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    लेदर हब के लिए ‘मील का पत्थर’ बना भारत-न्यूजीलैंड समझौता:कानपुर के कारोबारी अब कच्चा चमड़ा आयात कर दुनिया में छाएंगे

    3 hours ago

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    कानपुर के निर्यातकों के लिए एक राहत भरी और उत्साहजनक खबर आई है। लंबे समय से चल रही अटकलों के बीच भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मुहर लग गई है। यह करार न केवल कानपुर के निर्यात कारोबार को नई दिशा देगा, बल्कि शहर के एक्सपोर्टर्स के लिए सालाना 500 करोड़ रुपये का नया रास्ता भी खोलेगा। पिछले एक साल से अमेरिकी टैरिफ और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण दबाव झेल रहे कानपुर के उद्यमियों के लिए यह एक बड़ी उम्मीद बनकर आया है। क्या है यह करार और कैसे बदलेगी सूरत? केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के उद्योग एवं व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने 27 अप्रैल 2026 को इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। अब तक न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों की पैठ सीमित थी, लेकिन ड्यूटी फ्री होने के बाद अब लेदर, रेडीमेड गारमेंट्स, केमिकल्स, फार्मा और एग्रीकल्चर उत्पादों की राह आसान हो गई है। काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट (CLE) के वाइस चेयरमैन मुख्तारुल अमीन के अनुसार, यह समझौता लेदर इंडस्ट्री के लिए गेम चेंजर साबित होगा। अब न्यूजीलैंड से कच्चा चमड़ा आयात करना आसान होगा, जिसे भारत में प्रोसेस करके फिनिश्ड गुड्स के रूप में वैश्विक स्तर पर एक्सपोर्ट किया जा सकेगा। कानपुर का निर्यात होगा डबल फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव बताते हैं कि वर्तमान में कानपुर से न्यूजीलैंड को होने वाला निर्यात लगभग 200 से 300 करोड़ रुपये के बीच है। समझौते के बाद उत्पादों पर ड्यूटी हटने से इसमें सीधा इजाफा होगा और यह आंकड़ा 500 करोड़ रुपये के पार पहुंच सकता है। आंकड़ों की बात करें तो न्यूजीलैंड के बाजार में अन्य देशों का दबदबा है, जहां भारत की हिस्सेदारी अब तक नाममात्र रही है। लेकिन इस एफटीए के बाद भारतीय उत्पादकों को अपने पोर्टफोलियो को विस्तार देने का बेहतरीन मौका मिल गया है। छोटे कारोबारियों के लिए बढ़ेगा दायरा इस करार का सबसे बड़ा असर स्थानीय स्तर पर देखने को मिलेगा। अब छोटे कारोबारी भी बिचौलियों के बिना सीधे न्यूजीलैंड में अपने उत्पादों का निर्यात कर सकेंगे। उत्पादन बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग हब में काम करने वाले कारीगरों की मांग बढ़ेगी और नई सप्लाई चेन बनने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान मिलेगी, जिससे उनकी आय में भी सुधार होगा। मई में कीवी देश का दौरा करेगा एक्सपोर्टर्स का दल समझौते का असर दिखने लगा है। FIEO ने इसे आगे बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। मई के दूसरे सप्ताह में निर्यातकों का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल न्यूजीलैंड और फिजी का दौरा करेगा। इस दौरे का मकसद न्यूजीलैंड के खरीदारों के साथ सीधे बिजनेस डील करना और भारतीय उत्पादों के लिए वहां स्थायी बाजार तैयार करना है। कानपुर के निर्यातकों के लिए यह महज एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमाने का एक बड़ा अवसर है। जानकारों का मानना है कि यदि तकनीक और गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया, तो कानपुर का लेदर और गारमेंट सेक्टर आने वाले दिनों में न्यूजीलैंड के बाजार में 'मेड इन इंडिया' का परचम लहराएगा।
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