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    बरेली में फर्जी IAS पर लगी मुकदमों की झड़ी:अब तक 22 मुकदमे दर्ज, किसी ने जमीन बेची, किसी ने ऑटो तो किसी ने गिरबी रखे जेवरात, करोड़ो की ठगी

    2 hours ago

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    बरेली में खुद को IAS और ADM बताने वाली शातिर ठग विप्रा शर्मा और उसके गिरोह ने अपनी जालसाजी से सैकड़ों युवाओं का भविष्य और उनके परिवारों की जमा पूंजी लूट ली। पुलिस की गिरफ्त में आई इन बहनों ने एक ऐसा मकड़जाल बुना था, जिसमें फंसा हर शख्स सरकारी नौकरी के नाम पर अपनी गाढ़ी कमाई लुटा बैठा। ठगी का यह सिलसिला साल 2022 से शुरू हुआ और धीरे-धीरे एक बड़े 'क्राइम सिंडिकेट' में बदल गया। नीली बत्ती लगी चमचमाती गाड़ी, गनर का रुतबा और सरकारी रसूख की आड़ में इन बहनों ने करोड़ों की ठगी की वारदात को अंजाम दिया। जब प्रीति लॉयल की शिकायत पर बारादरी पुलिस ने जांच शुरू की, तो इस गिरोह की एक-एक परत खुलती चली गई। अब तक 22 मुकदमे दर्ज हो चुके है, जो इस महाठगी की गवाही दे रही हैं। ठगी के शिकार लोगों की कहानी 1. प्रिति लोयल (FIR सं. 0511): प्रिति लोयल ने बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि वर्ष 2022 में उनकी मुलाकत शिखा पाठक से हुई। शिखा ने बताया कि उसकी बहन डॉ विप्रा शर्मा एसडीएम के पद पर कार्यरत है और पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवा देती है। शिखा ने प्रिति को यूपीएसएसएससी के माध्यम से कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का झांसा दिया। प्रिति ने डॉ विप्रा शर्मा के बैंक खाते में 2 लाख रुपये जमा किए। इसके बाद डॉ विप्रा शर्मा द्वारा आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ के नाम से फर्जी हस्ताक्षर व फर्जी दस्तावेज तैयार कर नियुक्ति पत्र भेजा गया। जब प्रिति लखनऊ के पिकप भवन पहुंची, तो वहां पता चला कि नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी है। 2. प्रशान्त पाल (FIR सं. 0549): नेकपुर निवासी प्रशान्त पाल को शिखा शर्मा और विप्रा शर्मा ने सरकारी नौकरी का लालच देकर ठगी का शिकार बनाया। आरोपियों ने प्रशान्त से कुल 5 लाख रुपये ऐंठे। प्रशान्त ने 2 लाख 40 हजार रुपये ऑनलाइन बैंक खातों में और 2 लाख 60 हजार रुपये नकद दिए। विश्वास दिलाने के लिए आरोपियों ने प्रशान्त को डाक द्वारा फर्जी जॉइनिंग लेटर भी भेजा। प्रशान्त ने अब बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराकर अपनी रकम वापस दिलाने की गुहार लगाई है। 3. श्रीराम गंगवार (FIR सं. 0550): श्रीराम गंगवार को भी शिखा और विप्रा शर्मा ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अपना शिकार बनाया। आरोपियों ने उन्हें विश्वास दिलाने के लिए उनके पते पर फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजा। इस झांसे में आकर श्रीराम ने आरोपियों को 1 लाख 50 हजार रुपये की पूरी रकम नकद दी। पीड़ित ने अब पुलिस से अपनी रकम वापस दिलाने और आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की है। 4. हिमांशु पाल (FIR सं. 0551): हिमांशु पाल को शिखा और विप्रा शर्मा ने सरकारी नौकरी का लालच देकर कुल 4 लाख रुपये की ठगी की। हिमांशु ने यह रकम दिसंबर 2022 से जनवरी 2023 के बीच आरोपियों को नकद और ऑनलाइन माध्यम से दी थी। आरोपियों ने हिमांशु को भी विश्वास दिलाने के लिए डाक द्वारा फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजा था। 5. अंकित कुमार (FIR सं. 0553): अंकित कुमार जब सितंबर 2025 में अपनी डिग्री निकलवाने रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय गए, तो वहां उनकी मुलाकात शिखा शर्मा से हुई। शिखा ने अपनी बहन विप्रा शर्मा को आईएएस और एसडीएम बताया। अंकित को विकास भवन में क्लर्क की नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपये मांगे गए। अंकित ने 7 लाख 50 हजार रुपये नकद विप्रा शर्मा को विभिन्न तारीखों में दिए। अंकित को डाक से फर्जी नियुक्ति पत्र मिला, जिसे लेकर वह जब शाहजहाँपुर के तिलहर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे, तो पता चला कि पत्र फर्जी है। 6. अर्जुन कुमार (FIR सं. 0554): देवरनियां निवासी अर्जुन कुमार की मुलाकात भी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में शिखा शर्मा से हुई थी। विप्रा और शिखा ने विकास भवन में क्लर्क की नौकरी के लिए 10 लाख रुपये की मांग की। अर्जुन ने अपने भाई और पिता के खाते से डॉ। विप्रा शर्मा के बंधन बैंक खाते में कुल 7 लाख रुपये ट्रांसफर किए और कुछ रकम नकद दी। अर्जुन को बदायूँ के दातागंज कार्यालय का फर्जी नियुक्ति पत्र मिला। असलियत पता चलने पर जब उन्होंने पैसे मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। 7. सुरेन्द्र पाल (FIR सं. 0555): सुरेन्द्र पाल से राजस्व लेखपाल की नौकरी दिलाने के नाम पर 15 लाख रुपये मांगे गए थे। सुरेन्द्र ने अपने पिता और भाई के खातों से विप्रा शर्मा के बंधन बैंक खाते में कुल 13 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए। सुरेन्द्र को डाक से बदायूँ तहसील का फर्जी नियुक्ति पत्र मिला। जब वह बदायूँ तहसील पहुंचे, तो वहां उन्हें ठगी का पता चला। आरोपियों ने पैसे वापस मांगने पर सुरेन्द्र को भी जेल भिजवाने की धमकी दी। 8. राजकुमार (FIR सं. 0556): राजकुमार को उनके साले विनोद कुमार उर्फ बब्लू ने झांसे में लिया, जिसने खुद को विप्रा शर्मा का ड्राइवर बताया था। पंचायती राज विभाग में ड्राइवर की नौकरी दिलाने के नाम पर राजकुमार ने अपनी कृषि भूमि और पत्नी के जेवर बेचकर 8 लाख रुपये नकद विनोद कुमार को दिए। आरोपियों ने राजकुमार को चार अलग-अलग फर्जी जॉइनिंग लेटर भेजे। ठगी खुलने पर दबाव बनाने के बाद विप्रा शर्मा ने केवल 2 लाख रुपये ही वापस किए। 9. कश्मीर सिंह (FIR सं. 0558): कश्मीर सिंह ने बताया कि उनकी पड़ोसी डॉ। विप्रा शर्मा ने खुद को एसडीएम बताकर कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी लगवाने की बात कही। कश्मीर ने खुद और अपने भाई दिग्विजय की नौकरी के लिए सितंबर 2021 में 8 लाख 65 हजार रुपये नकद विप्रा के घर जाकर दिए। उन्हें तिलहर, शाहजहाँपुर का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा गया। जांच में पत्र फर्जी पाए जाने पर जब उन्होंने पैसे मांगे, तो विप्रा ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया। 10. मोहम्मद कफील (FIR सं. 0559): कफील की मुलाकात डॉ। विप्रा शर्मा से 2021 में हुई। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताकर सहायक विकास अधिकारी के पद पर नौकरी दिलाने के लिए 5 लाख 25 हजार रुपये मांगे। कफील ने 5 लाख नकद और 25 हजार ऑनलाइन दिए। उन्हें बदायूँ के इस्लामनगर ब्लॉक का फर्जी नियुक्ति पत्र भेजा गया। कफील के अनुसार विप्रा चमचमाती गाड़ी और गनर के साथ चलती थी, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे। 11. भावना गुप्ता (FIR सं. 0560): भावना गुप्ता की मुलाकात डॉ विप्रा शर्मा से फरवरी 2022 में हुई। विप्रा की नीली बत्ती वाली गाड़ी और रुतबा देखकर भावना को यकीन हो गया कि वह अधिकारी है। कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी के लिए भावना ने 1 लाख 50 हजार रुपये नकद दिए। आरोपियों ने भावना को लखनऊ पोस्ट ऑफिस के जरिए करीब 9 फर्जी नियुक्ति पत्र भेजे और 'मिठाई' के नाम पर 16,100 रुपये ऑनलाइन भी लिए। भावना की माँ ने मजदूरी करके और जेवर गिरवी रखकर यह रकम जुटाई थी। 12. कौशल कुमार सिंह (FIR सं. 0563): कौशल कुमार सिंह को विप्रा शर्मा ने खुद को एसडीएम और दीक्षा पाठक ने खुद को वीडीओ बताकर झांसे में लिया। आरोपियों ने पैसे लेकर सरकारी नौकरी लगवाने का वादा किया। कौशल ने विप्रा शर्मा के स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते में 4 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए। पीड़ित ने अब बारादरी थाने में अपनी राशि वापस दिलाने और आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की मांग की है। 13. अर्जुन कुमार (FIR सं. 0564): शेरगढ़ निवासी अर्जुन कुमार की मुलाकात शिखा शर्मा से रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में हुई। शिखा ने अपनी बहन डॉ विप्रा शर्मा को आईएएस अधिकारी बताया। कृषि विभाग में क्लर्क की नौकरी के नाम पर अर्जुन से 11 लाख रुपये मांगे गए। अर्जुन ने 4 लाख रुपये पिता के खाते से ट्रांसफर किए और 50 हजार अपने खाते से, साथ ही 2 लाख रुपये नकद दिए। नौकरी न लगने और फर्जीवाड़े का पता चलने पर जब उन्होंने पैसे मांगे, तो आरोपियों ने उन्हें झूठे मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी। 14. अजय सिंह (FIR सं. 0568): अजय सिंह ने बताया कि फरवरी 2025 में डॉ विप्रा शर्मा एसडीएम की प्लेट लगी लग्जरी गाड़ी से उनके ऑफिस आई थी। विप्रा ने अजय के भाई को ड्राइवर की नौकरी दिलाने के नाम पर 6 लाख रुपये की मांग की। अजय ने कुल 3 लाख रुपये (2 लाख बैंक ट्रांसफर और 1 लाख नकद) दिए। इसके बाद उन्हें डाक से तीन फर्जी नियुक्ति पत्र मिले। पैसे मांगने पर आरोपियों ने उन्हें डराया और धमकाया। 15. फरहत जहाँ (FIR सं. 0569): फरहत जहाँ एक विधवा और अपने परिवार की अकेली कमाने वाली सदस्य हैं। उनकी मुलाकात डॉ। विप्रा शर्मा से उनके ऑफिस में हुई। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताकर बीडीए (BDA) में अधिकारी के पद पर नौकरी दिलाने के लिए 11 लाख रुपये मांगे। फरहत ने अपने जेवर बेचकर 4 लाख रुपये विप्रा के खाते में जमा किए। एक साल तक टालमटोल करने के बाद जब फरहत ने पैसे मांगे, तो उन्हें अधिकारियों की धमकी देकर डराया गया। 16. दिलप्रीत सिंह (FIR सं. 0570): दिलप्रीत सिंह से भी विप्रा शर्मा की मुलाकात उनके ऑफिस में हुई थी। विप्रा ने खुद को एसडीएम बताकर कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर नौकरी लगवाने के लिए 7 लाख रुपये मांगे। दिलप्रीत ने कुल 3 लाख 50 हजार रुपये (नकद और बैंक ट्रांसफर) आरोपियों को दिए। इसके बाद दिलप्रीत को डाक से तीन फर्जी नियुक्ति पत्र मिले। जांच में धोखाधड़ी का पता चलने पर दिलप्रीत ने बारादरी थाने में गुहार लगाई है। 17. अभिषेक मौर्य (FIR सं. 0571): अभिषेक मौर्य को डॉ विप्रा शर्मा ने सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 4 लाख रुपये की मांग की थी। अभिषेक ने आरोपियों के विश्वास में आकर मार्च 2026 के दौरान कुल 2 लाख रुपये की राशि दे दी। बाद में अभिषेक को पता चला कि विप्रा कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक फ्रॉड है और पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है। 