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    बैंड-बाजे के साथ बेटी को वापस घर ले आए पिता:रिटायर्ड जज पिता ने कहा- मेरी बेटी कोई सामान नहीं, 'I Love My Daughter' लिखी टी-शर्ट पहनी

    6 hours ago

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    मेरठ में एक रिटायर्ड जज पिता ने तलाक के बाद अपनी बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया। बेटी को तलाक के बाद परिवार के लोग ढोल की थाप पर नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। बेटी के स्वागत में फूल-मालाएं पहनाई गईं। पूरा उत्सव जैसा माहौल बनाया। वहीं इस दौरान परिवार के सभी सदस्य एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे, जिस पर प्रणिता की तस्वीर के साथ 'I Love My Daughter' लिखा हुआ था। हर चेहरे पर बेटी की घर वापसी की खुशी साफ झलक रही थी। पिता ने कहा- अगर मेरी बेटी अपनी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। मैंने कोई एलीमनी, मेंटेनेंस या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी को वापस लाया हूं। अब पढ़िए पूरा मामला रिटायर्ड जज ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता शर्मा की शादी 14 दिसंबर 2018 को एक मेजर से की थी। शादी के बाद से पति और ससुराल वाले उसको प्रताड़ित करने लगे। पिता ने बताया- पिछले 7 सालों में मेरे बेटी को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। पति और ससुराल पक्ष की ओर से बेटी को मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित किया गया। मेरी बेटी कई बार सोचा सब ठीक हो जाएगा, लेकिन हालात नहीं बदले। इसके बाद मेरी बेटी ने तलाक लेने का मन बनाया। इसके बाद उसने मेरठ के फैमिल कोर्ट में तलाक की अर्जी दी। 3 अप्रैल को तलाक मंजूर हो गया। इसके बाद हम लोग बेटी प्रणिता शर्मा को तलाक के बाद पूरे सम्मान के साथ घर वापस लाए है। परिवार ने मिठाइयां बांटकर खुशी जताई इस दौरान परिवार के लोग ढोल की थाप पर नाचते-गाते नजर आए। मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। बेटी के स्वागत में फूल-मालाएं पहनाई गईं और पूरे माहौल में उत्सव जैसा माहौल दिखा। खास बात यह रही कि परिवार के सभी सदस्य एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे, जिस पर प्रणिता की तस्वीर के साथ 'I Love My Daughter' लिखा हुआ था। हर चेहरे पर बेटी की घर वापसी की खुशी साफ झलक रही थी। पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए- प्रणिता शर्मा प्रणिता शर्मा ने बताया- मैं मानसिक रूप से बहुत कमजोर हो चुकी थी, लेकिन मेरा परिवार मेरे साथ खड़ा रहा। मैं अन्य महिलाओं को संदेश देते हुए कहा कि अगर वे किसी तरह की प्रताड़ना झेल रही हैं, तो उन्हें अपने लिए खड़ा होना चाहिए। पहले खुद को मजबूत बनाइए, पढ़िए-लिखिए, अपने पैरों पर खड़े होइए। उसके बाद ही शादी के बारे में सोचिए। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बेटियों को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाना ही असली सशक्तिकरण है। प्रणिता शास्त्री नगर स्थित प्रणव वशिष्ठ जुडिशल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर है। पिता ने कहा- मेरी बेटी है, कोई सामान नहीं ज्ञानेंद्र शर्मा ने समाज को संदेश देते हुए कहा- बेटी को भी बेटे की तरह परिवार का समान सदस्य मानना चाहिए। समाज में यह सोच रही है कि बेटी की डोली जाती है, तो अर्थी ही लौटनी चाहिए। इसमें थोड़ा बदलाव तो आया है, लेकिन असली बदलाव अभी बाकी है। बेटी को हर हाल में ससुराल में रहने के लिए मजबूर करना गलत है। उन्होंने कहा- अगर मेरी बेटी अपनी शादी में दुखी थी, तो उसे खुशी देना मेरा दायित्व था। मैंने कोई एलीमनी, मेंटेनेंस या सामान नहीं लिया, सिर्फ अपनी बेटी को वापस लाया हूं। पिता ने यह भी कहा- महिलाओं के सशक्तिकरण की बात सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जमीन पर उतारना जरूरी है। मेरी बेटी शादी में बाजे-गाजे के साथ विदा हुई थी, आज तलाक के बाद मैं उसे उसी सम्मान के साथ वापस लाया हूं।
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