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    लखनऊ में गाडिया लोहार समाज का प्रदर्शन:जाति सूची में शामिल न होने पर नाराजगी, सागर बोले- प्रदेश में 4 लाख आबादी पर सम्मान नहीं

    4 hours ago

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    लखनऊ के इको गार्डन में गाडिया लोहार समाज ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश भर से गाडिया लोहार ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी की। मुख्य रूप से जाति सूची में शामिल किए जाने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सागर सिंह ने कहा कि अपने ही देश में हमे भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। अपने ही राज्य में परायों के समान देखा जाता है। पूरे प्रदेश समुदाय की संख्या लगभग 4 लाख है, लेकिन सम्मान नहीं मिल रहा है। हमें अपना अधिकार नहीं मिला सागर सिंह ने कहा कि आजादी के बाद भी हमें अधिकार और सम्मान नहीं मिला। सदियों से कठिन समस्याओं का सामना करते हुए, सड़कों के किनारे घुमन्तु अवस्था में अपना जीवन गुजार रहे रहा है। हमारे पूर्वजों ने सन 1597 में महाराणा प्रताप जी के अंत काल से पूर्व पांच प्रतिज्ञा लीं कि हम जब तक मेवाड़ आजाद नहीं करा लेते, चित्तौड़ के दुर्ग पर नहीं चढ़ेंगे, दीपक नहीं जलाएंगे, खाट पर नहीं सोएंगे, घर में निवास नहीं करेंगे, पानी खींचने का रस्सा भी नहीं रखेंगे। महाराणा प्रताप की प्रतिज्ञाओं का पालन कर रहे हैं सागर सिंह ने कहा- महाराणा प्रताप की मृत्यु के बाद प्रतिज्ञाओं का पालन करते रहे। इसी कारण अलग अलग स्थानों पर भिन्न भिन्न नामों से जाने गए जैसे गाडिया लोहार, गाडोला, गाड़ोलिया, लोहगड़िया, लोहरबढ़ियां, भूभड़िया, लोहापीटा। देश की आजादी के बाद 6 अप्रैल 1955 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा चित्तोड़ के किले पर चढ़ाकर प्रतिज्ञाएं तुड़वाई गई । इस कार्यक्रम में आठ राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे, उन्होंने अपने अपने राज्यों में गाड़ियालोहारों को अति पिछड़ी जाति सूची, में शामिल किया। मगर दुर्भाग्य से उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानन्द नहीं पहुंचे। जिसका परिणाम ये हुआ कि हम अपने अधिकारों से वंचित रह गए। उत्तर प्रदेश में गाडिया लोहार समुदाय को जाति सूची में शामिल नहीं किया गया। उस दंश को आज तक समाज भोग रहा है। हमारी मांग है कि समाज के साथ न्याय करते हुए जाति सूची में शामिल किया जाए। जाति सूची में न होने के कारण हमारे बच्चे शिक्षा रोजगार से वंचित रह रहे हैं। हमारा जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाता है। हमें कहीं भी अधिकार और सम्मान नहीं मिलता। इसलिए हमें चाहते हैं कि सरकार हमारे साथ न्याय करें।
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