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    लखनऊ के कसमंडी किले पर विवाद, पुलिस बल तैनात:हिंदूवादी नेता बोले- मौलाना क्यों भागा; बकरीद की नमाज नहीं पढ़ी जाएगी

    10 hours ago

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    लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां इलाके में पुराने किले को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया है। मंगलवार को कुछ हिंदूवादी नेता यहां पूजा की थाली लेकर पहुंच गए। स्थल के पास तैनात पुलिस बल के जवानों ने उन्हें रोक दिया, तो जमीन पर बैठ गए। वहीं से किले की तरफ मुंह करके आरती उतारी। ये सभी अखिल भारत हिंदू महासभा के पदाधिकारी थे। इनका कहना था कि यह मस्जिद नहीं, हिंदू नेता कंसा पासी का किला है। यहां पर अवैध गतिविधियां करने वाला मौलाना आखिर अब क्यों भाग गया? संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा- लोगों के विरोध के बाद मौलाना जमील अहमद उर्फ जॉनी क्यों भाग गया? वहीं, बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यहां बकरीद की नमाज करने पर पाबंदी लगा दी है। 2 तस्वीरें देखिए- पहले पूरा मामला जानिए- मलिहाबाद तहसील क्षेत्र के कसमंडी कला गांव में एक किला जैसा पुराना ढांचा है। गांववालों के अनुसार, यहां करीब 4 साल पहले जमील अहमद उर्फ जॉनी नाम का मौलाना आया। उसने ढांचे के बगल में ही मस्जिद बना ली और मदरसा चलाने लगा। इतना ही नहीं, उसने किले वाले ढांचे का भी इस्तेमाल शुरू कर दिया। किला वाले ढांचे को लोग ऐतिहासिक कंसा पासी का किला बता रहे हैं। कंसा पासी के नाम पर ही गांव का नाम कसमंडी पड़ा था। गांववालों के मुताबिक, मौलाना की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो पासी समाज के लोगों ने उसका विरोध शुरू कर दिया। इसके बाद मौलाना यहां से 21 मई को भाग गया। ‘मौलाना को ढूंढ़कर लाया जाए, उसकी धुलाई हो’ अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा कि यह शूरवीर, पराक्रमी महाराजा कंसा पासी का किला है। इसमें कुछ चरमपंथी मौलाना लोगों ने कब्र बनाकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया। पासी समाज के सम्मान में, हिंदू महासभा है मैदान में। हमारी 2 प्रमुख मांगें हैं। पहली- उस मौलाना और उसके सहयोगियों को ढूंढकर सबके सामने लाया जाए। उसे वाशिंग मशीन में धुला जाए। दूसरी- किले को मुक्त कराकर शिव मंदिर को पासी समाज को सौंपा जाए। सारा हिंदू पासी समाज के साथ है। बड़ी संख्या में जुट रहे हिंदूवादी नेता विवाद की सूचना जैसे-जैसे फैल रही है, गांव में हिंदूवादी नेताओं का जुटना भी शुरू हो गया है। अखिल भारत हिंदू महासभा के बाद अन्य संगठन से जुड़े लोग भी यहां पहुंच रहे हैं। गौरव गोस्वामी नाम का एक युवक अपने साथियों के साथ पहुंचा। यहां हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ने का प्रयास किया। लेकिन, प्रशासन ने बाहर पढ़ने की इजाजत दी। बाहर हनुमान चालीसा का पाठ कर गौरव अपने साथियों के साथ लौट गया। 21 मई से शुरू हुआ था विवाद पुलिस की मौजूदगी में हुई थी जुमे की नमाज गांव में विवाद 21 मई (गुरुवार) से शुरू हुआ था। लाखन आर्मी के अध्यक्ष सूरज पासी ने कुछ समर्थकों को लेकर स्थल के पास प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि कंसा पासी किला के अंदर देवी-देवताओं की मूर्तियां हैं। इस पर कब्जा किया जा रहा है। अगले दिन शुक्रवार था। प्रदर्शन को देखते हुए जुमे की नमाज से पहले गांव में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई। पुलिस की मौजूदगी में जुमे की नमाज अदा की गई। अगले दिन 23 मई को सुहेलदेव आर्मी के लोग पहुंचे और विवादित स्थल के पास सुंदरकांड का पाठ किया। इस दौरान आर्मी के चीफ योगेश पासी से पुलिस की कहासुनी भी हुई। वो नहीं माने और कार्यकर्ताओं के साथ सुंदरकांड का पाठ वहीं पर खड़े-खड़े पूरा किया। हनुमान चालीसा और सुंदरकांड पाठ के बाद संगठन के पदाधिकारियों ने मलिहाबाद के उपजिलाधिकारी (SDM) को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें विवादित भूमि की गहन जांच कराने, एक राजस्व टीम गठित करने और मामले में पारदर्शी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई। योगेश पासी ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं हुआ, तो उनका संगठन आगे भी आंदोलन करेगा। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें- ‘ढाई करोड़ की कार वाले गमले चुरा ले गए’, लखनऊ में योगी बोले- मैंने CCTV देखा, मन हुआ कि फोटो चौराहे पर लगवाऊं हम गमला लगाते हैं, तो कोई कार से आता है और गमला उठाकर ले जाता है। जितना कार का तेल लग रहा है, उतने में नया गमला ले सकते हो। ये चोरी का नया मॉडल है। अब हर जगह सीसीटीवी लगे हैं, हम उससे देखते रहते हैं। पता लगता है कि ढाई करोड़ की कार से 45 रुपए के गमले चुरा रहे हैं। (पूरी खबर पढ़िए)
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