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    बरेली शहर में चल रही थी अवैध शस्त्र फैक्ट्री:पुलिस ने 3 लोगों को शस्त्र बनाने के औजारों के साथ पकड़ा, भारी मात्रा में असलहे बरामद

    4 hours ago

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    बरेली शहर के बीचों-बीच चल रही अवैध शस्त्र फैक्ट्री का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि जनकपुरी पुरानी रेलवे लाइन के पास कुछ लोग अवैध असलहे तैयार कर रहे हैं। सीओ सिटी आशुतोष शिवम के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मौके पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने 3 लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। मौके से भारी संख्या में बने और अधबने तमंचे बरामद किए गए हैं। आधी रात को छापा, भट्टी सुलगाकर बना रहे थे तमंचे थाना प्रेमनगर पुलिस को गश्त के दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि जनकपुरी इलाके में रेलवे लाइन के पास अवैध हथियारों का निर्माण हो रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दबिश दी। मौके पर देखा गया कि कोयले की भट्टी जल रही थी और तीन लोग हथौड़े से तमंचों की मरम्मत और निर्माण कर रहे थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीनों को दबोच लिया। पकड़े गए लोगों की पहचान संजय गंगवार, तेजपाल और राजकुमार उर्फ राजू के रूप में हुई है, जो शेरगढ़ इलाके के रहने वाले हैं। हथियार बनाने के उपकरण और कारतूस बरामद पुलिस ने मौके से 315 बोर के 3 तैयार और एक अधबना तमंचा बरामद किया है। इसके अलावा 12 बोर का एक तैयार तमंचा और 3 जिंदा कारतूस भी मिले हैं। मौके से शस्त्र बनाने के उपकरण जैसे आरी ब्लेड, छेनी, लोहे की नाल, वेल्डिंग रॉड, रेगमाल और हाथ का पंखा आदि भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि पकड़े गए लोगों के खिलाफ धारा 5/25 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। कम पढ़े-लिखे हैं पकड़े गए लोग, मुनाफे के लिए करते थे काम पूछताछ के दौरान पकड़े गए लोगों ने बताया कि वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं। अपनी और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए वे अवैध तमंचे बनाकर बेचते थे। इससे होने वाले मुनाफे को वे आपस में बांट लेते थे। रात के अंधेरे में वे इस काम को अंजाम दे रहे थे ताकि किसी को शक न हो, लेकिन पुलिस की सतर्कता से उनका यह अवैध कारोबार पकड़ा गया। टीम में शामिल पुलिसकर्मी इस सफलता में निरीक्षक अपराध सुरेंद्र कुमार, उपनिरीक्षक सुधीर कुमार, प्रमोद कुमार, अक्षय त्यागी और मुख्य आरक्षी बलवीर कर्दम, नंदकिशोर, यश कुमार के साथ आरक्षी मनीष धामा और अनुराग शामिल रहे। पुलिस अब इनके नेटवर्क का पता लगा रही है कि वे इन हथियारों को कहां और किन लोगों को सप्लाई करते थे।
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