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    लखनऊ कोर्ट का इंटरनेशनल मानव तस्करी नेटवर्क पर बड़ा फैसला:गैंग के 9 दोषियों को 8 साल की सजा: 20 हजार में ‘डील’, फर्जी पहचान से भारत में बसाकर करते थे सौदा

    4 hours ago

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    अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के एक बड़े मामले में लखनऊ की विशेष अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए 9 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि यह गिरोह बांग्लादेश और म्यांमार से रोहिंग्या और अन्य नागरिकों को अवैध रूप से भारत लाकर न सिर्फ बसाता था, बल्कि उन्हें पैसे लेकर बेचता भी था। गुरुवार को कोर्ट ने इसे संगठित अपराध बताते हुए सख्त सजा सुनाई और कहा कि यह देश की सुरक्षा और मानवाधिकार दोनों के लिए गंभीर खतरा है। पुरानी दिल्ली स्टेशन से शुरू हुआ था खुलासा, ATS ने मौके पर ही पकड़ा नेटवर्क मामले की जड़ें 26 जुलाई 2021 की उस कार्रवाई से जुड़ी हैं, जब एटीएस की टीम ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छापेमारी कर इस गिरोह के सदस्यों को हिरासत में लिया था। सुबह करीब 4:50 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-2 के पास खड़े एक व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए आरोपी मो० नुरुल इस्लाम ने बताया था कि यही रहमत उल्लाह है, जो इस नेटवर्क का अहम हिस्सा है। एटीएस ने मौके पर ही दोनों को पकड़ लिया और पूछताछ के लिए नोएडा यूनिट ले जाया गया। पूछताछ में जो खुलासे हुए, उन्होंने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। 2014 से सक्रिय था नेटवर्क, त्रिपुरा बॉर्डर से होती थी एंट्री पूछताछ में नुरुल इस्लाम ने बताया कि वह वर्ष 2014-15 से इस अवैध धंधे में सक्रिय है। वह बांग्लादेश का मूल निवासी है और त्रिपुरा में बांग्लादेश सीमा के जरिए सिंडिकेट के साथ मिलकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में घुसाता था। इसके लिए प्रति व्यक्ति 20-20 हजार रुपये लिए जाते थे। भारत में लाने के बाद इन लोगों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था, जहां उन्हें मजदूरी या अन्य काम के नाम पर बेचा जाता था। फर्जी दस्तावेज बनाकर खुद को बताते थे भारतीय नागरिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और जन्म प्रमाण पत्र बनवाते थे। इन दस्तावेजों के जरिए वे न सिर्फ खुद को वैध नागरिक के रूप में स्थापित करते थे, बल्कि जिन लोगों को लाया जाता था, उन्हें भी इसी तरह की पहचान देकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जाता था। महिलाओं की तस्करी कर बेचने की थी तैयारी, जम्मू तक फैला नेटवर्क पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था। एक आरोपी ने कबूल किया कि एक महिला को अवैध रूप से भारत लाकर जम्मू में बेचने की तैयारी थी। इसके अलावा, कई मामलों में रिश्तेदारों को बुलाने के नाम पर लोगों को भारत लाया जाता था, लेकिन बाद में उन्हें तस्करी के जाल में फंसा दिया जाता था। मोबाइल, विदेशी मुद्रा और बांग्लादेशी पहचान पत्र समेत कई सबूत बरामद एटीएस की कार्रवाई में आरोपियों के पास से कई अहम सबूत बरामद हुए। इनमें अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोन, बांग्लादेशी सिम कार्ड, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, रेलवे टिकट और एक बांग्लादेशी पहचान पत्र की कॉपी शामिल है। इसके अलावा नकद रुपये और विदेशी मुद्रा भी बरामद हुई। इन सभी सामानों को मौके पर ही सील कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे अदालत ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। कोर्ट में आरोपियों ने कबूला जुर्म, कहा-पैसे के लिए करते थे तस्करी मामले में एक अहम मोड़ तब आया जब 10 मार्च 2026 को सभी आरोपियों ने अदालत में जुर्म स्वीकार करने की अर्जी दी। अदालत ने उन्हें इसके परिणामों से अवगत कराया, जिसके बाद 28 मार्च 2026 को उन्होंने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों की स्वीकारोक्ति, गवाहों के बयान और बरामद साक्ष्यों से यह पूरी तरह साबित हो गया है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी का मामला है। कोर्ट का सख्त संदेश-मानव तस्करी गंभीर अपराध, नहीं मिलेगी कोई राहत अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिक हैं और उन्होंने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत भारत में अवैध प्रवेश कर लोगों का शोषण किया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराध न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि समाज और देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा हैं। ऐसे मामलों में कड़ी सजा देकर ही इस तरह के नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकता है। किस-किस को दोषी ठहराया गया • मो० नूर उर्फ नुरुल इस्लाम • रहमत उल्लाह • शबीउर्रहमान उर्फ शबी उल्लाह • इस्माइल • अब्दुल शकूर उर्फ गनी • आले मियां • मो० रफीक उर्फ रफीकुल इस्लाम • बप्पन उर्फ अरशद मियां • मो० हुसैन
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