Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Iran में अमेरिकी बचाव अभियान बना चेतावनी, जमीनी कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल

    3 hours from now

    2

    0

    ईरान में फंसे एक अमेरिकी वायुसेना अधिकारी को बचाने के लिए चला 36 घंटे का अभियान अब वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और इसे अमेरिका की सैन्य रणनीति के लिए एक बड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अगर सीमित स्तर पर भी जमीनी कार्रवाई होती है तो उसकी कीमत कितनी भारी हो सकती है।बता दें कि यह घटना 3 अप्रैल को शुरू हुई, जब एक अमेरिकी लड़ाकू विमान को ईरान में मार गिराया गया। विमान में मौजूद दोनों अधिकारी बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन एक अधिकारी दुश्मन क्षेत्र में फंस गया। मौजूद जानकारी के अनुसार, दूसरा अधिकारी सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि हथियार प्रणाली अधिकारी को बचाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाना पड़ा।गौरतलब है कि यह अभियान बेहद जोखिम भरा था, जिसमें विशेष बलों, खुफिया एजेंसियों, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और परिवहन विमानों का इस्तेमाल किया गया। बताया जा रहा है कि सैकड़ों कमांडो इस अभियान में शामिल थे और अधिकारी को ढूंढने के लिए कई तरह की रणनीतियां अपनाई गईं, जिसमें भटकाने के लिए गलत संकेत भी छोड़े गए।इस दौरान ईरानी बल भी उस अधिकारी की तलाश में जुटे थे और स्थानीय स्तर पर इनाम की घोषणा तक की गई थी। मौजूद जानकारी के अनुसार, घायल अधिकारी करीब दो दिन तक पहाड़ी इलाके में छिपा रहा और बेहद सावधानी से अपनी स्थिति छुपाए रखी है।जब अमेरिकी बलों ने आखिरकार उसे ढूंढ निकाला, तब भी अभियान आसान नहीं रहा। खराब मौसम, कठिन भौगोलिक स्थिति और दुश्मन के हमले के खतरे के कारण वापसी में दिक्कतें आईं। ऐसे में कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी बलों को अपने ही कुछ विमानों और उपकरणों को नष्ट करना पड़ा, ताकि वे दुश्मन के हाथ न लग सकें।गौरतलब है कि इस पूरे अभियान में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। एक लड़ाकू विमान की कीमत ही सैकड़ों करोड़ रुपये के बराबर होती है और इसके अलावा इस्तेमाल किए गए संसाधनों का खर्च अलग है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि ईरान जैसे देश में जमीनी कार्रवाई कितनी जटिल और महंगी साबित हो सकती है।इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि अगर बातचीत विफल होती है तो जमीनी सैनिक भेजने का विकल्प पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ईरान के रणनीतिक क्षेत्रों पर सीमित कार्रवाई की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Sathankulam Custodial Death केस में 9 Policeकर्मियों को फांसी, Madurai कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला।
    Next Article
    Modi Vs Putin Vs Trump: PM मोदी समेत दुनिया के तीन टॉप लीडर की कितनी है उम्र, कैसे हैं इतना फिट? जानिए क्या है लाइफस्टाइल

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment