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    DDU में 'फोटो सिंथेसिस लैब' की शुरुआत:अत्याधुनिक मशीनें लगीं, पौधों और खेती पर रिसर्च करना होगा आसान

    2 hours ago

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    दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के बॉटनी विभाग में सोमवार को 'फोटो सिंथेसिस लैब' का उद्घाटन कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने किया। इस मौके पर उनके साथ उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के डिप्टी डायरेक्टर जनरल प्रोफेसर राजर्षि गौर भी मौजूद रहे। यह नई लैब लखनऊ स्थित 'उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद' (UPCAR) की ओर से मिली के वित्तीय सहायता से बनाई गई है। इसमें कई महंगी और आधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। जिनमें 'मिनी-पीएएम फ्लोरोमीटर' है जो पौधों के क्लोरोफिल की जांच करता है। साथ ही 'स्पेक्ट्रोफोटोमीटर' से केमिकल स्टडी होगी और 'मृदा विश्लेषक' मशीन से मिट्टी की सेहत जांची जाएगी। इनके अलावा पीएच मीटर, ईसी मीटर और एनडीवीआई मीटर जैसी कई एडवांस मशीनें भी यहां मौजूद हैं, जिनसे रिसर्च का काम हाई-लेवल पर हो पाएगा। खेती और पर्यावरण के लिए बड़ी बात इस दौरान कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि खेती और पर्यावरण से जुड़ी आज की समस्याओं को सुलझाने के लिए ऐसी आधुनिक लैब बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस हाई-टेक लैब के आने से विभाग में रिसर्च के काम को एक नई मजबूती मिलेगी। डॉ. रामवंत गुप्ता का रहा बड़ा योगदान इस खास लैब को बनाने और इसे तैयार करने में वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामवंत गुप्ता की मेहनत और लीडरशिप का सबसे बड़ा रोल रहा है। क्लाइमेट चेंज और फसलों पर होगा काम यह लैब मुख्य रूप से प्रकाश संश्लेषण (फोटो सिंथेसिस) और पर्यावरण के तनाव से पौधों पर पड़ने वाले असर पर रिसर्च करने के लिए बनाई गई है। यहाँ इस बात पर रिसर्च होगा कि कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने या घटने का पौधों पर क्या असर पड़ता है। आज की दुनिया में बदलते मौसम और खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए यह रिसर्च बहुत काम आएगी। छात्रों और शोधकर्ताओं को मिलेगा बड़ा प्लेटफॉर्म यह लैब छात्रों और रिसर्च करने वालों को एक ऐसा मंच देगी जहां वे सीख पाएंगे कि फसलों की पैदावार कैसे बढ़ाएं और बदलते मौसम के हिसाब से खेती को कैसे बेहतर करें। यह कोशिश दुनिया भर के उन लक्ष्यों से जुड़ी है जिसमें भूख मिटाना और लोगों की सेहत सुधारना शामिल है। ये लोग भी रहे मौजूद इस कार्यक्रम में साइंस फैकल्टी के डीन प्रोफेसर अजय सिंह, विभाग के हेड प्रोफेसर अनिल कुमार द्विवेदी, प्रोफेसर राजवंत राव, प्रोफेसर दिनेश यादव, प्रोफेसर शरद मिश्रा, प्रोफेसर पूजा सिंह और कई अन्य शिक्षक और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए।
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