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    गोरखपुर में निजीकरण के विरोध में आंदोलन तेज:गर्मी में बिजली व्यवस्था हो सकती है प्रभावित, कर्मचारियों ने दी आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

    2 hours ago

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    गोरखपुर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा है कि पावर कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन की नाकामी के कारण प्रदेश की बिजली व्यवस्था गर्मियों में बिगड़ती जा रही है। समिति का कहना है कि आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं की दिक्कतें और बढ़ सकती हैं और इसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार होगा। निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के विरोध में चल रहे आंदोलन के तहत बागपत और गाजियाबाद में विरोध सभाएं हुईं। इनमें केंद्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह गुर्जर, मोहम्मद वसीम और निखिल कुमार मौजूद रहे और कर्मचारियों की समस्याओं को उठाया। कर्मचारियों की कमी से संचालन प्रभावित समिति के अनुसार संविदा कर्मियों की छंटनी, नियमित कर्मचारियों के असंगठित तबादले और स्वीकृत पदों में कटौती से व्यवस्था कमजोर हुई है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के बाद काम के बंटवारे में किए गए बदलावों से उपभोक्ताओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है और कामकाज सुचारु नहीं चल पा रहा है। समिति ने आरोप लगाया कि अनुभवी कर्मचारियों की जगह आउटसोर्सिंग के माध्यम से कम अनुभव वाले कर्मियों से काम लिया जा रहा है। ऐसे में बढ़ती मांग के बीच ट्रांसफॉर्मर, सब-स्टेशन और स्विचगियर पर लोड संभालना मुश्किल हो रहा है। साथ ही प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था भी गड़बड़ हो गई है, जिससे उपभोक्ताओं को गलत बिल और कनेक्शन बहाली में दिक्कत आ रही है। उत्पीड़न के खिलाफ जारी विरोध संघर्ष समिति का कहना है कि कर्मचारियों को उत्पीड़न के खिलाफ सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। 19 मार्च 2023 को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई बंद नहीं हुई, बल्कि और बढ़ गई है। उपभोक्ताओं और किसानों को प्राथमिकता समिति ने कहा कि आंदोलन के बावजूद बिजली कर्मी उपभोक्ताओं और किसानों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देते रहेंगे। हालांकि प्रबंधन की अव्यवस्था का असर आम जनता पर पड़ रहा है और सभी वर्ग इससे परेशान हैं। संघर्ष समिति ने साफ किया कि जब तक निजीकरण का फैसला वापस नहीं लिया जाता और उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बंद नहीं होती, तब तक बिजली कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा।
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