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    Bengal में अब नहीं बचेगा कोई घुसपैठिया, Suvendu Adhikari सरकार ने Bangladeshi Infiltrators के खिलाफ छेड़ दिया आर-पार का अभियान

    11 hours ago

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    पश्चिम बंगाल की सीमा पर घुसपैठियों के लिए हालात तेजी से बदल रहे हैं। राज्य में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच चुका है। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने जिस सख्ती और स्पष्टता के साथ अवैध घुसपैठियों के खिलाफ मोर्चा खोला है, उसने पूरे देश में एक मजबूत संदेश दिया है कि भारत की सीमा अब किसी के लिए खुला दरवाजा नहीं रहने वाली।जलपाईगुड़ी के साकाती क्षेत्र में श्याम सीमा चौकी के पास हाल ही में सामने आया मामला इस पूरे संकट की भयावह तस्वीर पेश करता है। बांग्लादेश के दस सदस्यीय परिवार को पहले सीमा सुरक्षा बल ने वापस भेजा, लेकिन बांग्लादेश ने उन्हें स्वीकार करने से इंकार कर दिया। आरोप है कि सीमा पार के सुरक्षाकर्मियों ने गांव वालों को उकसाकर उस परिवार के दस्तावेज तक छीन लिए और फिर उन्हें नो मैन्स लैंड में धकेल दिया। कई दिनों तक खुले आसमान के नीचे बारिश और कठिन हालात में फंसे इस परिवार को आखिरकार भारत ने मानवीय आधार पर भोजन और आश्रय दिया। यह घटना साफ दिखाती है कि बांग्लादेश अपनी ही पहचान वाले लोगों से पल्ला झाड़ रहा है, जबकि भारत लगातार संयम और मानवता का परिचय दे रहा है।इसे भी पढ़ें: West Bengal में Suvendu Adhikari का 'एक्शन मोड', 30 दिन में बदले नियम, TMC में बड़ी बगावत!उधर, सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश सीमा रक्षक बल के बीच उच्च स्तरीय वार्ता भी शुरू हुई है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पर अपराध, अवैध घुसपैठ, तारबंदी तोड़ने की घटनाएं और भारतीय नागरिकों पर हमले अब किसी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जाएंगे। दूसरी ओर ढाका लगातार तथाकथित पुश-इन का मुद्दा उठाकर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन सच यह है कि वर्षों से लाखों अवैध घुसपैठिए भारत की जनसंख्या संरचना, सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों पर बोझ बन चुके हैं। अब जब उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है तो बांग्लादेश की बेचैनी स्वाभाविक है।हम आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने बेहद साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में अब अवैध घुसपैठियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि लगभग पांच हजार अवैध घुसपैठियों को पहले ही बांग्लादेश भेजा जा चुका है जबकि लगभग 900 लोग अभी भी होल्डिंग सेंटर में रखे गए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि राज्य सरकार अब केवल बयानबाजी नहीं बल्कि जमीन पर कठोर कार्रवाई कर रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नागरिकता संशोधन कानून के दायरे में नहीं आने वाले लोगों को सीधे सीमा सुरक्षा बल को सौंपा जा रहा है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।सबसे बड़ी बात यह है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को सीमा पर तारबंदी के लिए तेजी से जमीन उपलब्ध कराई है। पांच सौ छप्पन किलोमीटर लंबी सीमा को सुरक्षित करने के लिए लगभग सौ किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। हम आपको बता दें कि यह वही सीमा है जिसके जरिए दशकों से अवैध घुसपैठ, तस्करी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियां होती रही हैं। अब इन रास्तों को बंद करने की तैयारी ने घुसपैठियों और उनके संरक्षकों में घबराहट पैदा कर दी है।उधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी लगातार सीमा क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। हाल ही में त्रिपुरा से लेकर गुजरात और राजस्थान तक सीमा चौकियों पर जाकर उन्होंने जवानों का मनोबल बढ़ाया है। उन्होंने साफ कहा कि मोदी सरकार सीमा सुरक्षा बल को आधुनिक तकनीक, स्मार्ट फेंसिंग, ड्रोन और सेंसर जैसी सुविधाओं से लैस कर रही है। उनका स्पष्ट संदेश है कि भारत अब केवल सीमा की निगरानी नहीं करेगा बल्कि हर घुसपैठिए की पहचान कर उसे बाहर का रास्ता दिखाएगा।इसके साथ ही अमित शाह ने सीमा से पचास किलोमीटर तक के गांवों में हो रहे संदिग्ध जनसंख्या परिवर्तन और अवैध निर्माण पर नजर रखने के निर्देश भी दिए हैं। यह चेतावनी उन ताकतों के लिए है जो सुनियोजित तरीके से सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या संरचना बदलने की कोशिश कर रही थीं। अब सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ हर गतिविधि पर नजर रख रही हैं।देखा जाये तो आज जरूरत इस बात की है कि देश की सुरक्षा के खिलाफ काम करने वाले हर नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। अवैध घुसपैठ केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय अस्तित्व और सामाजिक संतुलन का प्रश्न बन चुका है। पश्चिम बंगाल में शुरू हुआ यह अभियान अब पूरे देश के लिए उदाहरण बनता दिख रहा है।बहरहाल, बांग्लादेशी घुसपैठियों को यह समझ लेना चाहिए कि यह अब पहले वाला भारत नहीं है। अब यहां घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज, अवैध बसावट और जनसंख्या घुसपैठ की राजनीति नहीं चलेगी। जो लोग अवैध तरीके से भारत में रह रहे हैं, उनके लिए स्पष्ट संदेश है कि या तो कानून का पालन करें या फिर वापस लौटने के लिए तैयार रहें। भारत की सीमाएं अब अभेद्य बनने की दिशा में बढ़ चुकी हैं और राष्ट्र की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता अब संभव नहीं है।
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