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    इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ रिसर्च का 'गोल्डन चांस':IIT कानपुर से जुड़ेंगे CSJMU के शोधार्थी; घर बैठे मिलेगी वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग

    2 hours ago

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    शहर के तकनीकी छात्रों के लिए करियर की राह अब और आसान होने वाली है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के इंजीनियरिंग विभाग यानी UIET और आईआईटी कानपुर ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया है। दोनों संस्थानों के बीच सोमवार को एक अहम समझौता (MoU) हुआ है, जिसके बाद अब UIET के छात्र देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर की लैब और संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इस समझौते पर आईआईटी कानपुर के डीन (अकादमिक) प्रो. अशोक डे और सीएसजेएमयू की डीन (अकादमिक) प्रो. बृष्टि मित्रा ने हस्ताक्षर किए। इस मौके पर यूआईईटी के निदेशक डॉ. आलोक कुमार भी मौजूद रहे। आईआईटी की लैब में सीखेंगे रिसर्च के गुर इस एमओयू का सबसे बड़ा फायदा UIET के ग्रेजुएशन (B.Tech) और पोस्ट ग्रेजुएशन (M.Tech) के छात्रों को मिलेगा। अब यहां के छात्र आईआईटी कानपुर के खास 'समर रिसर्च इंटर्नशिप प्रोग्राम' (SRIP) का हिस्सा बन सकेंगे। इससे छात्रों को न केवल विश्वस्तरीय एक्सपोजर मिलेगा, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों पर काम करने का अनुभव भी प्राप्त होगा। पीएचडी की राह हुई आसान, डायरेक्ट मिलेगा मौका समझौते की खास बात यह है कि यूआईईटी के होनहार छात्रों के लिए आईआईटी कानपुर में पीएचडी प्रोग्राम में प्रवेश के रास्ते खुल गए हैं। इसके लिए कुछ विशेष नियम और शर्तें तय की गई हैं, जिसके तहत सीधे एडमिशन के अवसर उपलब्ध होंगे। अब छात्रों को उच्च शिक्षा और शोध के लिए दूसरे शहरों या राज्यों की ओर नहीं देखना पड़ेगा। प्रोफेसर और शोधार्थी भी साझा करेंगे ज्ञान यह समझौता सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं है। दोनों संस्थानों के प्रोफेसर और शोधार्थी भी एक-दूसरे के यहां जाकर रिसर्च कर सकेंगे। आपसी सहमति से तय समय के लिए वे संसाधनों का साझा उपयोग करेंगे। इससे कानपुर में तकनीकी और वैज्ञानिक शोध की गुणवत्ता में सुधार होगा और नई स्टार्टअप या पेटेंट जैसे नवाचारों को गति मिलेगी। शहर बनेगा एजुकेशन का बड़ा हब आईआईटी और सीएसजेएमयू जैसे दो बड़े संस्थानों के करीब आने से कानपुर की छवि एक 'एजुकेशन हब' के रूप में और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है,कि इस तरह के कोलैबोरेशन से लोकल टैलेंट को इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग यहीं शहर में मिल सकेगी। संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं (Joint Research Projects) के जरिए आने वाले समय में तकनीक के क्षेत्र में नए बदलाव देखने को मिलेंगे।
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