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    असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा मूल्यांकन पांच विषयों तक सीमित:हाईकोर्ट ने शेष 28 बेदाग विषयों के उम्मीदवारों को दी राहत, 18 को परीक्षा

    3 hours ago

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    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के असिस्टेंट प्रोफेसर उम्मीदवारों के लिए सभी विषयों की पुनर्परीक्षा आयोजित करने के फैसले में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि संपूर्ण लिखित परीक्षा को रद्द करना अनुचित है, क्योंकि पेपर लीक के सबूत स्पष्ट रूप से 33 में से केवल पांच विषयों तक ही सीमित थे। हाईकोर्ट ने यह आदेश एकल जज के आदेश के खिलाफ दाखिल विशेष अपील पर शुक्रवार को पारित किया। विशेष अपील पर बहस करते हुए सीनियर एडवोकेट राहुल श्रीपत एवं ईशिर श्रीपत ने कोर्ट को बताया कि 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों पर चयन के लिए मूल रूप से 16 और 17 अप्रैल, 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। पेपर लीक मामले पर सभी विषयों के लिए नई परीक्षा होनी थी पेपर लीक के आरोपों की जांच के बाद आयोग और राज्य सरकार ने सभी विषयों के लिए नई परीक्षा का आदेश दिया था। जांच में आयोग के एक संविदा कर्मचारी महबूब अली और शॉर्टलिस्ट किए गए 18 उम्मीदवारों की संलिप्तता का खुलासा हुआ था। न्यायालय ने पाया कि लीक के स्थापित साक्ष्यों से केवल पांच विशिष्ट विषयों के उम्मीदवारों को लाभ हुआ, इसमें उर्दू, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र और जंतु विज्ञान था। अदालत ने उल्लेख किया कि, प्राथमिकी दर्ज होने के एक वर्ष बीत जाने के बावजूद, ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया है जो यह बताए कि पेपर लीक ने शेष 28 विषयों को प्रभावित किया है, जिनमें 682 पद शामिल हैं। दागदार, बेदाग उम्मीदवार अलग हों हाईकोर्ट ने कहा कि दागदार और बेदाग उम्मीदवारों को अलग किया जा सकता है। यद्यपि न्यायालय ने अंतिम समय में होने वाली असुविधा से बचने के लिए 18 अप्रैल, 2026 को निर्धारित पुनर्परीक्षा को जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन इसने बेदाग उम्मीदवारों की सुरक्षा के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि 28 बेदाग विषयों के लिए कोई मूल्यांकन नहीं होगा। आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह 28 बेदाग विषयों (जैसे अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, कानून, इतिहास, भौतिकी आदि) के उम्मीदवारों के लिए 18 अप्रैल, 2026 की पुनर्परीक्षा की ओएमआर शीट का मूल्यांकन न करे। मूल्यांकन 5 दागदार विषयों तक सीमित रहेगा।आयोग 18 अप्रैल, 2026 की पुनर्परीक्षा से केवल उन उम्मीदवारों की ओएमआर शीट का मूल्यांकन करेगा जो पांच दागदार विषयों जैसे - उर्दू, समाजशास्त्र, जंतु विज्ञान, हिंदी और भूगोल में उपस्थित होंगे। आदेश में कहा गया है कि अंतिम साक्षात्कार चरण के लिए, आयोग को 28 बेदाग विषयों के लिए अप्रैल 2025 की मूल परीक्षा से शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को संकलित करना होगा, और उन्हें पांच दागदार विषयों के लिए पुनर्परीक्षा से नए शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के साथ मिलाना होगा। कोर्ट ने इसी के साथ विशेष अपील को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया है । जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि कदाचार से अप्रभावित विषयों के उम्मीदवारों को अनुचित रूप से दंडित न किया जाए।
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