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    गोरखपुर में इस्लामी बहनों के लिए दर्स-ए-कुरआन शुरू:शहर काजी ने बताया- कुरआन हर पहलू में देता है जीवन का मार्गदर्शन

    2 hours ago

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    गोरखपुर के नौरंगाबाद गोरखनाथ स्थित जामिया अल इस्लाह एकेडमी में रविवार से इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन की शुरुआत की गई। यह दर्स प्रत्येक रविवार को दोपहर साढ़े तीन बजे आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में तुर्कमानपुर स्थित मकतब इस्लामियात में भी कुरआन-ए-पाक की शिक्षा दी गई। कार्यक्रम में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने वाली हफ्सा अली और सदफ फातिमा को सम्मानित किया गया। आयतों को समझकर जीवन में उतारने पर जोर दर्स की शुरुआत करते हुए शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि दर्स-ए-कुरआन केवल पढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि आयतों के सही अर्थ को समझकर उन्हें जीवन में उतारना इसका मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि कुरआन-ए-पाक इंसान की पूरी जिंदगी के लिए मार्गदर्शन देने वाली आखिरी किताब है, जो सही और गलत की पहचान कराती है और इंसान के चरित्र को बेहतर बनाती है। भाषा की बाधा दूर करने की पहल उन्होंने बताया कि दर्स का उद्देश्य ऐसे लोगों तक भी कुरआन का संदेश पहुंचाना है, जो अरबी नहीं जानते। इसके लिए उर्दू और हिंदी में आसान तरीके से शिक्षा दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें और समझ सकें। ईमान, न्याय और बराबरी का संदेश दर्स संचालक हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि कुरआन-ए-पाक इंसान को ईमान, नैतिकता, न्याय और समानता का रास्ता दिखाता है। यह शिक्षा केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे समझकर अपने व्यवहार और जीवन में लागू करने के लिए है। नमाज, जकात और जिम्मेदारी की जानकारी संयोजक कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी और आसिफ महमूद ने बताया कि दर्स के माध्यम से नमाज, जकात, तौहीद और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी दी जाती है। इसमें कुरआन की आयतों को व्याख्या के साथ समझाया जाता है, जिससे व्यक्तिगत जीवन, परिवार और समाज से जुड़े मामलों में सही मार्गदर्शन मिल सके। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सहभागिता कार्यक्रम के अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर देश में अमन और शांति की दुआ की गई। दर्स में शीरीन आसिफ, आयशा खातून, सैयदा यासमीन, नाजिया खातून, शिफा खातून, सना फातिमा, फिजा खातून, आस्मा खातून, नूरजहां, सानिया, अदीबा, गुलफिशा सहित बड़ी संख्या में इस्लामी बहनों ने भाग लिया।
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