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    डॉक्टर नहीं मिलीं, छात्रा का मेडिकल आज:प्रयागराज के न्यूरोसर्जन पर छेड़छाड़ केस में पुलिस भी दर्ज कर सकती है पीड़िता का बयान

    2 hours ago

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    प्रयागराज में न्यूरोसर्जन डॉ. कार्तिकेय शर्मा पर छेड़छाड़ का केस दर्ज कराने वाली छात्रा का मेडिकल बृहस्पतिवार को नहीं हो सका। जब तक उसका नंबर आया, डॉक्टर का ड्यूटी टाइम ओवर हो चुका था। ऐसे में मेडिकल चेकअप नहीं हो पाया। अब शुक्रवार को मेडिकल कराया जाएगा। इसी दिन पुलिस भी उसका बयान दर्ज कर सकती है। एफआईआर होने के बाद पुलिस फिर पहुंची मौके पर इससे पहले पूर्वाह्न 11.51 मिनट पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर दर्ज करने के बाद पुलिस ने उसे मेडिकल के लिए भेजा। सूत्रों का कहना है कि रात में घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहले डायल 112 के दोपहिया वाहन पर दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। घटना की जानकारी के बाद उन्होंने सूचना दी तो चौकी प्रभारी थार्नहिल मौके पर पहुंचे और जांच पड़ताल के बाद पीड़िता को थाने लाया गया। यहां महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में उससे पूछताछ हुई, जिस पर उसने विस्तार से घटना के बारे में बताया। सुबह उसने तहरीर दी जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। इसके बाद थाना पुलिस डॉक्टर के क्लाइव रोड स्थित आवास पर पहुंची। चैम्बर का निरीक्षण, डॉक्टर से पूछताछ यहां डॉक्टर से पूछताछ की गई। उस चैम्बर का भी निरीक्षण किया गया, जहां घटना का होना बताया गया। इस दौरान पता चला कि चैम्बर में कैमरा नहीं लगा हुआ है। कैमरे चैम्बर के बाहर लगे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक, डॉक्टर ने पूछताछ में बताया कि मरीजों की गोपनीयता भंग न हो, इसके लिए चैम्बर में कैमरा नहीं लगवाया गया है। डॉक्टर से जब पूछा गया कि क्या कोई महिला स्टाफ उस वक्त भीतर मौजूद थी, तो उन्होंने कहा कि उनकी महिला स्टाफ शन्नो ड्यूटी पर थी और वह चैम्बर के दरवाजे पर ही रहती है। घटना के दौरान कुछ देर के लिए ही वह एक मरीज को इंजेक्शन लगाने चली गई थी लेकिन इसमें बमुश्किल तीन मिनट का समय लगा। इसके बाद पुलिस वापस लौट आई। अब आगे की कार्रवाई शुक्रवार को एक बार फिर छात्रा को मेडिकल के लिए ले जाया जाएगा। इसी दिन छात्रा का बीएनएस की धारा 180 के तहत बयान दर्ज किया जा सकता है। दरअसल यह धारा पुलिस को किसी अपराध की दशा में पीड़ित से पूछताछ की अनुमति का प्रावधान करती है। अगर पीड़त महिला हो और मामला यौन अपराध से संबंधित हो तो यह बयान महिला पुलिसकर्मी दर्ज करेगी। इसके बाद पीड़िता का मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान कराया जाएगा। मरीजों-स्टाफ के भी दर्ज होंगे बयान पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मामले में घटना के दौरान मौजूद ड्यूटी स्टाफ और मरीजों व तीमारदारों का भी बयान दर्ज किया जा सकता है। दरअसल छात्रा ने तहरीर में बताया है कि जब वह चैम्बर में गई तो बहुत से मरीज थे जिन्हें डॉक्टर ने बाहर निकाल दिया। ऐसे में उसके इस बयान की पुष्टि के लिए संबंधित मरीजों, उनके तीमारदारों से भी पूछताछ की जा सकती है। इसके अलावा चैम्बर के बाहर व परिसर में लगे कैमरों के फुटेज भी खंगाले जाएंगे ताकि घटनाक्रम के संबंध में दिए गए पीड़िता के बयान को लेकर भी जांच पुख्ता ढंग से आगे बढ़ाई जा सके।
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