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    'बच्ची मेरे सामने तड़पती रही, डॉक्टर ने देखा तक नहीं':बांदा में मां बोली- डॉक्टर पर कार्रवाई हो; अस्पताल की लापरवाही से 5 साल की बच्ची का पैर काटा गया

    3 hours ago

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    'मेरे सामने बेटी घंटों दर्द से बिलखती थी। मैं डॉक्टरों से बार-बार कहती रही कि एक बार चलकर मेरी बेटी को देख लीजिए, लेकिन वो बहाने बनाते रहे। मेरी आंखों के सामने बच्ची का पैर काला पड़ गया। आखिरकार उसे काटना पड़ा। मेरी 5 साल की बेटी की जिंदगी बर्बाद हो गई। आज वह अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती। मैं चाहती हूं कि डॉक्टरों पर कार्रवाई हो। अगर ऐसे ही चलता रहा तो गरीबों के बच्चे ऐसे ही लाचार होते रहेंगे।' ये दर्द है बांदा की 5 साल की मानवी की मां रोशनी का। मानवी 23 दिसंबर 2025 को छत से गिरकर घायल हुई थी। परिवार का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज और बाद में निजी अस्पताल में इलाज के दौरान हुई लापरवाही के चलते उसका पैर नहीं बचाया जा सका। 7 जनवरी 2026 को मानवी का पैर काटना पड़ा। बेटी के इलाज में परिवार का घर, खेत, जेवर और मवेशी तक बिक गए। दैनिक भास्कर की टीम जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर शहर कोतवाली क्षेत्र के पड़ुई गांव में पहुंची और परिवार से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… हादसे के बाद ननिहाल में रह रहा परिवार शहर कोतवाली क्षेत्र के तिंदवारा गांव के रहने वाले अनिल कुमार मजदूरी करते हैं। परिवार में पत्नी रोशनी और तीन बेटियां मानवी (5), कोमल (3) और जाह्नवी (11 महीने) हैं। मानवी के इलाज में अनिल का घर और मवेशी तक बिक गए। अब पूरा परिवार रोशनी के मायके पड़ुई गांव में रह रहा है। पिता अनिल ने बताया कि 23 दिसंबर को बड़ी बेटी मानवी छत पर खेल रही थी। खेलते समय वह अचानक नीचे गिर गई। दोपहर करीब 2 बजे हादसा हुआ। शाम 4 बजे परिवार उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचा। इमरजेंसी में बच्ची का एक्स-रे और सीटी स्कैन हुआ। अनिल के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया कि केवल बाएं पैर की जांघ की हड्डी टूटी है। न तो खून का थक्का जमा है और न ही कोई नस ब्लॉक है। पट्टी बंधने के बाद शुरू हुआ तेज दर्द मानवी को ऑर्थो वार्ड में शिफ्ट किया गया। अनिल के मुताबिक, एक दिन बाद डॉक्टर विनीत सिंह अपनी टीम के साथ बच्ची को देखने आए। उन्होंने भी पैर देखकर कहा कि कोई थक्का या नस में ब्लॉकेज नहीं है। इसके बाद वार्ड के एक कर्मचारी ने बच्ची के पैर में स्प्लिंट और पट्टी बांधी। इसके बाद से मानवी लगातार दर्द से रोने लगी। पिता ने महिला डॉक्टर से शिकायत की। अनिल के मुताबिक, डॉक्टर ने कहा कि जांघ की हड्डी टूटी है, इसलिए थोड़ा दर्द होगा और बच्ची को सिरप पिला दें। दर्द कम नहीं हुआ तो 25 और 26 दिसंबर को भी शिकायत की गई। इसके बाद पट्टी ढीली कर दी गई। अनिल का आरोप है कि डॉक्टर ने उन्हें डांटते हुए कहा, “तुम डॉक्टर हो कि हम डॉक्टर हैं?” पांच दिन में एक बार भी देखने नहीं आए डॉक्टर अनिल ने बताया कि इसके बाद बच्ची का पैर ठंडा और काला पड़ने लगा। 29 दिसंबर को ऑपरेशन की तारीख मिली। उनका आरोप है कि इन पांच दिनों में डॉक्टर विनीत सिंह एक बार भी बच्ची को देखने नहीं आए। ऑपरेशन से पहले परिवार से 35 हजार रुपए जमा कराए गए। ऑपरेशन थिएटर में पट्टी खोली गई तो बच्ची का पूरा पैर काला पड़ चुका था। पैर खराब होने का दोष परिवार पर लगाया अनिल के मुताबिक, डॉक्टर विनीत सिंह ने उन्हें अंदर बुलाकर पूछा कि बच्ची का पैर काला कैसे पड़ गया। उनका आरोप है कि पैर खराब होने का दोष भी उन पर लगाया गया। इसके बाद डॉक्टर ने बताया कि पैर सड़ गया है और उसे काटना पड़ेगा। अनिल ने कहा, “मैंने कहा कि जांघ की हड्डी टूटने से पैर नहीं काटा जाता। ये सब गलत इलाज से हुआ है।” इसके बाद बच्ची को लखनऊ रेफर कर दिया गया। परिवार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज की ओर से एंबुलेंस भी नहीं मिली। रात करीब 11 से 12 बजे वे केजीएमयू पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद एंजियोग्राफी या सीटी स्कैन कराने की सलाह दी। परिवार के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया कि पैर की नस में ब्लॉकेज की स्थिति देखने के बाद ही पता चलेगा कि पैर बच सकता है या नहीं। निजी अस्पताल में भी इलाज कराया, छह जगह लगाए चीरे इसके बाद परिवार मानवी को एक निजी अस्पताल लेकर गया। अनिल के मुताबिक, डॉक्टरों ने बच्ची के पैर में छह जगह चीरे लगाए, ताकि नसें खुल सकें और खराब खून निकल सके। इलाज के बावजूद पैर में सुधार नहीं हुआ। डॉक्टरों ने कहा कि बच्ची का पैर काटना पड़ेगा। 