Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    लॉकर रूम में बसती है टेनिस की अलग दुनिया:कभी आई कॉन्टैक्ट से बचते हैं, तो कभी साथ में हार का गम बांटते हैं प्रतिद्वंद्वी

    1 hour ago

    1

    0

    खेल की दुनिया में टेनिस को सबसे ‘अकेला’ खेल माना जाता है। कोर्ट पर खिलाड़ी हर पॉइंट के बीच अपनी रणनीति और भावनाओं को संभालते हुए अक्सर खुद से बातें करते नजर आते हैं। लेकिन कोर्ट के बाहर लॉकर रूम का माहौल कहीं ज्यादा जटिल और दिलचस्प होता है। यहां वही खिलाड़ी एक साथ मौजूद होते हैं, जो कुछ देर में एक-दूसरे के खिलाफ मैदान पर उतरने वाले होते हैं और यही स्थिति कई बार खिलाड़ियों के लिए असहज हो जाती है। अमेरिकी स्टार कोको गॉफ लॉकर रूम का एक अनुभव साझा करते हुए बताती हैं कि ऑस्ट्रेलियन ओपन के दौरान उन्होंने एक खिलाड़ी को मैच के बाद मिठाई खाते देखा और मजाक में कह दिया कि शायद उसका मैच अच्छा गया होगा। लेकिन सामने से जवाब मिला, ‘यह डिप्रेशन कैंडी है।’ इस एक पल ने बता दिया कि लॉकर रूम में हर खिलाड़ी अलग भावनाओं से गुजर रहा होता है और किसी से भी बात करने से पहले सोचना पड़ता है। दरअसल, टेनिस में लॉकर रूम सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि भावनाओं का मिश्रण है। कोई खिलाड़ी जीत की खुशी में होता है, तो कोई हार के बाद निराशा में डूबा होता है। ऐसे में खिलाड़ी अक्सर आई कॉन्टैक्ट तक से बचते हैं। स्पेन की पाउला बाडोसा बताती हैं कि मैच के दिन वे दूसरे खिलाड़ियों को सिर्फ ‘हाय’ कहकर आगे बढ़ जाती हैं और बातचीत से बचती हैं। गॉफ कहती हैं, ‘समझ नहीं आता कि सामने वाले से बात करें या नहीं, और वह किस मूड में है।’ स्विट्जरलैंड की बेलिंडा बेनकिच के मुताबिक, कभी-कभी हालात और भी अजीब हो जाते हैं। जैसे कोर्ट तक जाने के लिए गोल्फ कार्ट शेयर करना या मैच से पहले तैयार होते समय प्रतिद्वंद्वी का पास में होना। तब समझ नहीं आता कि बातचीत करें या चुप रहें। इसी असहजता से बचने के लिए कई खिलाड़ी लॉकर रूम में कम से कम समय बिताने लगे हैं। इटली के स्टार यानिक सिनर कहते हैं कि अपने करियर की शुरुआत में वे ज्यादा समय वहीं बिताते थे, लेकिन अब वे जल्दी आते हैं और मैच खत्म होते ही निकल जाते हैं। हालांकि, इस माहौल का एक सकारात्मक पहलू भी है। अमेरिकी खिलाड़ी मैडिसन कीज कहती हैं कि यही जगह उन्हें मुश्किल समय में सहारा देती है। वे बताती हैं कि यहां ‘दोस्त’ भी होते हैं, जो हार के बाद आपको संभाल लेते हैं। डेनियल मेदवेदेव के अनुसार, पहले के मुकाबले अब लॉकर रूम का माहौल काफी शांत और बेहतर हो गया है। वहीं, ग्रीस के स्टीफानोस सितसिपास मानते हैं कि सफलता के साथ कुछ खिलाड़ियों का व्यवहार बदल जाता है, जो उन्हें पसंद नहीं है। वे कहते हैं, ‘मैं विनम्र लोगों को ज्यादा पसंद करता हूं।’ लॉकर रूम एक ऐसा साझा स्थान है, जहां जीत-हार, खुशी-गम सब एक साथ मौजूद होते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों के लिए सबसे जरूरी चीज होती है, संवेदनशीलता, समझ और एक-दूसरे के प्रति सम्मान।
    Click here to Read more
    Prev Article
    पावर हाउस का घेराव, चार दिन से बिजली कट:जौनपुर में उपभोक्ताओं ने किया प्रदर्शन, स्मार्ट मीटर पर आ रहा अधिक बिल
    Next Article
    West Bengal Voting LIVE: पश्चिम बंगाल में अब तक 61% वोटिंग, शुभेंदु अधिकारी को TMC समर्थकों ने घेरा

    Related स्पोर्ट्स Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment