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    इटावा में आबकारी निरीक्षक निलंबित:जूनियर के जरिए 7 हजार रिश्वत लेने, दस्तावेज में हेरफेर के आरोप साबित

    3 hours ago

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    इटावा में 7 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जसवंतनगर में तैनात आबकारी निरीक्षक विकास को निलंबित कर दिया है। निरीक्षक पर अपने अधीनस्थ के जरिए रिश्वत लेने, सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी करने और ड्यूटी में लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप साबित हुए हैं। प्रयागराज स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय के आदेश के बाद यह कार्रवाई की गई। जसवंतनगर क्षेत्र में तैनात आबकारी निरीक्षक विकास पर आरोप था कि उन्होंने अपने अधीनस्थ के माध्यम से सात हजार रुपये की रिश्वत ली। जांच के बाद आरोप सही पाए गए, जिसके चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। एंटी करप्शन टीम ने रंगे हाथ पकड़ा था मामला बीते 8 अप्रैल को कानपुर की एंटी करप्शन टीम ने सिविल लाइन थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए आबकारी कार्यालय में तैनात प्रधान सिपाही तहसीलदार सिंह को सात हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। यह रकम सैफई के मोहनपुर निवासी उदय प्रताप से एक दुकान के मामले में मांगी गई थी। इस गिरफ्तारी के बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई थी। जांच में हेराफेरी और धमकी का खुलासा विभागीय जांच में सामने आया कि निरीक्षक विकास ने जसवंतनगर की धनुआ कंपोजिट दुकान के निरीक्षण के दौरान स्टॉक रजिस्टर में गलत प्रविष्टियां की थीं। उन्होंने एक ब्रांड की बोतल को संदिग्ध बताते हुए जब्त किया, लेकिन रजिस्टर में गलत तरीके से खुली शराब बेचने का उल्लेख किया। साथ ही दुकान मालिक को लाइसेंस निरस्त करने की धमकी भी दी गई थी। निलंबन के साथ सख्त विभागीय कार्रवाई के निर्देश आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने निरीक्षक को आचरण नियमों का उल्लंघन करने का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें प्रयागराज मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ कहा है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
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