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    हाथरस में दहेज हत्या में जेठ और ससुर को सजा:कोर्ट ने सात-सात साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई

    8 hours ago

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    हाथरस में एक न्यायालय ने दहेज हत्या के दो आरोपियों को सात-सात साल की कैद और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह मामला 2011 का है, जिसमें दहेज की मांग पूरी न होने पर एक महिला की हत्या कर दी गई थी। मामले की शुरुआत 13 मई 2011 को हुई, जब सुरेश चंद्र ने कोतवाली हाथरस गेट में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी किरन देवी की शादी 21 नवंबर 2007 को जितेंद्र निवासी गढ़ी गिरधर थाना हाथरस गेट के साथ हुई थी। शादी में सामर्थ्य अनुसार दान-दहेज दिया गया था। हालांकि, किरन के ससुराल वाले दिए गए दहेज से संतुष्ट नहीं थे। वे सोने की जंजीर, एक भैंस और पल्सर मोटरसाइकिल की मांग कर रहे थे। इन मांगों को लेकर वे किरन को लगातार परेशान करते थे, मारपीट करते थे और जान से मारने की धमकियां देते थे। किरन ने अपने पिता को बताया था कि उसे करंट लगाकर मारने की धमकी दी जाती थी और दहेज लाने का दबाव बनाया जाता था। सुरेश चंद्र ने बताया कि उन्होंने कई बार ससुराल वालों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे दहेज की मांग पर अड़े रहे। 12 मई को जब वह अपनी बेटी को लेने गए, तो ससुराल वालों ने उसे उनके साथ नहीं भेजा। उसी रात करीब 12 बजे उन्हें फोन पर सूचना मिली कि उनकी बेटी की हत्या कर दी गई है। किरन के दो छोटे बच्चे थे, जिनमें एक ढाई साल की बेटी और एक चौदह दिन का बेटा शामिल था। सूचना मिलने पर सुरेश चंद्र अपने रिश्तेदारों के साथ बागला अस्पताल पहुंचे, जहां किरन का शव रखा था। पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया, शव का पोस्टमार्टम कराया और विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। एडीजीसी त्रिलोकी शर्मा ने की पैरवी इस मामले की सुनवाई एडीजे कोर्ट संख्या दो की न्यायाधीश माधवी सिंह के न्यायालय में हुई। न्यायालय ने आरोपी जेठ बहादुर सिंह और ससुर प्रभुदयाल को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी त्रिलोकी शर्मा ने पैरवी की।
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