना अजीम कहते हैं- बारिश नहीं हुई, यही सबसे अच्छी बात है। जो थोड़ी बहुत हुई, वो बौर को मजबूत करने के लिए काफी थी। क्योंकि, किसान 2 से 3 बार पेड़ों की धुलाई करते हैं। इस बार एक हल्की बारिश हो चुकी है। इससे बौर को कोई नुकसान नहीं हुआ है। अब हमारे सामने चैलेंज ये है कि आने वाले महीने में अगर आंधी-बारिश आती है, तो बौर को नुकसान होने से कैसे बचाएंगे? काकोरी और माल इलाके में भी यही स्थिति न सिर्फ मलिहाबाद, इसके पास काकोरी और माल इलाके में भी आम बागवानों की यही स्थिति है। वे लोग भी बौर कम आने परेशान हैं। दूसरा, वो लोग आंधी-पानी को लेकर भी आशंकित हैं। इन इलाकों के बागवान अपनी फसल को लखनऊ की बाजार में बेचते रहे हैं। कई ऐसे भी हैं, जिनके आम पहले से ही कंपनियां खरीद कर विदेश तक भेजती हैं। हालांकि, बड़ी संख्या उन लोगों की है, जो दुबग्गा मंडी में आम बेचते हैं। इस बार आम का रेट क्या रहेगा… मलिहाबाद वाले आम मार्केट में 20 मई के बाद आना शुरू होंगे। कलीम खां कहते हैं- किसान बाकायदा बोली लगाते हैं। अंदाजा लगाते हैं कि हमारे बाग में कितने टन आम है, उसी अंदाज से खरीद-फरोख्त होती है। व्यापारी सूरज प्रसाद यादव कहते हैं- पैदावार कम होगी, तो आम के रेट पर असर भी दिखेगा। इस बार आम महंगा हो सकता है। जैसे पिछले साल दशहरी आम का रेट शुरू में मंडी में किसान को 40 रुपए प्रति किलो मिला था। दो हफ्ते बाद रेट 20 या इससे कम हो गए थे। इस बार पैदावार कम होने की वजह से इसमें 10 रुपए ज्यादा थोक मंडी में रेट रह सकता है। इस बार आम की पैदावार पर और क्या असर होगा, ये और बेहतर तरीके से समझने के लिए हमने यूपी में उद्यान विभाग के डिप्टी डायरेक्टर कृष्ण मोहन चौधरी से बात की, वो मलिहाबाद क्षेत्र ही देखते हैं… सवाल- इस बार आम की पैदावार के लिए मौसम कैसा है? कृष्ण मोहन- अभी तो आम की फसल के लिए मौसम अच्छा है। अगर आगे बारिश होती तो आम की फसल को नुकसान होगा। बारिश होने से जो बौर होते हैं, वो काले हो जाते हैं। बारिश के कारण नमी भी आ जाती है। इससे आम पर पाउडर आ जाता है, जिसे दहिया रोग कहा जाता है। लेकिन अभी यहां बारिश नहीं हुई, तो अभी तो कोई कीट का असर भी नहीं है। सवाल- इस बार बौर पिछली बार की तुलना में कम है, क्यों? कृष्ण मोहन- तापमान में उतार-चढ़ाव होने से बौर भी आगे-पीछे निकलते हैं। इस कारण एक साल बौर ज्यादा तो एक साल कम आती है। हर बार ऐसा ही होता है। अब जानिए मलिहाबाद के आम के बारे में ----------------------------- यह खबर भी पढ़ें - 'फर्जी IAS एक नहीं, 25 शादियां कर चुका':पैरलाइज पिता बोले- बेटी की जिंदगी बर्बाद करने वाले को सजा दिलाकर मानूंगा ‘एक नहीं, 25 शादियां कर चुका है। फर्जी आईएएस बनकर पैसे ऐंठ लिए और बेटी की जिंदगी भी बर्बाद कर दी। हम लोगों को कहीं का नहीं छोड़ा। हर दिन उसकी नई कहानी सामने आ रही है।’ ये कहना है गोरखपुर के रहने वाले फर्जी IAS के ससुर का। उनका आधा शरीर काम नहीं करता है। वह बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं। पैरालाइज्ड हुए कुछ ही साल बीते थे, तभी एक और मुसीबत सिर पर आ गिरी। पूरा परिवार टूट सा गया। पढ़िए पूरी खबर…
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