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    कृषि विश्वविद्यालय ने विकसित कीं बाढ़ सहनशील धान की 25किस्में:तराई और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए होंगी फायदेमंद

    3 hours ago

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    आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज के बायोटेक्नोलॉजी विभाग ने तराई और जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए धान की 25 नई प्रजातियां विकसित की हैं। ये किस्में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती बाढ़ की समस्या से निपटने में किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगी। जलवायु परिवर्तन के कारण देश में बाढ़ की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे चावल उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई है। इसी को देखते हुए वैज्ञानिकों की टीम ने जैव रासायनिक लक्षणों और माइक्रोसेटेलाइट (SSR) मार्कर विश्लेषण के माध्यम से जलमग्नता सहनशील किस्मों की पहचान की है। इस शोध में आलोक कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार द्विवेदी, डॉ. नवाज अहमद खान और रंजीत कुमार सहित 12 वैज्ञानिकों की टीम ने 116 धान किस्मों का अध्ययन किया। इसमें सहनशील किस्म FR13A और संवेदनशील चेक DRR44 को शामिल कर जलमग्न परिस्थितियों में परीक्षण किया गया। अध्ययन में 25 किस्मों ने बाढ़ के प्रति बेहतर सहनशीलता दिखाई। जैव रासायनिक विश्लेषण में पाया गया कि जलभराव से अधिकांश किस्मों में क्लोरोफिल, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का स्तर घट गया, लेकिन कुछ किस्मों में यह गिरावट कम रही। वहीं, तनाव सहनशीलता बढ़ाने वाला सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज़ (SOD) एंजाइम 54 से 67 प्रतिशत तक बढ़ गया। ऊर्जा उपयोग से जुड़े एमाइलेज एंजाइम में 10 से 51 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। आणविक विश्लेषण में आठ Sub1 जीन-विशिष्ट SSR मार्करों का उपयोग किया गया। RM316 और RM8300 मार्कर सहनशील और संवेदनशील किस्मों में अंतर करने में सबसे प्रभावी पाए गए। समग्र परिणामों में IR15F1896, IR18A1876 और IR18A1967 जैसी किस्मों ने जैव रासायनिक और आणविक दोनों स्तरों पर जलमग्नता सहनशीलता प्रदर्शित की। वैज्ञानिकों का कहना है कि इन किस्मों से भविष्य में बाढ़-प्रतिरोधी और अधिक उपज देने वाली नई प्रजातियां विकसित की जा सकेंगी। प्रोफेसर डॉ. नवाज अहमद खान ने बताया कि यह शोध बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को राहत देगा और बदलती जलवायु में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि किसानों को इन किस्मों के बीज मिलने में लगभग 2 वर्ष लगेंगे।
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