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    इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ट्रांसजेंडर कानून का विरोध:आइसा ने जातिगत भेदभाव के खिलाफ किया छात्रसंघ गेट पर प्रदर्शन किया

    3 hours ago

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    इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) ने ट्रांसजेंडर कानून के विरोध में प्रदर्शन किया। छात्रसंघ गेट पर आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और सरकार से कानून वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय में बढ़ते जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। वक्ताओं ने मांग की कि विश्वविद्यालय में समानता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी रेगुलेशन को "रोहित एक्ट" की तर्ज पर लागू किया जाए, ताकि वंचित वर्गों को उचित संरक्षण मिल सके। पीयूसीएल उत्तर प्रदेश के महासचिव चित्तजीत ने अपने संबोधन में कहा कि प्रस्तावित ट्रांसजेंडर एक्ट 2026 ट्रांस समुदाय के अधिकारों को सीमित करने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून में ट्रांसजेंडर की परिभाषा को संकुचित किया गया है, जिससे ट्रांसपुरुष और नॉन-बाइनरी जैसे वर्गों को अलग-थलग किया जा रहा है। आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव खत्म करने के बजाय उसे नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी रेगुलेशन के पक्ष में मजबूत पैरवी न होने के कारण इसे लागू करने में बाधाएं आ रही हैं। आइसा इलाहाबाद अध्यक्ष सोनाली ने जोर देकर कहा कि सरकार वंचित समुदायों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है, जो संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सभा में 2 अप्रैल 2018 को एससी/एसटी एक्ट के समर्थन में हुए आंदोलन के दौरान शहीद हुए युवाओं को श्रद्धांजलि भी अर्पित की गई। इस दौरान वक्ताओं ने सामाजिक न्याय और समान अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। प्रदर्शन में अन्य छात्र नेताओं और ट्रांस समुदाय के सदस्यों ने भी अपने विचार रखे और ट्रांस कानून को रद्द करने की मांग दोहराई। छात्र-नौजवानों ने एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।
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