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    हाथरस नगर पालिका में जैम टेंडर पर सवाल:जांच में नियमों के उल्लंघन और वित्तीय नुकसान का खुलासा

    14 hours ago

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    हाथरस नगर पालिका में एक और वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जिलाधिकारी ने इस सिलसिले में शासन को रिपोर्ट भेजी है। यह मामला जैम पोर्टल से मानव श्रमापूर्ति की निविदा में हुई अनियमितता से जुड़ा है। अधिशासी अधिकारी ने जिलाधिकारी से इसकी जांच कराने का अनुरोध किया था। जांच में सामने आया कि मूल पत्रावली पर बिड अपलोड करने संबंधी कोई दस्तावेज नहीं मिले। इससे नियम और शर्तों के निर्धारण की स्थिति साफ नहीं हो पाई। चयनित फर्म के काम का दायरा और अन्य जरूरी जानकारी भी पत्रावली में नहीं थी। ईएमडी (अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट) जमा कराने के निर्देशों का पालन भी पत्रावली से साफ नहीं हो रहा है। सभी आपूर्तियां एक ही बिड के जरिए न लेकर सफाई कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए अलग-अलग बिड कराई गईं। यह जैम पोर्टल के नियमों के खिलाफ है। हर बिड के लिए कई निविदाएं मिलीं, लेकिन किसी की भी तकनीकी बिड नहीं खोली गई। सिंगल पैकेट बिड के जरिए एक ही खास फर्म को काम दे दिया गया और उसकी वित्तीय बिड खोल दी गई। वित्तीय हानि पहुंचाने की आशंका वित्तीय बिड भी अधिकतम लाभांश वाली थी। सिंगल बिड पर सभी कार्यवाही स्वीकार करके नगर पालिका को लगातार वित्तीय हानि पहुंचाने की आशंका है। सिंगल पैकेट बिड का इस्तेमाल सिर्फ इमरजेंसी में किया जा सकता है। यह भी सामने आया कि उस समय के जैमवायर ने इस पर आपत्ति जताई थी, लेकिन नगर पालिका स्तर पर इसका संज्ञान नहीं लिया गया। संयुक्त जांच समिति जिसमें (प्रभारी अधिकारी (द्वितीय), कलेक्ट्रेट, वरिष्ठ कोषाधिकारी और जिला सूचना अधिकारी) ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। रिपोर्ट में बताया गया कि निविदा प्रक्रिया में शासनादेश का उल्लंघन हुआ है, जिसमें कहा गया है कि आवश्यकता को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर खरीद नहीं की जाएगी। 9.57 प्रतिशत लाभांश दिया ईओ की रिपोर्ट के अनुसार, फर्म को इस काम में 9.57 प्रतिशत लाभांश दिया गया, जो भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा तय दरों से ज्यादा है। इस ज्यादा लाभांश से हाथरस नगर पालिका परिषद को वित्तीय हानि हुई है। माना जा रहा है कि जिलाधिकारी की रिपोर्ट के बाद शासन इस मामले में भी कोई बड़ा एक्शन ले सकता है।
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