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    कौन है किडनी रैकेट की सरगना?:IMA की उपाध्यक्ष पति के साथ कैंप लगाकर तलाशती थी डोनर, एम्बुलेंस ड्राइवर लाता था ग्राहक

    5 hours ago

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    कानपुर में किडनी रैकेट का खुलासा करने के लिए पुलिस को लोकल इंटेलीजेंस यूनिट (LIU), क्राइम ब्रांच और साइवर सेल को एक्टिव करना पड़ा। इन टीमों में करीब 1 महीने तक काम किया, जिसके बाद पूरे रैकेट को एक्सपोज किया गया। किडनी रैकेट की सरगना डॉक्टर प्रीति आहूजा और उसके पति डॉक्टर सुरजीत आहूजा काफी पावरफुल है। यही कारण रहा कि छोटे डॉक्टर आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे और कई बार अधिकारी भी उसके काले कारनामों पर ध्यान नहीं देते थे या कार्रवाई से बचते थे। डॉक्टर प्रीति आहूजा कई बड़े संगठनों से जुड़ी हुई है। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की शहर इकाई में उपाध्यक्ष है। किडनी रैकेट में डॉक्टर प्रीति का नाम आने के बाद सभी संगठन कोई भी प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं। अस्पताल में 1 साल से किडनी ट्रांस्प्लांट का खेल चल रहा डॉ. प्रीति आहूजा MBBS, MD (मेडिसिन) हैं। अस्पताल कल्याणपुर के केशवपुरम, मसवानपुर चौराहा के पास स्थित है। आहूजा हॉस्पिटल पांच मंजिला इमारत में बना हुआ है और इसमें करीब 35 बेड की सुविधा उपलब्ध है। अस्पताल में जनरल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक्स, प्रसूति एवं स्त्री रोग (गायनेकोलॉजी), पीडियाट्रिक्स, ईएनटी, चेस्ट, एलर्जी, सर्जिकल और एनेस्थीसिया जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता है। यह अस्पताल करीब दो साल पहले शुरू हुआ था, जबकि पुलिस के अनुसार यहां पिछले एक साल से अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। जानिए प्रीति आहूज IMA के साथ और किस-किस संगठन से जुड़ी है… किडनी रैकेट की सरगना डॉक्टर प्रीति आहूजा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात है। ये यहां के कर्मचारियों का इलाज और छुट्टी देने के लिए काम मेडिकल एफिडेविट भी बनाती थी। इसके साथ ही इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) में शहर की कमेटी में उपाध्यक्ष है। डायबिटीज रोग विशेषज्ञ के संगठन कानपुर डायबिटीज एसोशिएशन (KDA) में सचिव भी है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के संगठन फिजीशयन फोरम की भी सदस्य है। इसके साथ शहर भर में डॉक्टर कम्युनिटी के अलग-अलग सामाजिक और मेडिकल कार्यक्रमों में सम्मिलित होती थी। हालांकि कानपुर की IMA टीम डॉक्टर प्रीति आहूजा पर कुछ भी बात करने में बच रही है। IMA के सूत्रों की मानें तो जब तक कोर्ट से प्रीति आहूजा को किडनी रैकेट में दोषी नहीं पाया जाएगा, तब तक IMA कार्यवाही करने से बचेगा। हेल्थ कैंप से भी टारगेट करते थे फिक्स डॉक्टर प्रीति अहूजा और डॉक्टर सुरजीत अहूजा अपने अस्पताल में फ्री हेल्थ कैंप का आयोजन करते थे। बाहर से आए लोग IMA का अधिकारी और बड़े डॉक्टर समझकर इनके कैंप मे आते थे। यहां से ये डॉक्टर भोले-भाले लोगों को अपना निशाना बनाते थे। इसके लिए बाकायदा एक टीम रखते थे। मरीजों को घर से लाने और ले जाने का काम एम्बुलेंस का होता है, जिसके लिए इन्होंने ने एक एम्बुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल उर्फ काना को रखा। समय के साथ-साथ काना इनके काम को बारीकी से समझ गया। वह भी लोगों को टारगेट करने लगा। जब प्रीती अहूजा और सुरजीत अहूजा ने देखा कि किडनी के रैकेट से पैसे की कमाई हो रही है, तो इन्होंने ने अपने नेटवर्क मे अन्य और अस्पतालों को शामिल कर लिया। शहर के सर्जनों से होगी पूछताछ आहूजा अस्पताल में अपनी सेवाएं देने वाले शहर के सर्जनों से भी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पूछताछ करेगी। इन सर्जन पर किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद रोगियों के इलाज करने और इस बात को छुपाने का आरोप है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, आहूजा अस्पताल के पास किडनी ट्रांसप्लांट करने और ट्रांसप्लांट के रोगी का इलाज करने की अनुमति नहीं होने के बावजूद इन डॉक्टरों ने उन दोनों रोगियों का इलाज किया। ऐसे में ये सभी डॉक्टर पूछताछ के दायरे में आएंगे। सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया- अस्पताल में आने वाले अन्य डॉक्टरों से भी बातचीत की जाएगी। उन्होंने बाद में रोगियों का इलाज किया है और जानकारी भी नहीं दी। ये डॉक्टर अस्पताल में ऑन कॉल आते थे। इसके अलावा अस्पताल में कोई भी नेफ्रोलॉजिस्ट या यूरोलॉजिस्ट नहीं आता था। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली महिला की तबीयत लगातार बिगड़ रही अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के खुलासे के बाद अस्पताल के सीएमएस सौरभ अग्रवाल ने बताया- जिस महिला का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है, उसकी हालत लगातार बिगड़ रही है। उसका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है। शरीर में क्रिएटिनिन (किडनी खराब होने का संकेत) का स्तर बढ़ गया है। साथ ही उसका हीमोग्लोबिन बहुत कम (करीब 5.5–6) हो गया है, जो खतरनाक स्थिति है। जांच में शरीर में इन्फेक्शन के संकेत भी मिले हैं। डॉक्टरों को यह भी शक है कि शरीर नई किडनी को स्वीकार नहीं कर रहा (ग्राफ्ट रिजेक्शन), जो गंभीर समस्या है। ऐसे में मरीज और उसकी किडनी को बचाने के लिए उसे तुरंत ऐसे बड़े और मान्यता प्राप्त अस्पताल में शिफ्ट करना जरूरी है, जहां किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बेहतर सुविधा और निगरानी उपलब्ध हो। अब जानिए किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाली महिला पारुल के बारे में.. पारुल तोमर मुजफ्फरनगर के नॉर्थ सिविल लाइंस की रहने वाली हैं। पारुल तोमर के पति विकास मेरठ में कक्षा 8 तक स्कूल चलाते हैं। पारुल का एक 19 वर्षीय बेटा है। वहीं, एक छोटी बेटी है। बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवार मेरठ शिफ्ट हो गया था। सूत्रों की माने तो किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा 80 लाख में तय हुआ था। ट्रांसप्लांट के दौरान पारुल का भाई मौजूद था। हालांकि पुलिस ने उससे भी पूंछताछ की है। पारुल के पति से अभी बात नहीं हो पाई है।
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