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    चैत्र नवरात्रि चतुर्थी : माँ कूष्मांडा का अलौकिक श्रृंगार:माँ कल्याणी से कल्याण की कामना के साथ उमड़ा आस्था का जन सैलाब

    3 hours ago

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    चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन प्रयागराज के प्राचीन शक्तिपीठ माँ कल्याणी देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। नवरात्रि की चतुर्थी तिथि पर आदि शक्ति के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्मांडा की विशेष पूजा-अर्चना की गई। भोर 4 बजे मंगला आरती के साथ ही मंदिर के कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खोल दिए गए। आज माँ कल्याणी का श्रृंगार माँ कूष्मांडा के स्वरूप में किया गया। अष्टभुजाधारी देवी की प्रतिमा को गेंदा, गुलाब और बेला जैसे सुगंधित फूलों से सजाया गया। भक्तों ने माता के हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल और अमृत कलश से सुसज्जित रूप के दर्शन किए। पौराणिक मान्यता है कि माँ कूष्मांडा की मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की रचना हुई थी, इसलिए इस दिन के दर्शन का विशेष महत्व है। माँ कल्याणी देवी मंदिर प्रयागराज के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह वह स्थान है जहाँ माता सती के हाथ की तीन उंगलियां गिरी थीं। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यहाँ स्थापित माता की प्रतिमा लगभग 1500 वर्ष प्राचीन है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप वर्ष 1883 में निर्मित हुआ था। यह भी कहा जाता है कि त्रेता युग में महर्षि याज्ञवल्क्य ने इसी स्थान पर माँ की आराधना की थी। मंदिर परिसर में सुबह से ही दुर्गा सप्तशती और नवचंडी पाठ के स्वर गूंजते रहे। शाम को विशेष महाआरती का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने माता को नारियल, चुनरी और विशेष रूप से पेठा का भोग अर्पित किया। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए। कल्याणी देवी मंदिर अब डिजिटल हो चुका है, जिससे जो भक्त मंदिर नहीं पहुँच पा रहे हैं, वे ऑनलाइन दर्शन और आरती का लाभ उठा सकते हैं। स्थानीय पुलिस और स्वयंसेवकों की टीम भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय रही। श्रद्धालुओं का मानना है कि माँ कल्याणी के दर्शन के बिना प्रयागराज की यात्रा अधूरी मानी जाती है। यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
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