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    अलीगढ़ में रची थी पूर्व विधायक की हत्या की साजिश:चार साल पुराने चर्चित मामले में कोर्ट ने पूर्व चेयरमैन समेत 7 को सजा सुनाई

    2 hours ago

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    ​अलीगढ़ में रालोद नेता और पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ व उनके बेटे की हत्या की साजिश रचने के मामले में शनिवार को अदालत ने फैसला सुना दिया। एडीजे-11 पीके जयंत की अदालत ने खैर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष संजीव अग्रवाल उर्फ बिंटू सहित सात दोषियों को सजा सुनाई है। 4 साल पुराने इस चर्चित मामले में कोर्ट ने पूर्व चेयरमैन को 8 माह और शूटरों को 5-5 साल की जेल की सजा दी है। हालांकि इस मामले में न्यायालय ने 27 मार्च को ही दोष सिद्ध करते हुए हिरासत में ले लिया था। सरकारी जमीन से हटवाया था कब्जा ​अभियोजन पक्ष के अनुसार पूर्व विधायक प्रमोद गौड़ ने खैर के तत्कालीन चेयरमैन संजीव अग्रवाल के खिलाफ सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत शासन में की थी। जांच के बाद वह कब्जा हटवा दिया गया था। इसी रंजिश में संजीव अग्रवाल और उनके ठेकेदार साथी विकास शर्मा ने मिलकर अपने पुराने अपराधी दोस्त राजकुमार को विधायक की हत्या की सुपारी दी थी। ​पुरानी गलती का भी हुआ खुलासा ​पुलिस जांच में यह भी सामने आया था कि इन आरोपियों ने पहले भी प्रमोद गौड़ की हत्या की साजिश रची थी। हालांकि उस दौरान बदमाशों ने भूलवश प्रमोद गौड़ की जगह उनके करीबी विजय गंगल की हत्या कर दी थी। 27 अगस्त 2022 को प्रमोद गौड़ द्वारा खुद को धमकी मिलने की रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस ने इस पूरी साजिश का पर्दाफाश किया। ​पूर्व चेयरमैन–ठेकेदार को 8-8 माह की सजा ​अदालत ने साक्ष्यों और गवाही के आधार पर सात लोगों को अलग-अलग धाराओं में दंडित किया है। ​पूर्व चेयरमैन संजीव अग्रवाल उर्फ बिंटू और ठेकेदार विकास शर्मा उर्फ बॉबी को धमकी के आरोप में दोषी पाते हुए 8-8 माह की सजा और 2-2 हजार रुपए अर्थदंड सुनाया गया। ​शूटरों को सुनाई 5–5 साल की सजा शूटर रिंकू, आदेश और तरुण त्यागी को आर्म्स एक्ट में दोषी करार देते हुए 5-5 साल की कड़ी सजा और 5-5 हजार रुपए जुर्माने की सजा दी गई। इसके अलावा अन्य सहयोगी राजकुमार जाट और सागर को 2-2 वर्ष की सजा और 2-2 हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया गया। ​कोर्ट के फैसले के बाद जेल भेजे गए दोषी फैसला आने के बाद सभी दोषियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। हालांकि जिन दोषियों को कम सजा मिली थी, उनके जमानत बॉन्ड भी कोर्ट में भरवाए गए। फैसला देरी से आने के कारण देर रात तक उनकी रिहाई की प्रक्रिया को लेकर इंतजार बना रहा। इस मामले में तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया है।
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