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    ग्रीन कॉरिडोर और फ्लाईओवर से बदलेगी लखनऊ की तस्वीर:विधायक नीरज बोरा बोल- सड़क, सीवर-ट्रैफिक सुधार में हुआ बड़ा काम

    5 hours ago

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    मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि इन 9 वर्षों में मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जितने भी बड़े कामों के लिए कहा, उन सभी को स्वीकृति मिली। फिलहाल मेरी नजर में कोई बड़ा काम बाकी नहीं है। यह कहना है लखनऊ उत्तर (नार्थ) विधानसभा के विधायक नीरज बोरा का। दैनिक भास्कर ने विधायक नीरज बोरा से खास बातचीत की। इस दौरान उनसे पूछा गया कि 9 वर्षों में जमीनी स्तर पर कितना विकास हुआ? एसआईआर को लेकर क्या तैयारी रही? आगामी चुनाव को लेकर उनकी क्या रणनीति है? पढ़िए विधायक नीरज बोरा से बातचीत के कुछ अंश… सवाल: पिछले 9 साल के अपने कार्यकाल को आप 10 में से कितने नंबर देंगे? जवाब: मैं लखनऊ नॉर्थ विधानसभा के मतदाताओं का आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने मुझे 2017 और 2022 में सेवा का मौका दिया। 2017 से पहले यह क्षेत्र पूरी तरह से उपेक्षित था। यहां घनी आबादी और कई अनियोजित कॉलोनियां हैं, जहां सड़क, सीवर और जलभराव जैसी मूलभूत समस्याएं थीं। हमने बड़े पैमाने पर कच्चे क्षेत्रों को पक्का करने का काम किया। फैजुल्लागंज का उदाहरण लें तो वहां 9 किलोमीटर लंबा नाला बनवाया गया। इससे पहले वहां जलभराव से हाहाकार मच जाता था। बीमारियां फैलती थीं, लेकिन अब जल निकासी की समस्या काफी हद तक हल हो गई है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम हुआ है। दाउदनगर में 50 बेड का अस्पताल अगले 2-3 महीनों में जनता को समर्पित कर दिया जाएगा। अमृत योजना के तहत सीवर लाइनें बिछाई गई हैं और पुराने लखनऊ को फैजुल्लागंज से जोड़ने के लिए पक्का पुल (जो पहले पीपे का पुल था) निर्माणाधीन है। सवाल: आपके पूरे कार्यकाल में आपका सबसे बड़ा और ऐतिहासिक काम क्या रहा है? जवाब: लखनऊ महानगर में ट्रैफिक एक बहुत बड़ी समस्या रही है। बढ़ते दबाव को देखते हुए मैंने मुख्यमंत्री जी से IIM रोड से लेकर इकाना स्टेडियम तक ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने इसे तुरंत संज्ञान में लिया और अब यह योजना जमीन पर उतर चुकी है। इसके दो चरणों का उद्घाटन हो चुका है। आवाजाही शुरू हो गई है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीसरे और चौथे चरण का शिलान्यास कर दिया है। यह फोर-लेन ग्रीन कॉरिडोर पूरे लखनऊ के लिए एक ‘लाइफलाइन’ साबित होगा। अंग्रेजों के जमाने के पुराने लाल पुल (हार्डिंग ब्रिज) के बगल में एक नया फोर-लेन ब्रिज बन रहा है, जो अगले छह महीनों में शुरू हो जाएगा। IIM रोड और टेढ़ी पुलिया पर फ्लाईओवर बन चुके हैं। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर जाम से निजात दिलाने के लिए एक नया फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो आप इन 9 सालों में नहीं कर पाए? जवाब: मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मैंने मुख्यमंत्री से जितने भी बड़े कामों के लिए कहा वो सब पास हुए। मेरी नजर में कोई भी बड़ा काम बाकी नहीं है। जानकीपुरम में जलभराव की बड़ी समस्या थी, जिसे हमने बड़े पंप हाउस लगवाकर पूरी तरह सुलझा लिया है। गली-मोहल्ले की सड़कें और नालियों का निर्माण एक सतत प्रक्रिया है, जो हमेशा चलती रहती है। सवाल: एआई सिटी और आईटी सिटी बनाने का सपना कब तक पूरा होगा? जवाब: केंद्र सरकार और वित्त मंत्री ने लखनऊ को एआई हब बनाने की घोषणा की है। IT सिटी का काम सुल्तानपुर रोड और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के आसपास शुरू हो चुका है। AI और IT सिटी बनने से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आएगी। इससे लखनऊ और आसपास के जनपदों के उन युवाओं को यहीं रोजगार मिलेगा, जो अब तक काम की तलाश में बाहर जाते थे। सवाल: आपके क्षेत्र में मेट्रो कब तक आएगी? जवाब: पहले चरण की मेट्रो का लाभ हमारे क्षेत्र को लखनऊ विश्वविद्यालय स्टेशन के माध्यम से मिल रहा है। दूसरे चरण में आने वाली मेट्रो में चौक, ठाकुरगंज और एरा मेडिकल कॉलेज हमारे क्षेत्र में आएंगे। पुराने लखनऊ के लिए यह एक बहुत बड़ी सौगात होगी। चारबाग से चौक तक मेट्रो अंडरग्राउंड होगी, जबकि ठाकुरगंज से वसंत कुंज तक इसे एलिवेटेड बनाया जाएगा। सवाल: आगामी चुनावों को लेकर आपकी क्या तैयारी है ? जवाब: मैं अभी सिर्फ काम कर रहा हूं। 'जनता ही जनार्दन' है। अगर जनता की इच्छा होगी और उन्हें लगेगा कि मैंने उनके लिए काम किया है, तो मैं दोबारा प्रयास करूंगा। पार्टी भी यह मानकर चलती है कि हम अच्छा काम कर रहे हैं। हमारे शीर्ष नेतृत्व को भी पता है कि लखनऊ उत्तर विधानसभा में विकास के अच्छे काम हुए हैं। सवाल: SIR को लेकर काफी चर्चा रही, चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा? जवाब: पिछले तीन दशकों में आसपास के जिलों (सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर, रायबरेली आदि) के लोग आकर लखनऊ में बस गए। मेरी विधानसभा जिले के बाहरी छोर पर है, इसलिए यहां ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा थी। दशकों से सूची अपडेट नहीं हुई थी। कई लोग ऐसे थे जो दिवंगत हो चुके थे, लेकिन उनके नाम नहीं कटे थे। कई लोगों के नाम 2-3 जगहों (गांव में भी और लखनऊ में भी) दर्ज थे। चुनाव आयोग के कड़े नियमों के बाद, लोगों को किसी एक जगह का चुनाव करना था। कुछ ने गांव को चुना, कुछ ने शहर को। इसलिए नाम कटे जरूर हैं, लेकिन जो नए लोग यहां आकर स्थाई रूप से बसे हैं, उन्होंने बड़ी संख्या में नए वोटर के रूप में अपना नाम जुड़वाया भी है। ……………………
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