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    अतरौलिया सीट पर निषादों का वर्चस्व- संजय निषाद:राजभर की दावेदारी पर कहा- पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना बयान, सीट नहीं मिली तो निर्दलीय लड़ेंगे

    5 hours ago

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    मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अपनी पारंपरिक जहूराबाद सीट के बजाय निषाद पार्टी की सीट अतरौलिया से इलेक्शन लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस बात को लेकर निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद ने नाराजगी जताई है। वाराणसी में संजय निषाद ने कहा- जब तक भाजपा सीट बंटवारा ना करे तब तक कोई बयानबाजी ठीक नहीं। संजय निषाद ने कहा- अभी तो सीटों का बंटवारा भी नहीं हुआ है, ना ही किसी सीट को लेकर किसी कोई बातचीत हुई है। फिर भी ओमप्रकाश राजभर ने अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने की बात कही जो ठीक नहीं है। यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। अब पढ़िए संजय निषाद ने क्या कहा… कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा- अतरौलिया की सीट निषाद बिरादरी की बाहुल्य सीट है, यहां पर निषाद पार्टी की पहली दावेदारी है। पिछले विधानसभा चुनाव में निषाद प्रत्याशी कुछ वोटों से हारकर रनर रहा था, इस चुनाव में निषाद प्रत्याशी ही जरूर लड़ेगा। अगर गठबंधन में सीट उन्हें नहीं मिली तो प्रत्याशी निर्दलीय या निषाद पार्टी से लड़ेगा। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा- ओम प्रकाश राजभर ने बिना किसी चर्चा के ऐलान क‍िया है, तो वही इस बारे में जानें। हम मर्यादा में रहने वाले हैं, उन्होंने मर्यादा का मान नहीं रखा, उनको बातचीत करना चाहिए था। व‍िरोध जताते हुए कहा क‍ि अगर हम उनकी सीट पर ऐसे ही ऐलान करने लगे तो क्‍या उनको ठीक लगेगा? भाजपा हमारे लिए बड़े भाई के समान भाजपा हमारे लिए बड़े भाई के समान है। हम हमेशा उसके राय के अनुसार ही काम करते हैं। गठबंधन का यह नियम होता है कि बिना किसी सहमति के हम कोई राय नहीं दें। वैसे भाजपा ने हमें आज तक जो भी राजनीतिक राय दी है हमारे लिए पूरी तरह से फायदेमंद रहा है। वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा ये देखना चाहिए यह बात राजनीति के गठबंधन धर्म के पूरी तरह खिलाफ है। अगर वास्तव में राजभर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उन्हें इस मामले में बात जरूर करनी चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि वहां किस बिरादरी की जनसंख्या ज्यादा है। संजय निषाद ने कहा- पूरे प्रदेश में 80 सीटों पर निषाद समाज के मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। ऐसे में अगर भाजपा हमें जिन सीटों से भी चुनाव लड़ाएगी हम वहां से जीत कर दिखाएंगे। निषाद ने कहा कि कुछ सीटें ऐसी भी रहीं जहां हमारे हार और जीत का अंतर काफी कम रहा। ऐसे में अगर भाजपा हमें उन सीटों पर फिर से मौका देती है तो वहां हम जरूर चुनाव जीतकर दिखाएंगे। ओमप्रकाश राजभर की बात पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना संजय निषाद ने बताया कि 2022 के चुनाव में भाजपा से गठबंधन में अतरौलिया सीट हमारी पार्टी को मिली थी। यहां से हमने प्रशांत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था,लेकिन वह सपा के संग्राम यादव से हार गए। वह दूसरे नंबर पर रहे। इस हार के बाद भी प्रशांत सिंह इलाके में निषाद पार्टी को मजबूत करने का काम किया है। ऐसे में ओमप्रकाश राजभर का यहां से चुनाव लड़ने की बात कहना पूरी तरह से गैर जिम्मेदाराना है। पहले पढ़िए आजमगढ़ में राजभर ने क्या कहा वहीं सुभासपा प्रमुख और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर की नजर अब आजमगढ़ पर है। इसीलिए वह 3 महीने से लगातार आजमगढ़ का दौरा कर रहे हैं। गुरुवार को राजभर ने आजमगढ़ में कहा- सुभासपा यहां की सभी 10 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसको लेकर लगातार तैयारी चल रही है। आजमगढ़ किसी का गढ़ नहीं है। यहां सभी जाति-धर्म के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट से भी चुनाव लड़ेंगे। इस बार 40000 से अधिक वोटों से चुनाव जीतेंगे। मुजफ्फरनगर में जब दंगे हो रहे थे, तब अखिलेश नाच देख रहे थे दैनिक भास्कर से बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने किडनी कांड और धुरंधर फिल्म पर बयानबाजी को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तंज कसा। कहा कि वह कोडीन भैया, कालीन भैया की बात करते हैं। रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू करने की बात नहीं करते। 