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    CSJMU का 'ग्लोबल कॉन्क्लेव':एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग से बदलेंगे भविष्य के विज्ञान के रास्ते, एक्सपर्ट्स ने कानपुर में मिलाया हाथ

    2 hours ago

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    विज्ञान और तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और कानपुर का छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) अब इस बदलाव का केंद्र बन रहा है। विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (ARAEISTPCFO-2026) में दुनिया भर के वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का जमावड़ा लगा। इस दौरान चर्चा का मुख्य केंद्र रहा'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग'। IIT और विदेशी यूनिवर्सिटीज के एक्सपर्ट्स ने दी तकनीक की 'क्लास' सम्मेलन में आईआईटी इंदौर, बॉम्बे, कानपुर से लेकर अमेरिका और स्वीडन तक के विश्वविद्यालयों के दिग्गज वैज्ञानिक शामिल हुए। वक्ताओं ने नैनो-प्रौद्योगिकी, सतत ऊर्जा और पर्यावरणीय चुनौतियों पर मंथन किया। सम्मेलन में सबसे ज्यादा चर्चा 'साइबर-फिजिकल सिस्टम्स' और 'एआई संचालित आर्किटेक्चर' की रही। विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में जल शुद्धिकरण से लेकर जटिल वैज्ञानिक रिसर्च तक, एआई और मशीन लर्निंग की भूमिका सबसे अहम होगी। किताबी ज्ञान से परे, रिसर्च पर जोर सम्मेलन सिर्फ चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवा शोधार्थियों के लिए एक बड़े मंच की तरह साबित हुआ। दिन भर चली 'ओरल' और 'पोस्टर प्रेजेंटेशन' सत्रों में छात्रों ने अपने शोध कार्य पेश किए। इनमें उन्नत सामग्रियों और नैनो-तकनीक पर आधारित नवाचारों ने सबका ध्यान खींचा। श्रेष्ठ शोध कार्यों के लिए संध्या सोनी, अर्श रहमान और प्रमोद कुमार को सम्मानित भी किया गया। एआई है जरूरी, पर शिक्षक का स्थान कोई नहीं ले सकता समापन सत्र के दौरान शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर एक महत्वपूर्ण बहस छिड़ी। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई शिक्षण को प्रभावी तो बना सकता है, लेकिन एक शिक्षक की प्रेरणा का कोई विकल्प नहीं है। तकनीक के दौर में भी एक शिक्षक का उद्देश्य छात्रों के लिए 'प्रेरणा स्रोत' बनना ही होना चाहिए। भविष्य की राह, सहयोग से बढ़ेगा नवाचार DRDO के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन ने सीएसजेएमयू और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के बीच भविष्य में बड़े शोध कार्यों के लिए एक मजबूत नींव रखी है। डॉ. अंजु दीक्षित ने बताया कि इस तरह के आयोजन से न केवल ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ा है, बल्कि विश्वविद्यालय के शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर काम करने का नया दृष्टिकोण मिला है। आने वाले समय में ये नवाचार न केवल विज्ञान बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव लाएंगे।
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