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    कानपुर में हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा:IMA की चेतावनी- लापरवाही पड़ी भारी तो फेल हो सकते हैं शरीर के अंग

    19 hours ago

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    अप्रैल की तपती दोपहरी में पारा चढ़ते ही शहर में हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। कानपुर में बढ़ती गर्मी को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल सामान्य घबराहट नहीं, बल्कि जानलेवा स्थिति है। अगर समय रहते सावधानी नहीं बरती गई, तो यह शरीर के कई अंगों को फेल कर सकती है। आईएमए कानपुर की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में शहर के वरिष्ठ फिजिशियन और न्यूरोलॉजिस्टों ने बताया कि लू लगने पर शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है। ऐसी स्थिति में शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। शरीर के अंगों के लिए ‘काल’ है हीट स्ट्रोक आईएमए अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि हीट स्ट्रोक के दौरान डिहाइड्रेशन इतना खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है कि मल्टी ऑर्गन इन्वॉल्वमेंट शुरू हो जाता है। गर्मी के कारण लिवर में ऊतकों का सूखना (नेक्रोसिस) शुरू हो जाता है, जिससे लिवर फेल्योर का खतरा रहता है। वहीं, डिहाइड्रेशन से किडनी जवाब दे सकती है और दिमाग पर भी इसका सीधा असर पड़ता है। लू लगने पर मांसपेशियों में भी भारी नुकसान होता है, जिसे डॉक्टरी भाषा में ‘रैबडोमायोलिसिस’ कहा जाता है। ये हैं खतरे के संकेत आईएमए कानपुर की सचिव डॉ. शालिनी मोहन ने कहा कि अगर किसी को धूप में रहने के बाद तेज बुखार, शरीर का अत्यधिक तपना, सिरदर्द, चक्कर आना और कमजोरी महसूस हो तो तुरंत सतर्क हो जाएं। इसके अलावा उल्टी की इच्छा होना, बेहोशी छाना, पसीना आना बंद हो जाना और त्वचा का लाल व पूरी तरह सूखा हो जाना लू के गंभीर संकेत हैं। इन लक्षणों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन बातों का रखें खास ख्याल विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से परहेज करें। यदि बहुत जरूरी काम हो, तो सिर को टोपी, गमछे या छाते से पूरी तरह ढककर ही निकलें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। नींबू पानी, ओआरएस और छाछ का नियमित सेवन करें। सबसे जरूरी बात यह है कि खाली पेट कभी भी धूप में बाहर न निकलें। बेहोश होने पर क्या करें? अगर कोई व्यक्ति लू की चपेट में आकर बेहोश हो जाए, तो उसे जबरदस्ती पानी न पिलाएं। उसे तुरंत किसी ठंडी जगह पर ले जाएं और गीले कपड़े से उसके शरीर को पोंछें, ताकि शरीर का तापमान कम हो सके। इसके बाद बिना देरी किए उसे नजदीकी अस्पताल के आईसीयू में ले जाएं, जहां मरीज को ड्रिप के जरिए हाइड्रेट किया जा सके।
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