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    कर्नाटक के CM सिद्धारमैया और पत्नी को High Court का समन, MUDA जमीन घोटाले की File फिर खुली

    3 hours from now

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    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गुरुवार, 26 मार्च को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनकी पत्नी को नोटिस जारी किया। यह नोटिस जन प्रतिनिधि सभा की विशेष अदालत द्वारा मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) घोटाले के मामले में 'बी' रिपोर्ट स्वीकार करने की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका के संबंध में जारी किया गया है। न्यायमूर्ति एस सुनील दत्त यादव की एकल पीठ ने मैसूर लोकायुक्त, प्रवर्तन निदेशालय के पुलिस अधीक्षक, सिद्धारमैया के बहनोई मैदुना मल्लिकार्जुन स्वामी, एमयूडीए के पूर्व आयुक्त जीटी दिनेश कुमार और मामले में विवादित भूमि के मालिक जे देवराजू को भी नोटिस जारी किया। इसे भी पढ़ें: Vanakkam Poorvottar: अन्नाद्रमुक का घोषणापत्र है या लॉटरी का टिकट? हर परिवार को 10000 रुपए, मुफ्त फ्रिज, फ्री बस यात्रा जैसे कई लुभावने वादेलोकायुक्त पुलिस ने पहले 'सबूतों की कमी' का हवाला देते हुए सिद्धारमैया और अन्य के खिलाफ 'बी' रिपोर्ट दाखिल की थी। शिकायतकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने इस रिपोर्ट को चुनौती दी है। 28 जनवरी को निचली अदालत ने कथित घोटाले में कर्नाटक लोकायुक्त के पुलिस अधीक्षक द्वारा दाखिल की गई 'बी' रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था। लोकायुक्त पुलिस द्वारा दायर ‘बी-रिपोर्ट’ को चुनौती देने वाली कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एस. सुनील दत्त यादव ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया। एमयूडीए मामले में, आरोप है कि सिद्धरमैया की पत्नी को मैसूरु के एक पॉश इलाके में मुआवजे के तौर पर जमीन आवंटित की गई थी, जिसका मूल्य प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित उनकी जमीन से अधिक है।  इसे भी पढ़ें: Karnataka Politics में भूचाल: संत का बड़ा दावा, DK Shivakumar का साथ देने वाले मठों का Budget रोकाएमयूडीए ने पार्वती को उनकी 3.16 एकड़ जमीन के बदले 50:50 के अनुपात में भूखंड आवंटित किये थे, जिस पर प्राधिकरण ने एक आवासीय परियोजना विकसित की थी। इस योजना के तहत, एमयूडीए आवासीय परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित अविकसित भूमि के बदले भूस्वामियों को विकसित भूमि का 50 प्रतिशत हिस्सा आवंटित करता है। कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने सिद्धरमैया, उनकी पत्नी और उनके साले के खिलाफ इस सिलसिले में मामला दर्ज किया था। लोकायुक्त पुलिस ने बाद में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल करके उन्हें क्लीन चिट दे दी, जिसे 28 जनवरी को जन प्रतिनिधियों से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने स्वीकार कर लिया।
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