27 परसेंट आरक्षण लागू करने की बात नहीं करेंगे। पिछड़ों को हिस्सा दिलाने की बात नहीं करेंगे। उल्टा-पुल्टा बयानबाजी करते हैं। योगी सरकार में कोई दंगा नहीं हुआ, सब चंगा राजभर ने कहा- अखिलेश यादव को यह बताना चाहिए कि जब मुजफ्फरनगर में दंगे हो रहे थे, तब वो सैफई में नाच देख रहे थे। सपा की सरकार में दंगे होते थे। कर्फ्यू लगता था। अब योगी आदित्यनाथ की सरकार है। कोई दंगा नहीं हुआ। यूपी में सब चंगा है। हम चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। सभी कार्यकर्ताओं को पार्टी संगठन की मजबूती को लेकर जुट जाने के लिए कहा है। हमारे सभी कार्यकर्ता तेजी से तैयारियों में लगे हुए हैं। अब जानिए अतरौलिया सीट का समीकरण अतरौलिया सीट पर वर्तमान में सपा विधायक संग्राम यादव 2012 से लगातार जीत रहे हैं। इसी सीट से इनके पिता बलराम यादव भी चार बार से विधायक रह चुके हैं और सपा सरकार में मंत्री पद पर भी रहे है। अगर आकड़ों को देखा जाए तो अतरौलिया सीट से अभी तक एक बार कांग्रेस और दो बार बसपा के प्रत्याशी ही चुनाव जीते हैं। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में मोदी लहर के बाद भी समाजवादी पार्टी के संग्राम यादव ने बाजी मारी थी। जातिगत वोटरों की बात करें तो दलित और सवर्ण वोटर जीत की भूमिका निभाने में इस सीट पर काफी अहम भूमिका निभाते रहे हैं। यहां पर यादव 60 से 70 हजार और मुस्लिम 40 से 50 हजार के बीच हैं। राजभर और निषाद करीब 60 से 70 हजार के बीच हैं। इसके अलावा दलित (जाटव, पासी) करीब 40 हजार से 50 हजार के बीच में हैं। ब्राह्मण 20 से 30 हजार, क्षत्रिय भी 20 से 25 हजार, वैश्य/बनिया भी करीब 25 हजार एवं अन्य छोटी जातियाें के करीब 20 से 30 हजार के बीच मतदाता हैं। अब ऐसे में सवर्ण और दलित वोट जिस तरफ जाता है, जीत लगभग उसी पार्टी के प्रत्याशी की होती है। यादव और मुस्लिम फैक्टर के साथ ही विकास कार्यों की बदौलत संग्राम यादव जीतते रहे हैं। 2027 में राजभर और निषाद करीब 70 हजार और यादव और मुस्लिम मिलाकर करीब एक लाख से अधिक वोटर हैं। इसके अलावां बनिया, ब्राह्मण और क्षत्रिय मिलाकर करीब 60 हजार वोटर हैं। दलित और सवर्ण निभाएंगे महत्वपूर्ण भूमिका में है। अतरौलिया सीट से अब तक विजयी प्रत्याशी 1. 1980 में कांग्रेस के शंभूनाथ सिंह जीते 2. बलराम यादव बीकेडी भारतीय क्रांति दल से लड़े हार गये। 3. लोकदल के टिकट पर बलराम यादव 1984 में पहली बार जीते 4. 1989 में जनता दल के टिकट पर दूसरी बार जीते 5. 1991 और 93 में सपा के टिकट पर जीते 6. 1996 में बसपा के विभूति निषाद जीते 7. 2001 में सपा से बलराम यादव जीते 8. 2007 में बसपा से सुरेंद्र मिश्रा जीते 9. 2012 में बलराम यादव ने यह सीट अपने बेटे संग्राम यादव को दी। इसके बाद से तीन बार से लगातार 2012 से अब तक संग्राम यादव जीतते रहे हैं। विधानसभा अतरौलिया कुल मतदाता 3,23579 पुरुष मतदाता : 176670 महिला मतदाता : 146899 अन्य मतदाता : 10 ----------------------------- ये खबर भी पढ़िए- नोएडा एमिटी यूनिवर्सिटी के छात्र की गड्‌ढे में डूबकर मौत, परीक्षा खत्म होने के बाद दोस्तों के साथ गया था नोएडा में एमिटी यूनिवर्सिटी के 23 साल के छात्र हर्षित भट्ट की पानी से भरे गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, बुधवार शाम को परीक्षा खत्म होने के बाद हर्षित अपने तीन दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने गया था। इसी दौरान वह गड्ढे में उतर गया। वह गहराई में चला गया और डूबने लगा। दोस्तों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। 20 मिनट बाद पुलिस गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंची और हर्षित को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पढ़ें पूरी खबर
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