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    अमेठी में फसल अवशेष जलाने पर सख्त कार्रवाई:कृषि विभाग ने किसानों से की वैज्ञानिक प्रबंधन की अपील

    1 hour ago

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    अमेठी जनपद में फसल अवशेष (पराली) जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। उप कृषि निदेशक सत्येन्द्र कुमार ने सभी किसानों से अपील की है कि वे खेतों में फसल अवशेष न जलाएं, बल्कि उनका वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन करें। उप कृषि निदेशक ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद आवश्यक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इससे मृदा की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और उसका तापमान बढ़ने से भौतिक, रासायनिक एवं जैविक संरचना प्रभावित होती है। मिट्टी में रहने वाले लाभकारी जीवाणु और मित्र कीट भी नष्ट हो जाते हैं, जिससे खेती की उत्पादकता घटती है। उन्होंने यह भी बताया कि पराली जलाने से निकलने वाली गैसें वायु गुणवत्ता को खराब करती हैं। इससे आंखों में जलन, त्वचा रोग, तथा हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अतिरिक्त, पशुओं के चारे की व्यवस्था पर भी विपरीत असर पड़ता है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे सुपर एसएमएस, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, मल्चर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर फसल अवशेषों का प्रबंधन करें। ये यंत्र कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक पर किराये पर उपलब्ध हैं। उप कृषि निदेशक ने स्पष्ट किया कि फसल अवशेष जलाना उच्चतम न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशानुसार दंडनीय अपराध है। इसकी निगरानी सेटेलाइट के माध्यम से की जा रही है। उल्लंघन करने वाले किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। जुर्माने के तहत 2 एकड़ से कम भूमि पर 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ पर 5000 रुपये तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 15000 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। कृषि विभाग ने किसानों से पुनः अपील की है कि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें खेत में मिलाकर खाद बनाएं, जिससे मृदा स्वास्थ्य बेहतर हो और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।
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