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    गोरखपुर में निकाली गई जागरूकता राइड:सिटी हॉस्पिटल की CSR की पहल, विशेष बच्चों को ₹1.27 लाख की सहायता

    2 hours ago

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    गोरखपुर में जागरूकता राइड निकालकर लोगों को ऑटिज़्म के प्रति जागरूक किया गया। वर्ल्ड ऑटिज़्म अवेयरनेस डे के अवसर पर सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने “राइड फॉर ऑटिज़्म” कार्यक्रम आयोजित किया। इसके साथ ही विशेष बच्चों की मदद के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत बीआरडी मेडिकल कॉलेज के भूतपूर्व बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. भूपेंद्र शर्मा ने फ्लैग ऑफ कर की। उन्होंने कहा कि ऑटिज़्म एक ऐसी स्थिति है, जिसे समय पर पहचानना बेहद जरूरी है। सही देखभाल और मार्गदर्शन से ऐसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। सिटी हॉस्पिटल से प्रोविडेंस होम तक निकली राइड फ्लैग ऑफ के बाद प्रतिभागियों ने दो पहिया वाहनों से सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल से प्रोविडेंस होम तक अनुशासित राइड निकाली। राइड के दौरान प्रतिभागियों ने रास्ते में आम लोगों को ऑटिज़्म के बारे में जानकारी दी और जागरूकता का संदेश फैलाया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में ऑटिज़्म को लेकर जागरूकता बढ़ाना और विशेष बच्चों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना रहा। इस पहल के जरिए यह संदेश दिया गया कि ऐसे बच्चों को समाज में बराबरी का अवसर और सहयोग मिलना चाहिए। डॉक्टरों, स्टाफ और प्रबंधन की सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में अस्पताल के डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल स्टाफ और प्रबंधन टीम ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रमुख रूप से डॉ. ए. के. मल्ल, डॉ. शिल्पा मल्ल, डॉ. विमलेश पासवान, डॉ. रितेश कुमार सिंह, डॉ. रविकेश द्विवेदी, डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. विकास नारायण सिंह, डॉ. सौरभ श्रीवास्तव, डॉ. एस्सार खान, डॉ. जाहिरा खान, डॉ. वत्सल भूषण गुप्ता, मेजर डॉ. एम. क्यू. बैग सहित अन्य डॉक्टर और डीएनबी रेजिडेंट्स मौजूद रहे। CSR पहल के अंतर्गत हॉस्पिटल द्वारा प्रोविडेंस होम, गोरखपुर में रह रहे ऑटिज़्म एवं दिव्यांग बच्चों के लिए ₹1,27,080 की धनराशि प्रदान की गई। यह सहायता बच्चों की देखभाल, शिक्षा और पुनर्वास कार्यों में उपयोग की जाएगी। डॉक्टरों ने रखे अपने विचार डॉ. ए. के. मल्ल ने कहा कि यह पहल समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की दिशा में एक सार्थक कदम है और आगे भी ऐसे सामाजिक कार्य जारी रहेंगे, जबकि डॉ. विमलेश पासवान ने इसे शुरुआत बताते हुए कहा कि भविष्य में और भी कार्यक्रमों के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जाएगा। डॉ. रविकेश द्विवेदी ने कहा कि ऑटिज़्म को समझना और समय पर पहचान करना बेहद जरूरी है, जिससे बच्चों को बेहतर जीवन मिल सकता है। डॉ. शिल्पा मल्ल ने विशेष बच्चों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को बेहतर समाज की पहचान बताया। वहीं डॉ. अलका त्रिपाठी ने कहा कि समय पर हस्तक्षेप और सही मार्गदर्शन से ऑटिज़्म से प्रभावित बच्चों के जीवन में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है। जागरूकता फैलाने का लिया संकल्प कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने समाज में ऑटिज़्म को लेकर जागरूकता बढ़ाने और भविष्य में भी ऐसे प्रयास लगातार जारी रखने का संकल्प लिया।
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