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    आगरा को मिलने जा रहा एक और विश्वविद्यालय:केंद्रीय हिंदी संस्थान को मिली NOC, तीन साल में पूरे करने होगे मानक

    4 hours ago

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    आगरा के केंद्रीय हिंदी संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 5 मई 2025 को संस्थान को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया है। यूजीसी के नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि संस्थान को तीन साल के भीतर सभी जरूरी मानक और औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद आधिकारिक रूप से विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा। यूजीसी की एनओसी मिलते ही संस्थान में जश्न का माहौल है। विश्वविद्यालय बनने के बाद यहां उच्च शिक्षा और शोध के नए अवसर खुलेंगे। देश-विदेश के छात्रों को हिंदी के प्रचार-प्रसार और अनुसंधान के लिए बेहतर मंच मिलेगा। मानद विश्वविद्यालय बनाए जाने की प्रक्रिया के तहत गठित पहली समिति के संयोजक और संस्थान के वरिष्ठ प्रोफेसर उमापति दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2022 में समिति का गठन किया गया था। इसमें उनके साथ अनुपम श्रीवास्तव और केसरी नंदन शामिल थे। समिति ने यूजीसी की हाई पावर कमेटी के समक्ष ऑनलाइन विस्तृत प्रस्तुति देकर यह तथ्यात्मक पक्ष रखा कि संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा क्यों दिया जाना चाहिए। प्रस्तुति और भविष्य की कार्ययोजना से संतुष्ट होकर यूजीसी ने संस्थान को आगे की प्रक्रिया के लिए अनुमति देते हुए एनओसी जारी की। अब संस्थान को तीन वर्षों में शैक्षणिक, प्रशासनिक से लेकर संरचना की कमियों को दूर कर निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। प्रो. दीक्षित ने बताया कि संस्थान का यूजीसी और भारत सरकार के साथ औपचारिक समझौता (एमओयू/एमओए) भी प्रक्रिया में है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने और मंत्रालय से स्वीकृति मिलते ही संस्थान को मानद विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करने की मान्यता मिल जाएगी। विश्वविद्यालय बनने के बाद क्या होगा खास -विश्वविद्यालय बनने के बाद संस्थान खुद अपनी डिग्री जारी कर सकता है। -पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन का अधिकार संस्थान के पास आ जाता है -नए और आधुनिक कोर्स शुरू करने की स्वतंत्रता मिलती है। -रिसर्च के लिए सीधे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और सरकार से फंडिंग व प्रोजेक्ट मिल सकते हैं। पीएचडी और उच्चस्तरीय शोध कार्य को बढ़ावा मिलता है। -संस्थान अन्य कॉलेजों को अपने साथ संबद्ध कर सकता है। -विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ एमओयू और एक्सचेंज प्रोग्राम आसान हो जाते हैं। -इंफ्रास्ट्रक्चर (लैब, लाइब्रेरी, कैंपस सुविधाएं) के लिए ज्यादा फंड मिलता है
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