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    इस्लामिक NATO में एंट्री लेगा ईरान? पाकिस्तान से हो गया बड़ा ऐलान

    1 day ago

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    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पाकिस्तान की यात्रा के दौरान मुस्लिम देशों से एकजुट होने और एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे के निर्माण का आह्वान किया। उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मुस्लिम देशों के बीच सहयोग और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया और फारस की खाड़ी में स्थाई शांति और सुरक्षा तभी संभव है जब क्षेत्र के देश आपसी सम्मान संवाद और सहयोग के आधार पर आगे बढ़े। पेजेश्कियान ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, क़तर, मिस्र और तुर्की समेत मुस्लिम देशों के साथ मिलकर एक नए क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे की बात की। यह बिल्कुल ठीक उसी तरीके से देखा गया जैसे पहले से नाटो है। इसे भी पढ़ें: NATO को रगड़ा, इटली का उड़ाया मजाक, स्टार्मर की दिखा दी हैसियत, अलग मूड में नजर आए ट्रंपउन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम देशों को साझा चुनौतियों और खतरों के खिलाफ अधिक समन्वय के साथ काम करना चाहिए। अपने संबोधन में उन्होंने मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का भी उल्लेख किया और मुस्लिम एकता की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के सालों में क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हुई हैं। हालांकि इस्लामिक नाटो जैसी अवधारणाओं पर अलग-अलग देशों की अपनी-अपनी प्राथमिकताएं और रणनीतिक चिंताएं रही हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह पहल किसी औपचारिक सैन्य या सुरक्षा गठबंधन का आरोप ले पाती है या फिर राजनीतिक और कूटनीतिक सहयोग तक सीमित रहती है। दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद और तेहरान के रिश्तों को भाईचारे और साझेदारी का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने कठिन वक्त में एक दूसरे का साथ दिया है और अब आर्थिक, राजनीतिक तथा सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाने की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: जिगरी दोस्त रूस के सामने भारत को खड़ा करने की थी प्लानिंग, लेकिन मोदी...ट्रंप ने क्या खुलासा कर दियादोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को नए स्तर पर ले जाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुस्लिम देशों के बीच एक नया क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा वास्तव में आकार ले पाएगा? और अगर ऐसा होता है तो इसका असर पश्चिम एशिया, फारस की खाड़ी, वैश्विक शक्ति संतुलन पर कितना व्यापक असर होगा? आने वाले महीनों में इस पहल पर क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रियाएं इन सवालों का जवाब तय करेगी। मुस्लिम देशों के बीच एक नए सुरक्षा ढांचे की चर्चा फिलहाल शुरुआती चरण में दिखाई देती है। Stay updated with International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi  
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