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    ब्रिटिश मौलाना के मदरसे पर आज भी चलेगा पोकलैन:संतकबीरनगर में रात 11 बजे तक जुटा रहा प्रशासन, बुलडोजर हटाकर 2 पोकलैन मंगाए, चारदीवारी, 10 पिलर टूटे

    17 hours ago

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    संतकबीरनगर में ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के मदरसे पर आज भी 10 बजे से ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू होगी। 10 बजे पुलिस-प्रशासन की टीम 2 पोकलैन लेकर पहुंचेगी। इससे पहले रविवार को 13 घंटे तक कार्रवाई चली थी। मदरसे की चारदीवारी और 10 से अधिक पिलर टूट चुके हैं। पीछे का करीब 15 फीट हिस्सा ही टूट पाया है। प्रशासन ने 6 बुलडोजर के साथ कार्रवाई शुरू की थी, पर पिलर बेहद मजबूत थे, जिससे दो बुलडोजर के ब्लेड टूट गए। शाम में प्रशासन ने सभी बुलडोजर हटवाकर दो पोकलैन मंगवाए और कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान मौके पर 30 महिला पुलिसकर्मियों समेत करीब 100 पुलिसकर्मी तैनात किया गया है। पीएसी की दो कंपनियां भी लगाई गईं है। एसडीएम हृदय नारायण त्रिपाठी, सीओ प्रियम राजशेखर, आनंद ओझा और कोतवाली प्रभारी जयप्रकाश दुबे की निगरानी में धवस्तीकरण कार्रवाई चल रही है। प्रशासन के मुताबिक, शमसुल ने 8 साल पहले सरकारी जमीन पर 640 वर्गमीटर (करीब 7 हजार वर्गफीट) में तीन मंजिला मदरसे का निर्माण कराया था। इसमें कुल 25 कमरे हैं। इसको बनाने में 5 करोड़ रुपए की लागत आई थी। आरोप है कि इसका निर्माण विदेशी फंडिंग के जरिए किया गया था। मदरसा साल-2024 से बंद है। उस समय मदरसे में करीब 400 बच्चे पढ़ते थे। शमसुल हुदा खान फिलहाल ब्रिटेन में रह रहा है। उसने ब्रिटिश नागरिकता ले रखी है। हालांकि, उसकी पत्नी सकलैन खातून, बेटा तौसीफ रजा, बहू नसरीन खलीलाबाद में रहते हैं। मौलाना 2017 में देश छोड़कर गया था। इसके बावजूद वह 10 साल तक आजमगढ़ के एक मदरसे से वेतन लेता रहा। बाद में अधिकारियों की मिलीभगत से उसने वीआरएस ले लिया। करीब पांच महीने पहले मामला सामने आने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। कल 13 घंटे चला था ध्वस्तीकरण, तस्वीरें देखिए- क्यों हो रही कार्रवाई, पढ़िए प्रशासन के मुताबिक, मदरसा खलीलाबाद तहसील के खलीलाबाद गांव में स्थित है। 2024 में गांव निवासी अब्दुल हकीम ने मदरसे के अवैध निर्माण की शिकायत एसडीएम कोर्ट में की थी। नवंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी करते हुए 15 दिन का समय दिया था। मदरसा प्रबंधन ने डीएम के पास याचिका दाखिल की, लेकिन उसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद मामला कमिश्नर के पास पहुंचा। 25 अप्रैल को बस्ती मंडल के कमिश्नर ने याचिका खारिज करते हुए एसडीएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने मदरसा कमेटी को ध्वस्तीकरण का रिमाइंडर नोटिस जारी किया था। मौलाना के खिलाफ तीन मामले दर्ज, दो में चार्जशीट दाखिल मौलाना के खिलाफ अब तक तीन मुकदमे दर्ज हैं। इसमें विदेशी फंडिंग और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े होने का केस, संतकबीरनगर में तो धोखाधड़ी और आर्थिक गड़बड़ी से जुड़ा केस आजमगढ़ में दर्ज है। तीसरा केस 2 नवंबर 2024 खलीलाबाद कोतवाली में दर्ज कराया गया। इसमें धोखाधड़ी, विदेशी मुद्रा अधिनियम का दुरुपयोग, अवैध आर्थिक लाभ और अन्य गंभीर आरोप हैं। पहले दो मामलों में चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। ATS जांच में मौलाना का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया था मौलाना के खिलाफ एटीएस ने भी जांच की थी। इसमें सामने आया था कि मौलाना शमसुल हुदा खान 2007 से ही संदिग्ध गतिविधियों में शामिल था। इस्लामी प्रचार के नाम पर वह पाकिस्तान के कई शहरों में जाता था। वहां के मौलवियों और धार्मिक संगठनों के संपर्क में था। भारत में वह जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं और कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्क में रहा। आरोप है कि वह 'दावते इस्लाम’ नाम की प्रतिबंधित गतिविधि भी चलाता था। विदेशों से मिली फंडिंग का उसने उपयोग और स्रोत छिपाने की कोशिश की। एटीएस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का प्रयास था। मौलाना, खलीलाबाद में ‘कुलियातुल बनातिर रजबिया’ नाम से एक गर्ल्स मदरसा चला रहा था। 2024 में प्रशासन ने पहला मदरसा सील किया। मौलाना ने तुरंत पास की बाउंड्री में उसी नाम से दूसरा मदरसा खोल लिया। 3 नवंबर, 2025 को दूसरा मदरसा भी सील कर दिया गया। प्रशासन को शक है कि फंडिंग और नेटवर्क इन्हीं संस्थानों से संचालित हो रहे थे। एक मकान में गर्ल्स हॉस्टल भी चला रहा था, जिसमें संतकबीरनगर, बस्ती, आजमगढ़ और अन्य प्रांतों की लड़कियां रहती थीं। शमसुल हुदा ब्रिटेन में रहता था, लेकिन भारत में वेतन ले रहा था संतकबीरनगर का शमसुल हुदा खान 12 जुलाई 1984 को आजमगढ़ के मदरसा 'दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम' में सहायक अध्यापक नियुक्त हुआ था। वर्ष 2007 में वह ब्रिटेन चला गया। वहां की नागरिकता भी 2013 में हासिल कर ली। ब्रिटिश नागरिकता लेने के बाद भी वह भारत के मदरसे से वेतन लेता रहा। उसने मदरसे से 31 जुलाई 2017 तक वेतन लिया। विभागीय मिलीभगत से उसे अनियमित चिकित्सा अवकाश स्वीकृत होते रहे। लगभग 16 लाख रुपए वेतन उसने अवैध रूप से प्राप्त किए। 2017 में उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) दे दी गई। हद तो यह कि उसके जीपीएफ व पेंशन का लाभ भी विभाग ने दिया। करीब पांच महीने पहले मामला सामने आने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इनमें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के संयुक्त निदेशक एस.एन. पांडेय, गाजियाबाद के डीएमओ साहित्य निकष सिंह, बरेली के लालमन और अमेठी के प्रभात कुमार शामिल हैं। आरोप है कि इन अधिकारियों ने आजमगढ़ में पोस्टिंग के दौरान मौलाना को अनुचित लाभ पहुंचाया था।
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