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    'LU में फीस इजाफे की बात सही नहीं':बच्चों के प्रदर्शन पर कुलपति बोले- जल्द लागू होगा 'इवैल्यूएशन सिस्टम'

    2 hours ago

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    ‘लखनऊ विश्वविद्यालय में नए सत्र में 2800 से ज्यादा सीटें बढ़ाई जा रही हैं। कई नए कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं, जो करियर बिल्डिंग में स्टूडेंट्स के लिए फायदेमंद साबित होंगे।’ ये कहना है लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी का। LU कैंपस में अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि फीस वृद्धि की बात सही नहीं है। इसको लेकर कंफ्यूजन है, जिसे क्लियर करना जरूरी है। उन्होंने स्टूडेंट्स के लिए जल्द नए मार्किंग सिस्टम लॉन्च करने की बात भी कही। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: आपने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस LU कैंपस में की है, क्या मकसद है? जवाब: प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि इसको लेकर कई दिनों से सोच रहा था। अब जब नए सत्र की शुरुआत हो रही है और एडमिशन प्रक्रिया चल रही है, तो किसी भी तरह का कन्फ्यूजन न रहे, यह जरूरी है। नए कोर्स शुरू हो रहे हैं और उनकी सटीक जानकारी सभी तक पहुंचे, इसी मकसद से यह प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है। सवाल: नए सत्र से कितनी सीट बढ़ रही है और कौन से नए कोर्स शुरू हो रहे हैं? जवाब: नए सत्र में 2800 से ज्यादा सीटें बढ़ रही हैं। इनमें यूजी और पीजी के कोर्स शामिल हैं। इनमें नए कोर्स के साथ पुराने कोर्स की सीट को री-स्ट्रक्चर भी किया गया हैं। कई नए कोर्स को सेल्फ फाइनेंसिंग मोड में शुरू किया गया हैं। रेगुलर मोड की सीट में भी 15% का इजाफा किया गया हैं। रेगुलर मोड में 15% सीट बढ़ने से जो खर्चे बढ़े हैं, उनको मीट आउट करने के लिए हमने नए कोर्स को सेल्फ फाइनेंसिंग मोड में लॉन्च किया हैं। नए कोर्सेज में AI और मशीन लर्निंग शामिल हैं। सवाल: शुल्क वृद्धि या फीस बढ़ाने को लेकर क्या कहेंगे? जवाब: शुल्क वृद्धि जैसा कोई शब्द नहीं है सिर्फ सीटों को रिस्ट्रक्चर किया गया है। इसके लिए नया इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएट करना होगा। नए कोर्सेज जो लॉन्च किए गए हैं। उनकी जो लैब की रिक्वायरमेंट है लाइब्रेरी की रिक्वायरमेंट है, उसी के अनुसार फीस को डिजाइन किया गया हैं। डेढ़ महीने तक कमेटी ने वर्कआउट कर फीस को डिजाइन किया है। सवाल: आप इवैल्यूएशन में कुछ नया करने जा रहे हैं, क्या खूबी हैं? जवाब: देश के कई बड़े शिक्षण संस्थान और फॉरेन यूनिवर्सिटीज में रिलेटिव मार्किंग सिस्टम लागू हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में फिलहाल ट्रेडिशनल मार्किंग सिस्टम लागू है, जो एक एब्सलूट मार्किंग सिस्टम है। इसे ऐसे समझा जा सकता हैं कि जैसे किसी सब्जेक्ट में हाईएस्ट मार्क 60 है तो अभी के मार्किंग सिस्टम के अनुसार उसे C ग्रेड दिया जाएगा। जबकि रिलेटिव मार्किंग में उसे A ग्रेड दिया जाना चाहिए। संभव हैं पेपर का लेवल बहुत हार्ड रहा है, इसी के चलते स्कोर कम आया हो। मौजूदा समय ग्रेडिंग के बैंड आटोमेटिक या डायनामिक न होकर फिक्स है। इस बदलाव से स्टूडेंट्स को ही फायदा मिलेगा, इसी मकसद से इसे लागू किया जाना हैं।
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