18. हिना परवीन (FIR सं. 0572): हिना परवीन को डॉ विप्रा शर्मा ने खुद को पीसीएस अधिकारी बताकर कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी दिलाने का वादा किया। हिना ने बैंक, यूपीआई और नकद माध्यम से आरोपियों को कुल 1 लाख 90 हजार रुपये दिए। आरोपियों ने हिना को 29 मई 2026 को कार्यभार ग्रहण करने का आदेश भी दिया था, जो पूरी तरह फर्जी निकला। 19. विनोद कुमार: जोगी नवादा के स्वतंत्रता सेनानी कॉलोनी निवासी विनोद को एक परिचित ड्राइवर ने डॉ विप्रा शर्मा से मिलवाया था, जिसने खुद को एसडीएम बताया था। विनोद इस झांसे में ऐसा फंसा कि उसने महिला के साथ तीन महीने तक ड्राइवर के तौर पर ड्यूटी भी की। इस दौरान विप्रा ने उसे सरकारी विभाग में स्थायी ड्राइवर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बदले में 7 लाख रुपये की मांग की गई। गरीब विनोद ने सरकारी नौकरी के सपने को सच करने के लिए अपनी जमीन और घर का इकलौता सहारा 'ऑटो' तक बेच दिया और रकम जुटाकर विप्रा, उसकी बहन शिखा और दीक्षा पाठक को सौंप दी। ठगी की हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने विनोद के विश्वास को बनाए रखने के लिए स्पीड पोस्ट के जरिए एक फर्जी जॉइनिंग लेटर भी भिजवा दिया। काफी समय बीतने के बाद भी जब जॉइनिंग नहीं हुई, तब विनोद को ठगी का अहसास हुआ। 20. अमित कुमार राय: डोहरा रोड स्थित सनराइज कॉलोनी निवासी अमित की मुलाकात खुद को एसडीएम (एफआर) बताने वाली विप्रा शर्मा से हुई थी। विप्रा और उसके पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा ने अमित को झांसा दिया कि खंड विकास कार्यालय (ब्लॉक) में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर नियुक्तियां होनी हैं। सरकारी पद का लालच देकर 12 जून 2025 को आरोपियों ने अमित से 20 हजार रुपये ऑनलाइन और 2 लाख 60 हजार रुपये नकद ले लिए। जब नियुक्ति में देरी होने लगी और अमित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो उसे भी एक फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिया गया। अमित के साथ मौजूद एक विश्वविद्यालय कर्मी ने जब उस पत्र की जांच की, तो पता चला कि वह पूरी तरह जाली है। जब पीड़ित अपने पैसे वापस मांगने ग्रीन पार्क स्थित विप्रा के घर पहुंचा, तो वहां मौजूद पिता-पुत्री ने उसे जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। फर्जी रसूख और क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश पुलिस जांच में सामने आया है कि विप्रा शर्मा ने प्रयागराज में सिविल सेवा की तैयारी की थी। वह आईएएस के रुतबे से इतनी प्रभावित हुई कि असफल होने के बाद उसने फर्जी अधिकारी बनकर ठगी का साम्राज्य खड़ा कर लिया। वह अपनी लग्जरी गाड़ी पर एडीएम एफआर उत्तर प्रदेश शासन की प्लेट लगाकर घूमती थी। इस खेल में उसकी बहनें शिकार ढूंढने और माहौल बनाने का काम करती थीं, जबकि पिता वीरेंद्र कुमार शर्मा भी इस सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे। पुलिस ने आरोपियों के खातों को सीज कर दिया है और मामले की गहनता से जांच कर रही है। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि फर्जी IAS विप्रा शर्मा पर अब तक 22 मुकदमे दर्ज हो चुके है। उसे और उसकी बहनों को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है। मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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