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    हाइपोथायरॉयड में बैद्यनाथ का आयुर्वेदिक इलाज:सूजन-थकान और पाचन सुधारने में बैद्यथायरो मददगार, लाइफस्टाइल बदलने से बढ़ रहीं दिक्कतें

    2 hours ago

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    आजकल बदलती लाइफस्टाइल, गलत खान-पान और बढ़ते तनाव के कारण थायरॉयड की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें हाइपोथायरॉयडिज्म आम है। इस स्थिति में थायरॉयड ग्रंथि कम हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर की रफ्तार धीमी हो जाती है। इसके कारण थकान, वजन बढ़ना और ज्यादा ठंड लगने जैसी समस्याएं होती हैं। इन बढ़ती समस्याओं को देखते हुए बैद्यनाथ ने आयुर्वेदिक रिसर्च और इनोवेशन पर काम किया है। इसी दिशा में कंपनी ने ‘बैद्यथायरो टैबलेट’ को एक विकल्प के रूप में पेश किया है, जो हाइपोथायरॉयड के लक्षणों के प्रबंधन पर फोकस करती है। बैद्यथायरो टैबलेट बेहद असरदार इस आयुर्वेदिक टैबलेट में कंचनार गुग्गुलु, पुनर्नवा, वरुण, मोरिंगा (शिग्रु), पलाश, निर्गुण्डी, मंडूकपर्णी और त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली) जैसी जड़ी-बूटियां शामिल हैं। आयुर्वेद के अनुसार ये तत्व कफ और वात को संतुलित करने, सूजन कम करने और पाचन सुधारने में मददगार माने जाते हैं। आयुर्वेद में थायरॉयड जैसी समस्याओं को कफ-वात असंतुलन और ग्रंथि की सूजन से जोड़ा जाता है। शास्त्रों में कंचनार गुग्गुलु जैसे योगों का उल्लेख ऐसे लक्षणों के प्रबंधन के लिए किया गया है। इसमें मौजूद पुनर्नवा और वरुण को सूजन कम करने और ग्रंथि के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। वहीं मोरिंगा और पलाश पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। निर्गुण्डी और मंडूकपर्णी को थकान और शरीर दर्द कम करने में लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक पाचन शक्ति यानी ‘अग्नि’ को सेहत की नींव माना गया है। इसी वजह से इसमें त्रिकटु शामिल किया गया है, जो पाचन सुधारने के साथ दवा के असर को बेहतर बनाने में मदद करता है। ‘बैद्यथायरो टैबलेट’ का निर्माण आयुष के दिशा-निर्देशों के अनुसार किया गया है। इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। कुल मिलाकर, यह आयुर्वेदिक उत्पाद थायरॉयड से जुड़े लक्षण—जैसे थकान, सूजन, शरीर दर्द और बेचैनी—के प्रबंधन में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
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