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    लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मिली रफ्तार:वसंत कुंज में बनेगा 127 करोड़ का हाईटेक डिपो, जीएचवी इंडिया को मिला ठेका

    19 hours ago

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    लखनऊ मेट्रो के प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के निर्माण कार्य ने एक और अहम पड़ाव पार कर लिया है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) ने वसंतकुंज में बनने वाले मेट्रो डिपो के निर्माण का ठेका जीएचवी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित कर दिया है। करीब 127 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला यह डिपो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर की मेट्रो ट्रेनों के रखरखाव और संचालन का प्रमुख केंद्र होगा। यूपीएमआरसी के अनुसार डिपो निर्माण के लिए जारी ओपन टेंडर प्रक्रिया में पांच कंपनियों ने भाग लिया था। तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के बाद जीएचवी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड की बोली सबसे उपयुक्त पाई गई। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 150 करोड़ रुपए थी। ट्रांसपोर्ट नगर डिपो की तर्ज पर होगा निर्माण वसंतकुंज में बनने वाला नया डिपो लखनऊ मेट्रो के ट्रांसपोर्ट नगर स्थित मौजूदा डिपो की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यहां मेट्रो ट्रेनों की स्टेब्लिंग, नियमित जांच, मरम्मत और तकनीकी रखरखाव की सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह डिपो ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के सुरक्षित और सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि डिपो को आधुनिक और तकनीक-संचालित सुविधा के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय रखरखाव अवसंरचना उपलब्ध होगी। हाईटेक मशीनों से लैस होगा डिपो डिपो में ट्रेनों के रखरखाव के लिए अत्याधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इनमें पिट व्हील लेथ मशीन प्रमुख होगी, जिसके जरिए मेट्रो कोचों के पहियों की घिसावट को ठीक किया जाएगा। लगातार संचालन के दौरान पहियों के प्रोफाइल में होने वाले बदलाव को यह मशीन दुरुस्त करेगी, जिससे ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी। इसके अलावा पूर्ण स्वचालित सिंक्रोनाइज्ड पिट जैक और मोबाइल जैक मशीनें, बोगी टर्न टेबल, ऑटोमैटिक ट्रेन वाशिंग प्लांट, इलेक्ट्रिक बोगी शंटर तथा री-रेलिंग और रेस्क्यू व्हीकल जैसी सुविधाएं भी स्थापित की जाएंगी। इनकी मदद से ट्रेनों के रखरखाव और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। ग्रीन डिपो के रूप में होगा विकास यूपीएमआरसी इस डिपो को पर्यावरण अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दे रहा है। डिपो में जीरो डिस्चार्ज सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे परिसर का कोई भी अपशिष्ट जल बाहर नहीं जाएगा। इसके लिए डुअल प्लंबिंग सिस्टम, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) लगाए जाएंगे। उपचारित पानी का पुन: उपयोग ट्रेनों की धुलाई, सफाई और अन्य कार्यों में किया जाएगा। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए एसटीपी और ईटीपी को एकीकृत प्रणाली के रूप में विकसित किया जाएगा। पानी के भंडारण की भी होगी बड़ी व्यवस्था डिपो में रॉ वाटर टैंक, घरेलू उपयोग के लिए डोमेस्टिक वाटर टैंक और आपातकालीन परिस्थितियों के लिए फायर वाटर टैंक बनाए जाएंगे। यह व्यवस्था ट्रांसपोर्ट नगर डिपो की तरह ही होगी, जहां पानी के संग्रहण और पुन: उपयोग की प्रभावी प्रणाली पहले से संचालित है। परियोजना को मिली नई गति डिपो निर्माण का ठेका जारी होने के साथ ही ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर परियोजना की प्रारंभिक गतिविधियों में तेजी आएगी। यूपीएमआरसी का मानना है कि यह कदम परियोजना को जमीन पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा और लखनऊ के शहरी परिवहन नेटवर्क को और मजबूत बनाएगा।
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