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    महराजगंज में पत्नी हत्याकांड में पति बरी:8 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं मिला

    2 hours ago

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    महराजगंज में पत्नी हत्याकांड के एक चर्चित मामले में जिला सत्र न्यायालय ने करीब आठ साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपी पति दीपक पांडेय उर्फ राम अयोध्या को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके कारण आरोपी को सजा नहीं दी जा सकती। यह मामला घुघली थाना क्षेत्र का है। 20 सितंबर 2018 की रात नहर पुल के पास पूजा उर्फ रुक्मिणी नामक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के तुरंत बाद इसे बाहरी हमले का मामला बताया गया और एफआईआर में अन्य लोगों के नाम दर्ज कराए गए थे। हालांकि, बाद में जांच के दौरान कहानी बदल गई और पति को आरोपी बना दिया गया। अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद कई महत्वपूर्ण खामियों की ओर इशारा किया। एफआईआर और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास पाए गए। मुख्य वादी (पिता) ने अपने बयान में बदलाव स्वीकार किया, और कई गवाहों ने बताया कि उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए थे। कथित हथियार (लोहे की रॉड) की बरामदगी को भी अदालत ने संदिग्ध माना। इसके अतिरिक्त, हत्या के पीछे कोई स्पष्ट मकसद (मोटिव) भी साबित नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में अभियोजन की कहानी विश्वसनीय नहीं रह जाती और आरोपी के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं बनता। अदालत ने अभियोजन के मामले को कमजोर माना पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ था कि महिला की मौत सिर में गंभीर चोट लगने से हुई थी। हालांकि, अदालत ने यह माना कि यह साबित नहीं किया जा सका कि ये चोटें आरोपी ने ही पहुंचाई थीं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि प्रारंभिक रिपोर्ट और बाद के बयानों में बड़ा अंतर था। एक महत्वपूर्ण गवाह को कोर्ट में पेश ही नहीं किया गया, और आरोपी का बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज नहीं कराया गया था। साक्ष्यों की श्रृंखला (चेन ऑफ एविडेंस) भी पूरी तरह स्थापित नहीं हो सकी। इन सभी कारणों से अदालत ने अभियोजन के मामले को कमजोर माना। इस मामले में आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरिंद्र नाथ मिश्रा और उनके सहयोगी आर्या पाठक ने संयुक्त रूप से पैरवी की। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष गवाहों के विरोधाभास, साक्ष्यों की कमजोरी और जांच की खामियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे अदालत ने गंभीरता से स्वीकार किया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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