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    हनी ट्रैप, ब्लैकमेलिंग गंभीर मामला, समाज के लिए खतरनाक:हाईकोर्ट ने कहा-पुरुषों का जीना मुश्किल होगा, पुलिस कड़ा एक्शन ले

    3 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हनी ट्रैप, महिलाओं का इस्तेमाल कर सेक्स स्कैंडल में फंसाने और ब्लैकमेलिंग करने के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने ऐसे गिरोंहों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, समाज के लिए बहुत खतरनाक है। इसे रोका न गया तो सभ्य समाज में जीना मुश्किल हो जाएगा। इलाहाबाद उच्च न्यायालय सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस को उन गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है जो महिलाओं का इस्तेमाल करके पुरुषों को हनीट्रैप में फंसाकर उनसे पैसे वसूलते हैं। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे मामले समाज में व्याप्त गंभीर स्थिति को उजागर करते हैं। बेहद गंभीर मामला है हाईकोर्ट ने उन लोगों, जिनमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं के खिलाफ हनीट्रैप का आरोप लगाते हुए जबरन वसूली के मामले को रद्द करने की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा "यह एक बेहद गंभीर मामला है।" कोर्ट ने कहा मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक इस इस मामले की गहन जांच करानी चाहिए। कोर्ट ने कहेा कि सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय ऐसे गिरोहों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और कड़ा एक्शन लेना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क रहने और कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है। सभ्य दुनिया में जीना मुश्किल हो जाएगा कोर्ट ने कहा कि पुलिस को देखना होगा कि यदि इस प्रकार का कोई गिरोह सक्रिय है, या अन्य गिरोह भी सक्रिय हैं, जो महिलाओं का इस्तेमाल करके निर्दोष लोगों को ब्लैकमेल कर रहे हैं या किसी अन्य तरीके से ऐसा ही कर रहे हैं, तो कड़ी निगरानी रखें। यदि इस प्रकार के अपराध जारी रहने दिए गए, तो एक सभ्य दुनिया में जीना मुश्किल हो जाएगा," न्यायालय ने कहा। बिजनौर में दर्ज केस पर कोर्ट सख्त बिजनौर पुलिस द्वारा दर्ज मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि बिजनौर के एक होटल में एक महिला के साथ यौन संबंध बनाने के बाद, आरोपी ने उसे ब्लैकमेल किया। पुलिस के अनुसार, महिला ने कुछ वीडियो क्लिप रिकॉर्ड किए थे। उसने बताया कि आरोपी ने मामले को निपटाने के लिए 8-10 लाख रुपये की मांग की। हालांकि, शिकायतकर्ता ने पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई। इसके बाद आरोपी ने एफआईआर रद्द करने के लिए न्यायालय में याचिका दायर की। हालांकि, न्यायालय ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस ले ली। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा, "यह याचिका वापस ले ली गई मानकर खारिज की जाती है, लेकिन ऊपर दिए गए निर्देशों के बिना नहीं।" न्यायालय ने निर्देश दिया कि इस आदेश की सूचना पुलिस महानिदेशक, मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक और उत्तर प्रदेश सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), लखनऊ को दी जाए। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शशांक द्विवेदी ने बात रखी जबकि राज्य की ओर से अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता शशि शेखर तिवारी उपस्थित हुए।
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