7 जनवरी 2026 को उसका पैर काट दिया गया। अनिल ने बताया कि इलाज में करीब 3 से 3.5 लाख रुपए खर्च हो गए। उन्होंने कहा, “हमारे पास कुछ नहीं बचा है। कभी किराये का ई-रिक्शा चलाते हैं, कभी मजदूरी कर लेते हैं। बेटी का एडमिशन भी नहीं करा पा रहे हैं।” अखिलेश से मिले, मदद का भरोसा अनिल ने बताया कि 10 सितंबर को परिवार अखिलेश यादव से मिला। उन्होंने पूरा सहयोग देने, आर्थिक मदद करने और इलाज में सहायता का भरोसा दिया है। साथ ही लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई कराने का भी आश्वासन दिया है। परिवार के मुताबिक, इलाज के दौरान भी अखिलेश यादव की ओर से मदद की गई थी। मां बोली- बेटी दर्द से बिलखती थी मानवी की मां रोशनी ने बताया, “मेरी बेटी दर्द से बिलखती थी। मैं डॉक्टरों से कहती थी कि चलकर देख लो, लेकिन ऑर्थो विभाग के डॉक्टर छुट्टियों का बहाना बनाते रहे और अपने निजी अस्पताल में व्यस्त रहे।” रोशनी का आरोप है कि डॉक्टरों के निजी स्वार्थ के कारण उसकी बच्ची का पैर खराब हुआ। उन्होंने कहा कि परिवार गरीब था, इसलिए बड़े अस्पताल में इलाज नहीं करा सका। पैसों की कमी के कारण अब बेटी का एडमिशन भी नहीं करा पा रहे हैं। रोशनी ने कहा, “मेरी बेटी के साथ जो हुआ है, उसकी सजा डॉक्टर को मिलनी चाहिए। उस डॉक्टर का लाइसेंस रद्द हो और उसका अस्पताल सील किया जाए। अगर ऐसे ही चलता रहा तो गरीबों के बच्चे ऐसे ही लाचार होते रहेंगे।” नानी बोली- बेटी का परिवार हम पाल रहे मानवी की नानी प्रेमवती ने बताया कि बेटी के ससुराल पक्ष ने भी उन्हें छोड़ दिया। वह अपनी बेटी, दामाद और नातिनों को अपने पास रखकर परिवार चला रही हैं। उन्होंने बताया कि एक हादसे में दामाद भी दिव्यांग हो गए थे और उनके इलाज में काफी पैसा खर्च हुआ। बच्ची और दामाद के इलाज में उनके 3-4 बीघा खेत और जेवर तक बिक गए। अब परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया है। प्रेमवती ने बताया कि घर का खर्च चलाने और परिवार का पेट पालने के लिए वह मजदूरी करती हैं। दामाद भी कभी ठेला लगाते हैं तो कभी ई-रिक्शा चलाते हैं। उनके मुताबिक, सरकार या प्रशासन की ओर से अब तक कोई सहायता नहीं मिली है। परिवार की बदहाली को देखते हुए उन्होंने बच्ची के आगे के इलाज के लिए शासन-प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। बच्ची बोली- डॉक्टर बनकर सुई लगाऊंगी मानवी अब घरवालों के सहारे चलती है। मासूम भाषा में वह कहती है, “डॉक्टर ने मेरा पैर खराब कर दिया है। उसे सजा दो। मैं स्कूल जाना चाहती हूं। पढ़कर मैं डॉक्टर बनूंगी, फिर सुई लगाऊंगी।” CMO बोले- जांच में डॉक्टर के स्तर पर चूक मिली CMO विजेंद्र सिंह ने बताया कि मानवी मेडिकल कॉलेज में फ्रैक्चर हुए पैर के इलाज के लिए आई थी। बाद में ऐसी स्थितियां बनीं कि उसका पैर काटना पड़ा। मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉक्टरों की समिति ने मामले की जांच की और रिपोर्ट DM को भेजी गई। CMO के मुताबिक, प्रथम दृष्टया डॉक्टर के स्तर पर कुछ चूक या पक्ष कमजोर मिला है। हालांकि, संबंधित डॉक्टर के सस्पेंशन या विभागीय कार्रवाई पर टिप्पणी करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। ---------------- यह खबर भी पढ़ें… क्या संजय निषाद वाकई पाला बदल सकते हैं:SC दर्जे की मांग पर कहां फंसा पेंच; गठबंधन टूटा तो भाजपा को कितना नुकसान यूपी के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या संजय निषाद पाला बदलने वाले हैं? इस पर उनका रिएक्शन भी आया। आज यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए, क्या वाकई भाजपा से उनका गठबंधन टूटने वाला है? निषाद समाज के SC दर्जे पर पेंच कहां फंसा है? संजय ने पाला बदला, तो भाजपा को कितना नुकसान होगा? पढ़ें पूरी खबर…
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