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    एटा में 40 स्वयं सहायता समूहों को मशीनें मिलेंगी:PMFME योजना से खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को मिलेगा बढ़ावा

    9 hours ago

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    एटा जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) को तेजी से लागू किया जा रहा है। इसी क्रम में, उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) कार्यालय ने सभी खंड विकास अधिकारियों को स्वयं सहायता समूहों को योजना से जोड़ने और उन्हें मशीनें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार, जनपद के विभिन्न विकास खंडों—अलीगंज, अवागढ़, जलेसर, मारहरा, निधौली कला, सकीट और शीतलपुर सहित अन्य क्षेत्रों—से सक्रिय स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाएगा। विशेष रूप से महिलाओं के 5-5 समूहों को खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के तहत चयनित समूहों को मसाला ग्राइंडर, आटा चक्की, दाल मिल और तेल घानी जैसी विभिन्न मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे वे स्वरोजगार स्थापित कर सकेंगे। पत्र के अनुसार, प्रत्येक विकास खंड को लक्ष्य दिया गया है और कुल 40 स्वयं सहायता समूहों को इस योजना से लाभान्वित करने की तैयारी है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे एक सप्ताह के भीतर पात्र समूहों की पहचान करें, उन्हें योजना की जानकारी दें और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी कराएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ समय पर लाभार्थियों तक पहुँच सके। PMFME योजना नए और पहले से संचालित सूक्ष्म खाद्य उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसमें अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध होता है, जिसमें लाभार्थी को 10 से 40 प्रतिशत तक स्वयं का अंशदान करना होता है। इसके अतिरिक्त, 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी (अधिकतम 10 लाख रुपये) भी दी जाती है। इस वित्तीय सहायता से छोटे उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को अपने व्यवसाय को शुरू करने या विस्तार देने में मदद मिलती है। योजना के अंतर्गत बेकरी, मसाला उद्योग, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, पापड़, अचार, शहद, फास्ट फूड, नूडल्स, खाद्य पैकेजिंग, दाल मिल, सब्जी प्रसंस्करण, सॉस-चटनी और मिठाई सहित लगभग 30 प्रकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को शामिल किया गया है। यह पहल स्थानीय स्तर पर उत्पादों के निर्माण और विपणन को आसान बनाएगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक समूहों को आधार कार्ड, पैन कार्ड और 6 माह का बैंक स्टेटमेंट जैसे आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। राशन कार्ड या बिजली बिल, निवास प्रमाण पत्र, शैक्षिक योग्यता प्रमाण पत्र और मशीनों का कोटेशन जैसे दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से जनपद में न केवल स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और पलायन पर भी रोक लग सकेगी।
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